{"_id":"6092df9e8ebc3e8d3071c2be","slug":"political-unnao-news-knp6269351139","type":"story","status":"publish","title_hn":"साइकिल दौड़ी, मुरझा गया कमल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साइकिल दौड़ी, मुरझा गया कमल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देते हुए सपा के सदस्यों की संख्या सबसे अधिक 19 है। यह हाल तो तब रहा जब जिले की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा काबिज है। सांसद भी भाजपा का है। सपा का जिले में एक भी विधायक नहीं है।
वर्ष 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले में सपा का दबदबा रहा था। छह विधानसभा सीटों में से पांच पर सपा और एक पर बसपा का कब्जा बरकरार रहा था। 2017 के चुनाव में परिवर्तन की लहर में जिले में भगवा परचम लहराया था। छह में से पांच पर भाजपा और एक पर बसपा का कब्जा रहा था। सांसद साक्षी महाराज 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। अब जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा मात खा गई। भाजपा के 51 समर्थित प्रत्याशियों में से सिर्फ आठ ही जीत पाए। सपा ने 40 प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। इनमें 19 की जीत हुई है। हालत यह है कि भाजपा के विधायक अपने ही विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों को नहीं जिता पाए।
घातक रहा अति विश्वास
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपाइयों के लिए उनका अति विश्वास घातक बन गया। आगामी विधानसभा चुनाव का रिहर्सल माने जा रहे इन पंचायत चुनाव के नतीजे भाजपा के गिरते ग्राफ की ओर इशारा कर रहे हैं। वहीं सपा की बढ़त पुराने गढ़ में फिर पैठ बनाने की कोशिशों का नतीजा बताया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले में सपा का दबदबा रहा था। छह विधानसभा सीटों में से पांच पर सपा और एक पर बसपा का कब्जा बरकरार रहा था। 2017 के चुनाव में परिवर्तन की लहर में जिले में भगवा परचम लहराया था। छह में से पांच पर भाजपा और एक पर बसपा का कब्जा रहा था। सांसद साक्षी महाराज 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। अब जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा मात खा गई। भाजपा के 51 समर्थित प्रत्याशियों में से सिर्फ आठ ही जीत पाए। सपा ने 40 प्रत्याशियों को समर्थन दिया था। इनमें 19 की जीत हुई है। हालत यह है कि भाजपा के विधायक अपने ही विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों को नहीं जिता पाए।
विज्ञापन
घातक रहा अति विश्वास
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपाइयों के लिए उनका अति विश्वास घातक बन गया। आगामी विधानसभा चुनाव का रिहर्सल माने जा रहे इन पंचायत चुनाव के नतीजे भाजपा के गिरते ग्राफ की ओर इशारा कर रहे हैं। वहीं सपा की बढ़त पुराने गढ़ में फिर पैठ बनाने की कोशिशों का नतीजा बताया जा रहा है।
विज्ञापन