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Unnao News: अमेरिका से व्यापार पर तीन महीने से असमंजस में चमड़ा उद्योग
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फोटो-3-बंथर स्थित काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट का कार्यालय। संवाद
उन्नाव। अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ से चमड़ा उद्योग तीन महीने से मुश्किलें झेल रहा है। चर्म इकाइयों का करीब 500 करोड़ रुपये का माल फंसा है। इसके अलावा तीन महीने में औसतन ढाई हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित है।
उन्नाव की चर्म इकाइयों से हर साल औसतन दो हजार करोड़ रुपये के चमड़ा उत्पाद अमेरिका को निर्यात होते थे। 27 अगस्त 2025 को अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीदने की खुन्नस में 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ सहित 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया था। इससे चर्म निर्यात को झटका लगा था। तीन महीने में करीब ढाई हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। जिले के औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी और बंथर में टेनरियां और चर्म उत्पादक इकाइयों का 500 करोड़ का तैयार माल अभी तक फंसा है। पिछले महीने अमेरिका की ओर से टैरिफ में 15 से 16 फीसदी कमी की चर्चाओं ने उद्यमियों को उम्मीद दिखी थी लेकिन वह धूमिल हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष ताज आलम ने बताया कि जैकेट, सैडलरी, जूता, पर्स, बेल्ट व अन्य उपयोगी उत्पाद अमेरिका को निर्यात होते थे। फिलहाल अमेरिका में व्यापार संभव नहीं दिख रहा है। रूस, यूके, दुबई, जापान व अन्य यूरोपीय देशों में व्यापार बढ़ाया जा रहा है। मुक्त व्यापार होने से संभावनाएं भी दिख रही हैं।
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अमेरिका के टैरिफ से भारतीय उत्पाद वहां 50 फीसदी महंगे होने से मांग घटी है। कंपनियों ने पूर्व आर्डर भी तीन महीने से रोक रखे हैं। जो अमेरिकी कंपनियां भारत से माल खरीदती थीं, वह अब सस्ता माल उन देशों से खरीद रही हैं, जिन पर अमेरिका का टैरिफ कम है। दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रहने से अभी भी उम्मीद बंधी है। -असद कमाल इराकी, अध्यक्ष क्षेत्रीय चमड़ा निर्यात परिषद
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उन्नाव की चर्म इकाइयों से हर साल औसतन दो हजार करोड़ रुपये के चमड़ा उत्पाद अमेरिका को निर्यात होते थे। 27 अगस्त 2025 को अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीदने की खुन्नस में 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ सहित 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया था। इससे चर्म निर्यात को झटका लगा था। तीन महीने में करीब ढाई हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। जिले के औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी और बंथर में टेनरियां और चर्म उत्पादक इकाइयों का 500 करोड़ का तैयार माल अभी तक फंसा है। पिछले महीने अमेरिका की ओर से टैरिफ में 15 से 16 फीसदी कमी की चर्चाओं ने उद्यमियों को उम्मीद दिखी थी लेकिन वह धूमिल हो रही हैं।
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उत्तर प्रदेश चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष ताज आलम ने बताया कि जैकेट, सैडलरी, जूता, पर्स, बेल्ट व अन्य उपयोगी उत्पाद अमेरिका को निर्यात होते थे। फिलहाल अमेरिका में व्यापार संभव नहीं दिख रहा है। रूस, यूके, दुबई, जापान व अन्य यूरोपीय देशों में व्यापार बढ़ाया जा रहा है। मुक्त व्यापार होने से संभावनाएं भी दिख रही हैं।
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अमेरिका के टैरिफ से भारतीय उत्पाद वहां 50 फीसदी महंगे होने से मांग घटी है। कंपनियों ने पूर्व आर्डर भी तीन महीने से रोक रखे हैं। जो अमेरिकी कंपनियां भारत से माल खरीदती थीं, वह अब सस्ता माल उन देशों से खरीद रही हैं, जिन पर अमेरिका का टैरिफ कम है। दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रहने से अभी भी उम्मीद बंधी है। -असद कमाल इराकी, अध्यक्ष क्षेत्रीय चमड़ा निर्यात परिषद