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सीईपीसी कर्मचारी की मौत पर सवाल
Updated Tue, 29 May 2018 12:32 AM IST
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भदोही। बीते आठ मई को मर्यादपट्टी स्थित कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) कार्यालय के शौचालय में संदिग्ध हाल में जलने से हुई कर्मचारी संजय श्रीवास्तव की मौत के 20
दिन बाद उसके बेटे हर्षित श्रीवास्तव ने सवाल उठाते हुए जांच कराने की मांग की है। हर्षित मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में कहा कि उसके पिता की सामान्य मौत सहज नहीं बल्कि हत्या की गई थी। उसके खुलासे के लिए उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए है।
हर्षित ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली के जरिये मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। उसका कहना है कि घटना वाले दिन वह भोपाल स्थित अपने कॉलेज में था। सूचना मिलने पर वह अगले दिन घर पहुंचा। तब तक पिता के शव का अंतिम संस्कार हो चुका था। उसने कहा कि मेरे पिता पर ब्याज के भारी दबाव में होने की अफवाह जानबूझ कर फैलाई गई, ताकि उनकी मौत के कारणों पर किसी का ध्यान न जाए। बताया कि मेरे पिता सुबह 9.08 बजे घर से कार्यालय के लिए निकले थे और 10.15 बजे फोन से सूचना मिली कि उन्होंने आग लगाकर आत्महत्या कर ली है। पुलिस ने जांच किए बगैर घटना को आत्महत्या मान लिया। वह पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग करता रहा, जो एक सप्ताह बाद उपलब्ध कराई गई। हर्षित ने सवाल उठाया कि शौचालय अन्य कक्षों से लगा हुआ है, इसके बावजूद उनकी चीख किसी को सुनाई न पड़ना समझ से परे है।
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दिन बाद उसके बेटे हर्षित श्रीवास्तव ने सवाल उठाते हुए जांच कराने की मांग की है। हर्षित मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में कहा कि उसके पिता की सामान्य मौत सहज नहीं बल्कि हत्या की गई थी। उसके खुलासे के लिए उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए है।
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हर्षित ने समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली के जरिये मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। उसका कहना है कि घटना वाले दिन वह भोपाल स्थित अपने कॉलेज में था। सूचना मिलने पर वह अगले दिन घर पहुंचा। तब तक पिता के शव का अंतिम संस्कार हो चुका था। उसने कहा कि मेरे पिता पर ब्याज के भारी दबाव में होने की अफवाह जानबूझ कर फैलाई गई, ताकि उनकी मौत के कारणों पर किसी का ध्यान न जाए। बताया कि मेरे पिता सुबह 9.08 बजे घर से कार्यालय के लिए निकले थे और 10.15 बजे फोन से सूचना मिली कि उन्होंने आग लगाकर आत्महत्या कर ली है। पुलिस ने जांच किए बगैर घटना को आत्महत्या मान लिया। वह पुलिस से पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग करता रहा, जो एक सप्ताह बाद उपलब्ध कराई गई। हर्षित ने सवाल उठाया कि शौचालय अन्य कक्षों से लगा हुआ है, इसके बावजूद उनकी चीख किसी को सुनाई न पड़ना समझ से परे है।
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