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पीजे की हत्या के बाद बजरंगी का सबसे खास हो गया था तारिक

Sat, 02 Dec 2017 02:46 AM IST
Updated Sat, 02 Dec 2017 02:46 AM IST
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पीजे की हत्या के बाद बजरंगी का सबसे खास हो गया था तारिक
वाराणसी। लखनऊ के गोमती नगर में बदमाशों की गोली का शिकार हुआ विशेश्वरगंज निवासी ठेकेदार मो. तारिक छात्र जीवन से ही मनबढ़ किस्म का था। इसी दौरान वह गलत सोहबत में आया और वर्ष 2005 में जरायम जगत के कुख्यात मुन्ना बजरंगी से उसका संपर्क हुआ। सेंट्रल जेल में मई 2005 में अन्नू त्रिपाठी की हत्या के बाद तारिक की नजदीकियां मुन्ना बजरंगी से बढ़ती चली गईं। मुन्ना बजरंगी का हाथ होने के कारण वर्ष 2010 तक तारिक का नाम पूर्वांचल के रेलवे और पीडब्लूडी के बड़े ठेकेदारों में शुमार होने लगा। मार्च 2016 में मुन्ना बजरंगी के साले और उसके दाएं हाथ कहलाने वाले पुष्पजीत सिंह (पीजे) की हत्या हुई तो तारिक उसका सबसे खास हो गया था। चर्चाओं के अनुसार बजरंगी से तारिक की करीबी ही उसकी हत्या का कारण बनी।
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कोतवाली थाना अंतर्गत विश्वेश्वरगंज स्थित सब्जी मंडी के पीछे इन्ना माई मंदिर के पास मो. तारिक का पुश्तैनी घर है। यहां पिता मुनीर और उनका बड़ा बेटा मो. आसिफ रहते हैं। वहीं, दूसरे नंबर का तारिक और सबसे छोटा मो. तौसीफ लगभग बीते ढाई साल से घर कम आते थे। रिश्तेदारों के अनुसार दोनों लखनऊ या फिर जगतगंज स्थित एक अपार्टमेंट में ठहरते थे।
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तारिक के खिलाफ वर्ष 2010 में कैंट थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस के अनुसार उसने मऊ सदर विधायक मुख्तार अंसारी के इशारे पर नदेसर स्थित पीडब्ल्यूडी कार्यालय में एक एक्सईएन पर गोली चलाई थी। इस हमले में एक्सईएन बच गए थे। वर्ष 2013 में तारिक के खिलाफ कोतवाली थाने से गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। इसके बाद वर्ष 2013 में ही तारिक के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आरोपों और 7 सीएलए के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके साथ ही तारिक का नाम जिला कारागार के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी हत्याकांड और रंगदारी के साथ ही कुछेक अन्य मामलों में भी प्रकाश में आया था लेकिन पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के लिए ठेकेदारी के साथ ही तारिक जमीन संबंधी लंबी पंचायतें भी कराता था। उधर, तारिक की हत्या की जानकारी मिलते ही उसके पिता, बड़े भाई और रिश्तेदार लखनऊ रवाना हो गए। विशेश्वरगंज स्थित पुश्तैनी घर में सन्नाटा पसरा हुआ था और आसपास के लोग कुछ भी बोलने से कतराते दिखे।
2014 में तारिक की कॉल की गई थी इंटरसेप्ट
वर्ष 2014 में तारिक और सुल्तानपुर जेल में निरुद्ध रहे मुन्ना बजरंगी की मोबाइल पर हुई बातचीत को सर्विलांस के जरिये इंटरसेप्ट किया गया था। पुलिस को पता लगा था कि पूर्वांचल के बड़े कारोबारियों की मुन्ना बजरंगी से मुलाकात तय कराने का काम तारिक करता था। इसके साथ ही कौन सा कारोबारी कितनी रंगदारी देगा, यह भी तय करना तारिक का ही काम था।
कागज और प्लास्टिक की थैलियां बेचते हुए आया ठेकेदारी में
मो. तारिक वर्ष 2000 में हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज का छात्र था। इस दौरान उसका नाम अकसर मारपीट में आने और उस पर गोली चलने के कारण घर वालों ने उसका बाहर निकलना बंद कर दिया। इस पर तारिक ने अपने छोटे भाई के साथ कागज और प्लास्टिक की थैलियां थोक में बेचने का काम शुरू किया। इसके साथ ही वह ठेकेदारी के छोटे काम भी करने लगा। पेशे से शिक्षक बड़े भाई आसिफ उसे हमेशा समझाते लेकिन वह उनकी बातों पर ध्यान नहीं देता था। बताया जाता है कि मुन्ना बजरंगी से करीबी के बाद जब उसे अपने पुश्तैनी मुहल्ले में खतरा महसूस होने लगा तो वह घर आना-जाना कम कर दिया।

दोस्तों के पास से भी हटवा दी थी अपनी फोटो
मुहल्ले में सीधेसादे तरीके से रहने और कभी दिखावा न करने वाले तारिक ने खुद से संबंधित फोटो हर जगह से हटवा दी थी। शुक्रवार की रात उसकी हत्या का मामला सार्वजनिक हुआ और उसकी फोटो खोजी जाने लगी तो इसका खुलासा हुआ। उसके कुछ करीबी दोस्तों ने बताया कि तारिक ने सभी से अनुरोध कर अपनी फोटो हटवा दी थी। इसके साथ ही वह फोटो खिंचवाने से भी कतराता था।
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