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कागज पर तैनाती, हकीकत में नहीं जानते काम
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वाराणसी। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में मरीजों की सुविधाओं के लिए एमटीएस स्टाफ की तैनाती तो की गई है लेकिन अधिकांश ऐसे स्टाफ हैं, जिनकी योग्यता वो नहीं है, जहां उन्हें लगाया गया है। कुछ वार्ड में तैनात हैं तो कुछ की तैनाती ऑपरेशन थिएटर तक की गई है। विश्वविद्यालय के पास इनकी योग्यता संबंधी रिकार्ड भी नहीं है। इसका खुलासा एमटीएस तैनाती की शिकायत के बाद गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट से हुआ है।
मरीजों के सहयोग के लिए यहां एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) की तैनाती दो साल पहले की गई है। अलग-अलग वर्ग में 300 एमटीएस, 50 सेमी स्किल और 10 स्किल श्रेणी में रखे गए। तैनाती के बाद ही किसी ने इसकी शिकायत करते हुए जांच की मांग की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की और जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वह बेहद चौंकाने वाले हैं। सितंबर 2018 में पहली मीटिंग हुई, इसके बाद दिसंबर 2018 में टीम ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी। इसमें तैनात लोगों की योग्यता पर सवाल खड़ा करने से लेकर तैनाती संबंधी आदेश के कागजात न होने, उनसे ऑपरेशन थिएटर में काम लेने आदि का जिक्र किया।
अब सवाल यह है कि जब योग्यता ही नहीं है तो वह मरीजों की क्या सेवा करेंगे और ऑपरेशन में उनसे कैसे काम किया जा रहा है। ये वहीं रिपोर्ट है, जिसे रजवारी निवासी संजय सिंह ने पिछले महीने आरटीआई के माध्यम से मांगा था और जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सूचना अधिकार के तहत देने योग्य नहीं बताया था।
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मरीजों के सहयोग के लिए यहां एमटीएस (मल्टी टास्किंग स्टाफ) की तैनाती दो साल पहले की गई है। अलग-अलग वर्ग में 300 एमटीएस, 50 सेमी स्किल और 10 स्किल श्रेणी में रखे गए। तैनाती के बाद ही किसी ने इसकी शिकायत करते हुए जांच की मांग की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की और जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वह बेहद चौंकाने वाले हैं। सितंबर 2018 में पहली मीटिंग हुई, इसके बाद दिसंबर 2018 में टीम ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी। इसमें तैनात लोगों की योग्यता पर सवाल खड़ा करने से लेकर तैनाती संबंधी आदेश के कागजात न होने, उनसे ऑपरेशन थिएटर में काम लेने आदि का जिक्र किया।
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अब सवाल यह है कि जब योग्यता ही नहीं है तो वह मरीजों की क्या सेवा करेंगे और ऑपरेशन में उनसे कैसे काम किया जा रहा है। ये वहीं रिपोर्ट है, जिसे रजवारी निवासी संजय सिंह ने पिछले महीने आरटीआई के माध्यम से मांगा था और जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सूचना अधिकार के तहत देने योग्य नहीं बताया था।
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