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Unnao News: एटीएस में इंटरनेट की सुस्त चाल, जांच में अटके वाहन
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फोटो-23-ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन में होती वाहनों की फिटनेस की जांच। संवाद
उन्नाव/नवाबगंज। ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) के चालू होने के साथ ही वाहनों की फिटनेस जांच में सर्वर और इंटरनेट की समस्या बाधा बन गई है। वाहन मालिकों को जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित केंद्र के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। भारी वाहनों के चालकों को रात भर इंतजार करना पड़ रहा है। मंगलवार को इंटरनेट सेवा बाधित रहने से फिटनेस जांच नहीं हो सकी। इससे बुधवार को वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। एक जनवरी से लागू नई व्यवस्था वाहन चालकों के लिए परेशानी बन रही है।
परिवहन विभाग के नए आदेशों के अनुसार वाहनों की फिटनेस जांच अब एटीएस से ही करानी होगी। जिले के वाहन चालकों के लिए यह व्यवस्था फिलहाल एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। जिला मुख्यालय और एआरटीओ कार्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर लखनऊ जिले की सीमा पर बनी के सई नदी पुल के पास एटीएस बनाया गया है। इस नवनिर्मित सेंटर में हर दिन 50 से 60 वाहन फिटनेस जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ट्रक, टेंपो, कार और अन्य प्रकार के वाहन शामिल हैं। प्रत्येक वाहन श्रेणी के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित की गई हैं।
हालांकि एटीएस में सर्वर और इंटरनेट की समस्याओं के कारण वाहन चालकों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। मंगलवार को इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप रहने से फिटनेस जांच का काम बाधित हुआ। बुधवार को बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने से स्थिति और बिगड़ गई। कई ट्रक चालकों को रात भर स्टेशन पर रुकना पड़ा और बुधवार दोपहर बाद ही उनका नंबर आ पाया। इस देरी के कारण वाहन मालिकों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
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क्रेन, बुलडोजर की जांच एआरटीओ कार्यालय में ही
जिले में कुल 6,77,508 वाहन हैं जिनमें 44,526 व्यावसायिक और 6,32,983 निजी वाहन शामिल हैं। पावर ट्रिलर, एग्रीकल्चर ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, फोर्क लिफ्ट, क्रेन, रोड रोलर, बुलडोजर और डंपर सहित 10 प्रकार के वाहनों की फिटनेस जांच एआरटीओ कार्यालय में ही होगी।
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वर्जन...
स्टेशन अभी शुरुआती चरण में है और कुछ दिक्कतें आ रही हैं। इंटरनेट की समस्या सबसे बड़ी वजह है। इस कारण मंगलवार को फिटनेस जांच नहीं हो सकी। बुधवार को अधिक वाहन आने से समस्या बढ़ गई। -रूपेंद्र सिंह, एटीएस मैनेजर
एक जनवरी से यह नई व्यवस्था लागू हुई है। शुरुआती चरण है इसलिए कुछ परेशानी हो रही है। आने वाले दिनों में सब सही हो जाएगा। एटीएस संचालक को व्यवस्थाएं जल्द से जल्द सुधारने के निर्देश दिए हैं। -श्वेता मिश्रा, एआरटीओ उन्नाव
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वाहन फिटनेस के शुल्क में इजाफा
वाहन फिटनेस जांच के शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है जो वाहन की उम्र और श्रेणी पर निर्भर करती है। 15 साल से कम पुराने वाहनों के लिए शुल्क कम है लेकिन जैसे-जैसे वाहन की उम्र बढ़ती है फिटनेस शुल्क भी बढ़ता जाता है। 20 साल से अधिक पुराने भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस शुल्क 25,000 रुपये तक पहुंच गया है जबकि पुरानी कारों के लिए यह 15,000 रुपये तक हो सकता है।
विभिन्न श्रेणियों के लिए फिटनेस शुल्क का विवरण
15 साल से कम पुराने वाहन:
मोटरसाइकिल: 400 रुपये
कार व अन्य हल्के वाहन: 600 रुपये
मध्यम व भारी व्यावसायिक वाहन (ट्रक व बस): 1,000 रुपये
15 से 20 साल पुराने वाहन:
तीन पहिया वाहन: 3,000 रुपये
कार व अन्य हल्के मोटर वाहन: 5,000 रुपये
मध्यम माल व यात्री वाहन: 10,000 रुपये
भारी माल व यात्री वाहन (ट्रक व बस): 12,500 रुपये
20 साल से अधिक पुराने वाहन:
तीन पहिया वाहन: 7,000 रुपये
कार व अन्य हल्के मोटर वाहन: 15,000 रुपये
मध्यम व्यावसायिक वाहन: 20,000 रुपये
ट्रक व बस व्यावसायिक वाहन: 25,000 रुपये तक
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ऑटोमेटिक टेस्टिंग के प्रमुख फायदे
मशीन आधारित ऑनलाइन जांच से गलतियां व पक्षपात खत्म होगा
डिजिटल सेंसर और स्वचालित उपकरणों से फिटनेस की पूरी जांच होगी
अनफिट वाहनों को पूरी तरह फिट किए बिना सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा
वाहन पूरी तरह फिट होने से दुर्घटना का खतरा कम होगा
जांच प्रक्रिया स्वचालित होने से समय की बचत होगी
धुआं और इंजन की क्षमता की सही होने से प्रदूषण कम होगा
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परिवहन विभाग के नए आदेशों के अनुसार वाहनों की फिटनेस जांच अब एटीएस से ही करानी होगी। जिले के वाहन चालकों के लिए यह व्यवस्था फिलहाल एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। जिला मुख्यालय और एआरटीओ कार्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर लखनऊ जिले की सीमा पर बनी के सई नदी पुल के पास एटीएस बनाया गया है। इस नवनिर्मित सेंटर में हर दिन 50 से 60 वाहन फिटनेस जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ट्रक, टेंपो, कार और अन्य प्रकार के वाहन शामिल हैं। प्रत्येक वाहन श्रेणी के लिए अलग-अलग लेन निर्धारित की गई हैं।
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हालांकि एटीएस में सर्वर और इंटरनेट की समस्याओं के कारण वाहन चालकों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। मंगलवार को इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप रहने से फिटनेस जांच का काम बाधित हुआ। बुधवार को बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने से स्थिति और बिगड़ गई। कई ट्रक चालकों को रात भर स्टेशन पर रुकना पड़ा और बुधवार दोपहर बाद ही उनका नंबर आ पाया। इस देरी के कारण वाहन मालिकों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
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क्रेन, बुलडोजर की जांच एआरटीओ कार्यालय में ही
जिले में कुल 6,77,508 वाहन हैं जिनमें 44,526 व्यावसायिक और 6,32,983 निजी वाहन शामिल हैं। पावर ट्रिलर, एग्रीकल्चर ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, फोर्क लिफ्ट, क्रेन, रोड रोलर, बुलडोजर और डंपर सहित 10 प्रकार के वाहनों की फिटनेस जांच एआरटीओ कार्यालय में ही होगी।
वर्जन...
स्टेशन अभी शुरुआती चरण में है और कुछ दिक्कतें आ रही हैं। इंटरनेट की समस्या सबसे बड़ी वजह है। इस कारण मंगलवार को फिटनेस जांच नहीं हो सकी। बुधवार को अधिक वाहन आने से समस्या बढ़ गई। -रूपेंद्र सिंह, एटीएस मैनेजर
एक जनवरी से यह नई व्यवस्था लागू हुई है। शुरुआती चरण है इसलिए कुछ परेशानी हो रही है। आने वाले दिनों में सब सही हो जाएगा। एटीएस संचालक को व्यवस्थाएं जल्द से जल्द सुधारने के निर्देश दिए हैं। -श्वेता मिश्रा, एआरटीओ उन्नाव
वाहन फिटनेस के शुल्क में इजाफा
वाहन फिटनेस जांच के शुल्क में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है जो वाहन की उम्र और श्रेणी पर निर्भर करती है। 15 साल से कम पुराने वाहनों के लिए शुल्क कम है लेकिन जैसे-जैसे वाहन की उम्र बढ़ती है फिटनेस शुल्क भी बढ़ता जाता है। 20 साल से अधिक पुराने भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस शुल्क 25,000 रुपये तक पहुंच गया है जबकि पुरानी कारों के लिए यह 15,000 रुपये तक हो सकता है।
विभिन्न श्रेणियों के लिए फिटनेस शुल्क का विवरण
15 साल से कम पुराने वाहन:
मोटरसाइकिल: 400 रुपये
कार व अन्य हल्के वाहन: 600 रुपये
मध्यम व भारी व्यावसायिक वाहन (ट्रक व बस): 1,000 रुपये
15 से 20 साल पुराने वाहन:
तीन पहिया वाहन: 3,000 रुपये
कार व अन्य हल्के मोटर वाहन: 5,000 रुपये
मध्यम माल व यात्री वाहन: 10,000 रुपये
भारी माल व यात्री वाहन (ट्रक व बस): 12,500 रुपये
20 साल से अधिक पुराने वाहन:
तीन पहिया वाहन: 7,000 रुपये
कार व अन्य हल्के मोटर वाहन: 15,000 रुपये
मध्यम व्यावसायिक वाहन: 20,000 रुपये
ट्रक व बस व्यावसायिक वाहन: 25,000 रुपये तक
ऑटोमेटिक टेस्टिंग के प्रमुख फायदे
मशीन आधारित ऑनलाइन जांच से गलतियां व पक्षपात खत्म होगा
डिजिटल सेंसर और स्वचालित उपकरणों से फिटनेस की पूरी जांच होगी
अनफिट वाहनों को पूरी तरह फिट किए बिना सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा
वाहन पूरी तरह फिट होने से दुर्घटना का खतरा कम होगा
जांच प्रक्रिया स्वचालित होने से समय की बचत होगी
धुआं और इंजन की क्षमता की सही होने से प्रदूषण कम होगा

फोटो-23-ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन में होती वाहनों की फिटनेस की जांच। संवाद