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अब पीएम आवास योजना में भी घपला
Updated Wed, 04 Oct 2017 02:19 AM IST
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सेवापुरी। लोहिया और इंदिरा आवास की तरह अब प्रधानमंत्री आवास में भी घपलेबाजी का खेल शुरू हो गया है। कपसेठी थाना क्षेत्र के सरावां गांव में प्रधान और बड़ागांव ब्लाक के बाबुओं की सांठ-गांठ से तीन गरीबों के आवासों का अनुदान अमीरों ने हड़प लिया है। कमीशन के चक्कर में जिन्हें आवास स्वीकृत हुए हैं, उनकी बजाय वल्दियत बदल कर अपात्रों के खाते में पहली किस्त की धनराशि भेज दी गई है।
सरावां गांव निवासी पारस नाथ पुत्र स्व. राजाराम को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ है लेकिन धनराशि दूसरे के खाते में भेज दी गई। हुआ यूं कि गांव के प्रधान और ब्लाक के बाबू ने मिलकर इनकी जगह पारस नाथ पुत्र स्व. क्षत्रपाल सिंह का नाम और बैंक खाता नंबर कंप्यूटर में फीड करा दिया है। इसके चलते आवास के अनुदान की पहली किस्त इनके खाते में भेज दी गई है। इतना ही नहीं, पारस नाथ पुत्र स्व. क्षत्रपाल सिंह ने अनुदान पाने के बाद आवास का निर्माण भी शुरू करा दिया है। इसी तरीके से इस गांव में तीन आवासों में हेराफेरी की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस खेल के लिए प्रति आवास 20 हजार रुपये के हिसाब से रिश्वत ली गई है। इस बारे में पूछने पर ग्राम प्रधान मनोज सरोज ने कहा कि यह गड़बड़ी बड़ागांव ब्लॉक के बाबू ने की है। वही ब्लाक के एनआरपी बाबू कैलाश राम ने बताया कि ब्लॉक के कंप्यूटर में पासबुक की फीडिंग ग्राम प्रधान करवाते हैं। इसलिए इस मामले में प्रधान ही दोषी हैं।
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सरावां गांव निवासी पारस नाथ पुत्र स्व. राजाराम को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ है लेकिन धनराशि दूसरे के खाते में भेज दी गई। हुआ यूं कि गांव के प्रधान और ब्लाक के बाबू ने मिलकर इनकी जगह पारस नाथ पुत्र स्व. क्षत्रपाल सिंह का नाम और बैंक खाता नंबर कंप्यूटर में फीड करा दिया है। इसके चलते आवास के अनुदान की पहली किस्त इनके खाते में भेज दी गई है। इतना ही नहीं, पारस नाथ पुत्र स्व. क्षत्रपाल सिंह ने अनुदान पाने के बाद आवास का निर्माण भी शुरू करा दिया है। इसी तरीके से इस गांव में तीन आवासों में हेराफेरी की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस खेल के लिए प्रति आवास 20 हजार रुपये के हिसाब से रिश्वत ली गई है। इस बारे में पूछने पर ग्राम प्रधान मनोज सरोज ने कहा कि यह गड़बड़ी बड़ागांव ब्लॉक के बाबू ने की है। वही ब्लाक के एनआरपी बाबू कैलाश राम ने बताया कि ब्लॉक के कंप्यूटर में पासबुक की फीडिंग ग्राम प्रधान करवाते हैं। इसलिए इस मामले में प्रधान ही दोषी हैं।
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