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Unnao News: मोबाइल के लिए गोली मारकर कर दी थी युवक की हत्या...अब दो दोस्तों को उम्रकैद
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उन्नाव। अचलगंज थानाक्षेत्र में 13 साल पहले मोबाइल फोन के विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या की घटना में न्यायालय ने गांव के ही नामजद दो दोस्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसी मुकदमे में नामजद एक दोषी के पिता व चाचा की मौत हो चुकी है , जबकि छोटे भाई का मुकदमा किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
अचलगंज निवासी मिथलेश कुमारी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 27 फरवरी 2011 को उसका बेटा कुलदीप कुमार अपने चाचा राजेंद्र की दुकान पर अखबार पढ़ रहा था। तभी अचलगंज थाना के लोहचा गांव राजकिशोर आए और करीब दो साल पहले (2009) में हुए मोबाइल फोन के लेन-देन को लेकर विवाद और गालीगलौज करने लगे. दोनों में मारपीट हुई।
अगले दिन 28 फरवरी को सुबह राजकिशोर, भाई कृष्ण चंद्र, बेटे प्रीतू उर्फ ध्यानेंद्र, एक नाबालिग बेटे और कानपुर देहात के रूरा थाना क्षेत्र के बनवारीपुरवा निवासी साथी बबलू के साथ पहुंचा। आरोपी अवैध असलहों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे। गोली लगने से कुलदीप घायल हो गया और हमलावर फायरिंग करते हुए भाग गए। कुलदीप को गंभीर हालत में कानपुर हैलट में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने दर्ज रिपोर्ट दर्ज कर चार आरोपियों को चार मार्च 2011 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जबकि एक आरोपी के नाबालिग होने से उसे बाल सुधार गृह भेजा था।
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मुकदमे के विवेचक तत्कालीन एसएचओ श्रीधर पाठक ने आठ जून 2011 को सभी के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान नामजद आरोपी राजकिशोर और उसके कृष्णचंद्र की मौत हो गई थी। शनिवार को अपर जिला जज प्रथम की न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। न्यायाधीश मो. असलम सिद्दीकी ने दोष साबित होने पर प्रीतू उर्फ ध्यानेंद्र और बबलू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, घटना के समय नाबालिग रहे एक आरोपी का मुकदमा किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
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अचलगंज निवासी मिथलेश कुमारी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि 27 फरवरी 2011 को उसका बेटा कुलदीप कुमार अपने चाचा राजेंद्र की दुकान पर अखबार पढ़ रहा था। तभी अचलगंज थाना के लोहचा गांव राजकिशोर आए और करीब दो साल पहले (2009) में हुए मोबाइल फोन के लेन-देन को लेकर विवाद और गालीगलौज करने लगे. दोनों में मारपीट हुई।
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अगले दिन 28 फरवरी को सुबह राजकिशोर, भाई कृष्ण चंद्र, बेटे प्रीतू उर्फ ध्यानेंद्र, एक नाबालिग बेटे और कानपुर देहात के रूरा थाना क्षेत्र के बनवारीपुरवा निवासी साथी बबलू के साथ पहुंचा। आरोपी अवैध असलहों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे। गोली लगने से कुलदीप घायल हो गया और हमलावर फायरिंग करते हुए भाग गए। कुलदीप को गंभीर हालत में कानपुर हैलट में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने दर्ज रिपोर्ट दर्ज कर चार आरोपियों को चार मार्च 2011 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जबकि एक आरोपी के नाबालिग होने से उसे बाल सुधार गृह भेजा था।
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मुकदमे के विवेचक तत्कालीन एसएचओ श्रीधर पाठक ने आठ जून 2011 को सभी के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान नामजद आरोपी राजकिशोर और उसके कृष्णचंद्र की मौत हो गई थी। शनिवार को अपर जिला जज प्रथम की न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। न्यायाधीश मो. असलम सिद्दीकी ने दोष साबित होने पर प्रीतू उर्फ ध्यानेंद्र और बबलू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, घटना के समय नाबालिग रहे एक आरोपी का मुकदमा किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।