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Varanasi News: 10 दिवसीय दशलक्षण महापर्व शुरू, क्षमा को बताया आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था
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वाराणसी। भेलूपुर स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन तीर्थ में बुधवार को दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ हुआ। यह पर्व 27 सितंबर तक चलेगा। इस अवसर पर मुनि धर्म सागर और मुनि भाव सागर के सान्निध्य में मांगलिक क्रियाएं, अभिषेक और शांतिधारा पूजन विधान किए गए।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि भाव सागर ने कहा कि दशलक्षण पर्व पूरे विश्व में मनाए जा रहे हैं। उन्होंने नए लोगों को धार्मिक क्रियाएं अच्छे ढंग से सिखाने पर जोर दिया। मुनि भाव सागर ने बताया कि क्रोध से मस्तिष्क में तनाव-हार्मोन बढ़ते हैं। इससे व्यक्ति बिना सोचे प्रतिक्रिया देता है। क्षमा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था है। 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है। क्षमा धारण करने से 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है।
मुनि धर्म सागर ने अपने संबोधन में कहा कि मन की शुद्धि क्षमावाणी से होती है। उन्होंने कहा कि क्षमा 10 लक्षण धर्म की आधारशिला है। उन्होंने क्षमा को सभी व्रत, संयम और आराधना का आधार बताया। इस अवसर पर समाज अध्यक्ष आर सी जैन, प्रधानमंत्री प्रदीप चंद जैन और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश जैन समेत कई लोग मौजूद रहे।
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धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि भाव सागर ने कहा कि दशलक्षण पर्व पूरे विश्व में मनाए जा रहे हैं। उन्होंने नए लोगों को धार्मिक क्रियाएं अच्छे ढंग से सिखाने पर जोर दिया। मुनि भाव सागर ने बताया कि क्रोध से मस्तिष्क में तनाव-हार्मोन बढ़ते हैं। इससे व्यक्ति बिना सोचे प्रतिक्रिया देता है। क्षमा कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आत्म-नियंत्रण की उच्चतम अवस्था है। 10 मिनट का क्रोध 600 मिनट की खुशियां बर्बाद कर देता है। क्षमा धारण करने से 66 करोड़ उपवास का फल मिलता है।
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मुनि धर्म सागर ने अपने संबोधन में कहा कि मन की शुद्धि क्षमावाणी से होती है। उन्होंने कहा कि क्षमा 10 लक्षण धर्म की आधारशिला है। उन्होंने क्षमा को सभी व्रत, संयम और आराधना का आधार बताया। इस अवसर पर समाज अध्यक्ष आर सी जैन, प्रधानमंत्री प्रदीप चंद जैन और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश जैन समेत कई लोग मौजूद रहे।
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