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उन्नाव: पराली जलाना अपराध से बाहर करने पर किसानों में खुशी, शिकायत हुई तो देना पड़ता था भारी जुर्माना
Sun, 28 Nov 2021 06:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 28 Nov 2021 06:31 PM IST
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पराली।
- फोटो : अमर उजाला।
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खेत में पराली जलाने को अपराध श्रेणी से बाहर करने के केंद्र सरकार के फैसले पर कानपुर सहित आसपास के जिलों के किसानों ने खुशी जताई है। राहत की बात यह है कि इस साल अभी तक पराली जलाने के मामले में किसी पर भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।
पूर्व में केंद्र सरकार ने कृषि अपशिष्ट (अवशेष) जलाने को दंडनीय अपराध घोषित कर रखा था। इसमें प्रावधान था कि यदि किसी खेत में दो बार अवशेष जलाने की घटनाएं हुई तो संबंधित किसान को सरकार से प्रदान की जाने वाली सुविधाओं जैसे सब्सिडी या अन्य योजना सभी से वंचित करना था।
पहली बार जुर्माना और दूसरी बार में संबंधित थाने में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट भी दर्ज कराई जानी थी। इसमें कई धाराओं में एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया था। वहीं जुर्माने में कृषि भूमि का क्षेत्र दो एकड़ से कम होने पर 2500 रुपये, दो एकड़ से अधिक पर पांच एकड़ तक 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक होने पर 15000 रुपये अर्थदंड लगाया जाता था।
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शनिवार को केंद्र सरकार ने पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला किया तो किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। हसनगंज के किसान भगत ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जताई। कहा कि सरकार का यह फैसला सराहनीय है। उपकृषि निदेशक डॉ. मुकुल तिवारी ने बताया कि इस साल पराली जलाने के 12 मामले सामने आए लेकिन इसमें किसी पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। केवल जुर्माना निर्धारित करने के लिए पत्र एसडीएम को भेजा गया है।
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पूर्व में केंद्र सरकार ने कृषि अपशिष्ट (अवशेष) जलाने को दंडनीय अपराध घोषित कर रखा था। इसमें प्रावधान था कि यदि किसी खेत में दो बार अवशेष जलाने की घटनाएं हुई तो संबंधित किसान को सरकार से प्रदान की जाने वाली सुविधाओं जैसे सब्सिडी या अन्य योजना सभी से वंचित करना था।
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पहली बार जुर्माना और दूसरी बार में संबंधित थाने में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट भी दर्ज कराई जानी थी। इसमें कई धाराओं में एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया था। वहीं जुर्माने में कृषि भूमि का क्षेत्र दो एकड़ से कम होने पर 2500 रुपये, दो एकड़ से अधिक पर पांच एकड़ तक 5000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक होने पर 15000 रुपये अर्थदंड लगाया जाता था।
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शनिवार को केंद्र सरकार ने पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला किया तो किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। हसनगंज के किसान भगत ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जताई। कहा कि सरकार का यह फैसला सराहनीय है। उपकृषि निदेशक डॉ. मुकुल तिवारी ने बताया कि इस साल पराली जलाने के 12 मामले सामने आए लेकिन इसमें किसी पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। केवल जुर्माना निर्धारित करने के लिए पत्र एसडीएम को भेजा गया है।