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Unnao News: पुरवा सीएचसी में आयुष्मान योजना में 18 लाख रुपये के फर्जीवाड़े की जांच शुरू
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पुरवा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पुरवा में आयुष्मान योजना की क्लेम धनराशि में 18 लाख रुपये के फर्जीवाड़े की जांच शुरू हो गई है। एसीएमओ और डीडीएम की टीम ने शनिवार को सीएचसी पहुंचकर मामले की पड़ताल की। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर में क्रय सामान का ब्योरा दर्ज नहीं मिला।
तत्कालीन अधीक्षक डॉ.दिनेश कुमार को जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आए और न ही टीम के सदस्यों का फोन उठाया। जांच टीम के सदस्यों ने बताया कि कुछ अन्य जरूरी अभिलेख भी गायब मिले हैं या उनमें हेराफेरी की गई है। नगर के शुभम त्रिवेदी ने 14 जनवरी को मुख्यमंत्री सहित आईजीआरएस पर शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में तत्कालीन अधीक्षक दिनेश कुमार ने फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने फर्जी तरीके से अपने चहेतों के नाम पर 18 लाख रुपये चेकों के माध्यम से सात फर्मों में डालकर निकाल लिए।
इसके अलावा, कर्मचारियों को मिलने वाली 25 फीसदी धनराशि में भी आपसी मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। सीएमओ ने एसीएमओ जयराम सिंह, नरेंद्र सिंह और डीडीएम सुधांशु शेखर की टीम बनाई थी। जांच में देरी होने पर शिकायतकर्ता ने एक अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की। इसके बाद छह अप्रैल को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने सीएमओ को तत्काल जांच के निर्देश दिए।
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जांच में मिली अनियमितताएं
एसीएमओ जयराम सिंह और डीडीएम सुधांशु शेखर ने शनिवार को जांच की। उन्होंने फार्मासिस्ट के समक्ष स्टॉक रजिस्टर की जांच की। इसमें भुगतान का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। जयराम सिंह ने बताया कि तत्कालीन प्रभारी को बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आए और 25 फीसदी का कोई देयक भी नहीं मिला।
शुभम त्रिवेदी की शिकायत के बाद सीएमओ ने जांच टीम गठित की थी। जांच में देरी होने पर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय का रुख किया। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के निर्देश पर यह जांच शुरू हुई है। एसीएमओ ने कहा कि जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी जाएगी।
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तत्कालीन अधीक्षक डॉ.दिनेश कुमार को जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आए और न ही टीम के सदस्यों का फोन उठाया। जांच टीम के सदस्यों ने बताया कि कुछ अन्य जरूरी अभिलेख भी गायब मिले हैं या उनमें हेराफेरी की गई है। नगर के शुभम त्रिवेदी ने 14 जनवरी को मुख्यमंत्री सहित आईजीआरएस पर शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में तत्कालीन अधीक्षक दिनेश कुमार ने फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने फर्जी तरीके से अपने चहेतों के नाम पर 18 लाख रुपये चेकों के माध्यम से सात फर्मों में डालकर निकाल लिए।
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इसके अलावा, कर्मचारियों को मिलने वाली 25 फीसदी धनराशि में भी आपसी मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। सीएमओ ने एसीएमओ जयराम सिंह, नरेंद्र सिंह और डीडीएम सुधांशु शेखर की टीम बनाई थी। जांच में देरी होने पर शिकायतकर्ता ने एक अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत की। इसके बाद छह अप्रैल को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने सीएमओ को तत्काल जांच के निर्देश दिए।
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जांच में मिली अनियमितताएं
एसीएमओ जयराम सिंह और डीडीएम सुधांशु शेखर ने शनिवार को जांच की। उन्होंने फार्मासिस्ट के समक्ष स्टॉक रजिस्टर की जांच की। इसमें भुगतान का कोई लेखा-जोखा नहीं मिला। जयराम सिंह ने बताया कि तत्कालीन प्रभारी को बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आए और 25 फीसदी का कोई देयक भी नहीं मिला।
शुभम त्रिवेदी की शिकायत के बाद सीएमओ ने जांच टीम गठित की थी। जांच में देरी होने पर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय का रुख किया। महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के निर्देश पर यह जांच शुरू हुई है। एसीएमओ ने कहा कि जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी जाएगी।