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Unnao News: पर्चा बनवाने से दवा लेने में लगे डेढ़ घंटे
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फोटो-26- ओपीडी में बच्चे की जांच करते बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव। संवाद
उन्नाव। जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को 1588 मरीजों ने पर्चा बनवाकर इलाज कराया। इनमें 740 मरीज बुखार, उल्टी और दस्त जैसे संक्रामक रोगों से पीड़ित थे। फिजीशियन कक्ष में मरीजों की कतार सबसे लंबी रही। पर्चा बनवाने और डॉक्टर को दिखाने में डेढ़ घंटे तक का समय लगा।
ओपीडी के बाहर लंबी कतारें देखी गईं, जिनमें ज्यादातर वायरल संक्रमण से पीड़ित मरीज थे। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि 88 बच्चे ओपीडी पहुंचे, जिनमें से अधिकांश बुखार और दस्त से ग्रसित थे। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है और बीमारियां बढ़ती हैं। इमरजेंसी वार्ड में भी मरीजों की संख्या अधिक है, जिससे कभी-कभी एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है। पच्चीसा गांव निवासी रामदीन को बेड न मिलने के कारण बेंच पर उपचार लेना पड़ा। सलेमपुर और लोहचा से आईं दो बच्चियां होलिका और आस्था दस्त से पीड़ित होने के कारण एक ही बेड साझा कर रही थीं।
डॉक्टर ने दी गर्मी से बचने की सलाह
फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि गर्मी में बचाव ही पहला इलाज है। शरीर पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त पानी पीयें, नींबू पानी, ओआरएस, नारियल पानी, छाछ और आम पना का सेवन लाभकारी होगा। हल्का आहार लें और खीरा, ककड़ी, तरबूज जैसे पानी से भरपूर फल खाएं। दोपहर में बाहर निकलते समय सिर ढकें। एसी या कूलर के कमरे से तुरंत धूप में न निकले और ना ही धूप से आकर तुरंत ठंडे कमरे में प्रवेश करें। लू लगने पर तुरंत शरीर को ठंडा रखें और ठंडे पानी की पट्टियां लगाएं।
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ओपीडी के बाहर लंबी कतारें देखी गईं, जिनमें ज्यादातर वायरल संक्रमण से पीड़ित मरीज थे। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि 88 बच्चे ओपीडी पहुंचे, जिनमें से अधिकांश बुखार और दस्त से ग्रसित थे। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है, जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है और बीमारियां बढ़ती हैं। इमरजेंसी वार्ड में भी मरीजों की संख्या अधिक है, जिससे कभी-कभी एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा है। पच्चीसा गांव निवासी रामदीन को बेड न मिलने के कारण बेंच पर उपचार लेना पड़ा। सलेमपुर और लोहचा से आईं दो बच्चियां होलिका और आस्था दस्त से पीड़ित होने के कारण एक ही बेड साझा कर रही थीं।
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डॉक्टर ने दी गर्मी से बचने की सलाह
फिजीशियन डॉ. कौशलेंद्र प्रकाश ने बताया कि गर्मी में बचाव ही पहला इलाज है। शरीर पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त पानी पीयें, नींबू पानी, ओआरएस, नारियल पानी, छाछ और आम पना का सेवन लाभकारी होगा। हल्का आहार लें और खीरा, ककड़ी, तरबूज जैसे पानी से भरपूर फल खाएं। दोपहर में बाहर निकलते समय सिर ढकें। एसी या कूलर के कमरे से तुरंत धूप में न निकले और ना ही धूप से आकर तुरंत ठंडे कमरे में प्रवेश करें। लू लगने पर तुरंत शरीर को ठंडा रखें और ठंडे पानी की पट्टियां लगाएं।

फोटो-26- ओपीडी में बच्चे की जांच करते बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव। संवाद
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