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Unnao News: 37 दिन बाद भी नहीं आई आईआईटी की जांच रिपोर्ट
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मरम्मत के दौरान लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर किया गया डायवर्जन। संवाद
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की उन्नाव से लखनऊ तक 43 किलोमीटर लंबी सड़क की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट 37 दिन बाद भी नहीं आई। इस कारण अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि सड़क धंसने का मुख्य कारण क्या है। इसमें क्या-क्या सुधार कराया जाए।
4200 करोड़ रुपये की लागत से बने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 13 जुलाई को हुआ था। लोकार्पण के 12 दिन बाद 25 जुलाई को ही यह धंस गया। एनएचएआई ने पांच अगस्त को पीडी सहित कई अधिकारियों को हटा दिया था। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर की टीम ने गुणवत्ता की जांच शुरू की। टीम 25 दिनों तक जांच कर 30 अगस्त को लौट गई। 12 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का दावा किया गया लेकिन 37 दिन बाद भी रिपोर्ट न आने से कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि बड़ी खामियों के कारण इसे दबाने के प्रयास हो रहे हैं। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के बिना सुधार नहीं हो पा रहे। छह अगस्त से टोल वसूली पर लगी रोक 62 दिन बाद भी जारी है।
इन पर हो चुकी है कार्रवाई
एक्सप्रेसवे में खामियों के कारण एनएचएआई और निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक की काफी किरकिरी हुई। एनएचएआई ने पांच अगस्त को लखनऊ जोन के तत्कालीन पीडी नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया था। पूर्व पीडी सौरभ चौरसिया के खिलाफ भी जांच शुरू कराई गई थी। निर्माण एजेंसी पीएनसी के तीन इंजीनियरों को एनएचएआई के कामों के लिए प्रतिबंधित भी किया गया था। इसके अतिरिक्त, 23 सितंबर को एनएचएआई के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरओ) विशाल गौतम का तबादला जम्मू कर दिया गया था।
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वर्जन...
आईआईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही खामियां सामने आएंगी और जो भी सुधार कार्य आवश्यक हैं वह भी कराए जा सकेंगे। सितंबर के आखिरी सप्ताह में रिपोर्ट आने और अक्तूबर में खामियों को दूर करके, भारी वाहनों के लिए भी खोलने और टोल शुल्क वसूली शुरू करने की योजना थी, हालांकि अभी कुछ और वक्त लगेगा। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया गया है। -नवरतन,पीडी एनएचएआई
कब क्या हुआ
13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण।
25 जुलाई से एक्सप्रेसवे जगह-जगह धंसने लगा।
5 अगस्त को एनएचएआई ने पीडी सहित कई अधिकारियों को हटाया और आईआईटी खड़गपुर से जांच शुरू कराई।
6 अगस्त को एक्सप्रेसवे को भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया गया, साथ ही टोल शुल्क वसूली पर रोक लगा दी गई।
30 अगस्त को आईआईटी खड़गपुर की टीम जांच पूरी कर लौटी, रिपोर्ट 12 दिन में एनएचएआई को देने की बात कही।
37 दिन बाद भी आईआईटी की रिपोर्ट न मिलने से पूरी मरम्मत का काम शुरू नहीं
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4200 करोड़ रुपये की लागत से बने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 13 जुलाई को हुआ था। लोकार्पण के 12 दिन बाद 25 जुलाई को ही यह धंस गया। एनएचएआई ने पांच अगस्त को पीडी सहित कई अधिकारियों को हटा दिया था। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर की टीम ने गुणवत्ता की जांच शुरू की। टीम 25 दिनों तक जांच कर 30 अगस्त को लौट गई। 12 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का दावा किया गया लेकिन 37 दिन बाद भी रिपोर्ट न आने से कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि बड़ी खामियों के कारण इसे दबाने के प्रयास हो रहे हैं। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के बिना सुधार नहीं हो पा रहे। छह अगस्त से टोल वसूली पर लगी रोक 62 दिन बाद भी जारी है।
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इन पर हो चुकी है कार्रवाई
एक्सप्रेसवे में खामियों के कारण एनएचएआई और निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक की काफी किरकिरी हुई। एनएचएआई ने पांच अगस्त को लखनऊ जोन के तत्कालीन पीडी नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया था। पूर्व पीडी सौरभ चौरसिया के खिलाफ भी जांच शुरू कराई गई थी। निर्माण एजेंसी पीएनसी के तीन इंजीनियरों को एनएचएआई के कामों के लिए प्रतिबंधित भी किया गया था। इसके अतिरिक्त, 23 सितंबर को एनएचएआई के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरओ) विशाल गौतम का तबादला जम्मू कर दिया गया था।
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आईआईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही खामियां सामने आएंगी और जो भी सुधार कार्य आवश्यक हैं वह भी कराए जा सकेंगे। सितंबर के आखिरी सप्ताह में रिपोर्ट आने और अक्तूबर में खामियों को दूर करके, भारी वाहनों के लिए भी खोलने और टोल शुल्क वसूली शुरू करने की योजना थी, हालांकि अभी कुछ और वक्त लगेगा। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया गया है। -नवरतन,पीडी एनएचएआई
कब क्या हुआ
13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण।
25 जुलाई से एक्सप्रेसवे जगह-जगह धंसने लगा।
5 अगस्त को एनएचएआई ने पीडी सहित कई अधिकारियों को हटाया और आईआईटी खड़गपुर से जांच शुरू कराई।
6 अगस्त को एक्सप्रेसवे को भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया गया, साथ ही टोल शुल्क वसूली पर रोक लगा दी गई।
30 अगस्त को आईआईटी खड़गपुर की टीम जांच पूरी कर लौटी, रिपोर्ट 12 दिन में एनएचएआई को देने की बात कही।
37 दिन बाद भी आईआईटी की रिपोर्ट न मिलने से पूरी मरम्मत का काम शुरू नहीं