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केपीएससी भर्ती विवाद: 'सबूत मिले तो राजनीति छोड़ दूंगा'; कुमारस्वामी के आरोपों पर क्या बोले प्रियांक खरगे?

Mon, 31 Aug 2026 11:38 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, बंगलूरू।
पीटीआई, बंगलूरू। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 31 Aug 2026 11:38 PM IST
सार

 कर्नाटक में केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के आरोपों पर मंत्री प्रियांक खरगे ने अपनी भूमिका साबित होने पर राजनीति छोड़ने की बात कही। आखिर पूरा मामला क्या हुआ? इस रिपोर्ट में जानिए।

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Karnataka Minister Priyank Kharge offers to quit politics if role in KPSC ‘irregularities’ proved
प्रियांक खरगे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को कहा कि केपीएससी भर्ती में कथित गड़बड़ी में अगर उनकी सीधी या किसी भी तरह की भूमिका साबित होती है, तो वह सियासत से सन्यास लेने के लिए तैयार हैं। खरगे ने केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के आरोपों को खारिज किया। 
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कुमारस्वामी के आरोपों पर खरगे ने क्या कहा?
एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इसके समर्थन में उन्होंने कोई दस्तावेज या सबूत नहीं दिए हैं। प्रियांक खरगे ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके व्यक्ति का इस तरह का व्यवहार उम्मीद के मुताबिक नहीं है। 
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प्रियांक खरगे ने आगे कहा, जो लोग मेरे खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, उन्हें दस्तावेज लेकर सामने आना चाहिए। अगर आरोप सही साबित करने वाले सबूत हैं, तो जांच होने दीजिए। सच सामने आने दीजिए। लेकिन बिना दस्तावेज के लगातार आरोप लगाना 'हिट एंड रन' राजनीति है। उन्होंने कहा, कुमारस्वामी की यह एक आदत बन गई है। 

आरएसएस और अमित शाह पर क्या आरोप लगाया?
बंगलूरू में पत्रकारों से बात करते हुए प्रियांक खरगे ने कुमारस्वामी पर एक और आरोप लगाया। उन्होंने कहा, कुमारस्वामी हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यालय गए थे। ऐसा लगता है कि आरएसएस या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुमारस्वामी को मुझे निशाना बनाने का 'ठेका' है। भाजपा के नेता ऐसा करने में सक्षम नहीं थे। 

उन्होंने कहा, अगर केपीएससी से जुड़े किसी भी मामले में मेरी सीधी या किसी भी तरह की भूमिका साबित होती है, तो मैं राजनीति से संन्यास लेने के लिए तैयार हूं। लेकिन अगर भाजपा और जेडी(एस) की कोई भूमिका थी, तो क्या वे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं? उन्होंने कुमारस्वाी पर 24 एईई पदों पर भर्ती को लेकर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया। 

24 एईई पदों की भर्ती पर क्या आरोप है?
कुमारस्वामी ने हाल ही में प्रियांक खरगे के इस्तीफे की मांग की थी। उनका आरोप था कि पिछली सिद्धारमैया सरकार में जब विभाग प्रियांक के पास था, तब उन्होंने केपीएससी के जरिये ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग में 24 सहायक कार्यकारी अभियंता यानी एईई पदों पर भर्ती की अनुमति दी थी। 
 
प्रियांक ने कहा, एईई अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर कई सवाल पहले ही केपीएससी के अंदर उठाए गए थे। इनमें ओएमआर शीट में कथित छेड़छाड़, सीसीटीवी फुटेज गायब होना और नियमों के उल्लंघन जैसे आरोप शामिल थे। ये सवाल अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी होने से पहले उठे थे। इसके बावजूद नियुक्तियों को आगे बढ़ने दिया। 

'मंत्री को जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा?'
उन्होंने कहा, केपीएससी की प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों की जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थानों और अधिकारियों की होती है। इसमें परीक्षा कराना, अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी करना और अंतिम सूची संबंधित विभाग को भेजना शामिल है। ऐसे में जब स्थिति ऐसी है, तो केपीएससी में कथित गड़बड़ी के लिए सीधे एक मंत्री को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश क्यों की जा रही है?


कुछ अभ्यर्थियों की चयन सूची पर आपत्ति उठने के बाद केपीएससी ने एक समीक्षा समिति बनाई थी। प्रियांक खरगे ने कहा कि अभी जांच और समीक्षा चल रही है। उन्होंने कहा, जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि हर चरण में फैसला किस अधिकारी ने लिया ता। किसी एक व्यक्ति को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के बजाय पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
 
प्रियांक खरगे ने विपक्ष से क्या चुनौती दी?
प्रियांक ने विपक्षी नेताओं को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर उनके पास केपीएससी मामले में उनकी भूमिका के सबूत हैं, तो वे उन दस्तावेजों को सार्वजनिक करें, जिनके आधार पर वे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती में गड़बड़ी से युवाओं की नौकरी और उनका प्रभावित हो सकता है। इसलिए भाजपा और जेडी(एस) के नेताओं को अपनी पिछली सरकार के समय हुई घटनाओं को भी याद रखना चाहिए। 
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