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गोमाता को दें राष्ट्रमाता का दर्जा : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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फोटो-5-बांगरमऊ बोद्धेश्वर धाम में लोगों को संबोधित करते शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद। संवाद
बांगरमऊ (उन्नाव)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धर्म युद्ध शंखनाद यात्रा लेकर बाबा बौद्धेश्वर धाम पहुंचे। उन्होंने कहा कि योगी और संन्यासी अहिंसा का व्रत लेते हैं और उन्हें शासन-सत्ता से कोई सरोकार नहीं होता। शंकराचार्य ने गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग उठाई।
उन्होंने बताया कि आजादी से पहले नेताओं ने गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करने का वादा किया था। 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें पशु ही कहा जा रहा है जबकि सनातनी यह दर्जा चाहते हैं। गेरुआ वस्त्रधारी व्यक्ति के गद्दी पर बैठने से सनातनियों में आशा जगी थी। हालांकि गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना तो दूर उनके मांस की बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है।
शंकराचार्य ने सरकार को गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए 40 दिन का समय दिया था। यह समय सीमा मंगलवार को पूरी हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सनातनियों की बात नहीं मानी तो बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि गेरुआधारी नेता के संरक्षण में पुलिस संतों का अपमान कर रही है।
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गाय की रक्षा का किया आह्वान
सफीपुर प्रतिनिधि के अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद उन्नाव-हरदोई मार्ग से गुजरे। उन्होंने कस्बे में रुककर लोगों को संबोधित किया। शंकराचार्य ने कहा कि केवल भाई-बहन कहने से काम नहीं चलेगा। वही सच्चा भाई है जो गोमाता की रक्षा करेगा। मां शंकरी देवी मंदिर के पास एकत्रित लोगों ने शंकराचार्य का स्वागत किया। इस अवसर पर मत्स्येंद्र गौड़, सतगुरु प्रसाद मिश्रा, आशीष राठौर सहित कई लोग उपस्थित रहे।
शंकराचार्य ने गाय माता की रक्षा के इस अभियान में सभी के योगदान की जरूरत बताई। उन्होंने मौजूद लोगों से भविष्य में गाय की रक्षा करने वाले को ही चुनने का आह्वान किया। कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बात केवल इतनी थी कि गाय की रक्षा का वचन लिया है तो उसका व्यवसाय बंद करो। बांगरमऊ में चौधरी संजीव सिंह, पप्पू त्रिवेदी, विमल चंद्र शुक्ला, सपा के मुन्ना अल्वी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि आजादी से पहले नेताओं ने गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करने का वादा किया था। 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें पशु ही कहा जा रहा है जबकि सनातनी यह दर्जा चाहते हैं। गेरुआ वस्त्रधारी व्यक्ति के गद्दी पर बैठने से सनातनियों में आशा जगी थी। हालांकि गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना तो दूर उनके मांस की बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है।
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शंकराचार्य ने सरकार को गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा देने के लिए 40 दिन का समय दिया था। यह समय सीमा मंगलवार को पूरी हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सनातनियों की बात नहीं मानी तो बड़े पैमाने पर आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि गेरुआधारी नेता के संरक्षण में पुलिस संतों का अपमान कर रही है।
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गाय की रक्षा का किया आह्वान
सफीपुर प्रतिनिधि के अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद उन्नाव-हरदोई मार्ग से गुजरे। उन्होंने कस्बे में रुककर लोगों को संबोधित किया। शंकराचार्य ने कहा कि केवल भाई-बहन कहने से काम नहीं चलेगा। वही सच्चा भाई है जो गोमाता की रक्षा करेगा। मां शंकरी देवी मंदिर के पास एकत्रित लोगों ने शंकराचार्य का स्वागत किया। इस अवसर पर मत्स्येंद्र गौड़, सतगुरु प्रसाद मिश्रा, आशीष राठौर सहित कई लोग उपस्थित रहे।
शंकराचार्य ने गाय माता की रक्षा के इस अभियान में सभी के योगदान की जरूरत बताई। उन्होंने मौजूद लोगों से भविष्य में गाय की रक्षा करने वाले को ही चुनने का आह्वान किया। कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बात केवल इतनी थी कि गाय की रक्षा का वचन लिया है तो उसका व्यवसाय बंद करो। बांगरमऊ में चौधरी संजीव सिंह, पप्पू त्रिवेदी, विमल चंद्र शुक्ला, सपा के मुन्ना अल्वी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।