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न बैठने का स्थान, न पीने का शुद्ध पानी
ब्यूरो/ अमर उजाला, उन्नाव।
Updated Wed, 13 Jan 2016 12:08 AM IST
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बालामऊ-कानपुर रेलवे लाइन पर स्थित सफीपुर स्टेशन स्थापना के बाद भी अपेक्षित है। स्टेशन पर आज भी प्लेटफार्मों का निर्माण नहीं हो सका है जिससे लोगों को ट्रेन से उतरने और चढ़ने में समस्या अक्सर समस्या होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि चढ़ने के प्रयास में महिलाओं व बुजुर्गों की ट्रेन तक छूट जाती है।
कभी कभी उतरने के प्रयास में गिरकर चुटहिल भी होते रहते हैं। ट्रेन पर चढ़ने के लिए महिलाओं व वृद्धों को सहयोगियों की आवश्यकता पड़ती है। मालूम हो कि इस रेलमार्ग पर प्रतिदिन दो ट्रेनों का आवागमन होता है। कई बार प्लेटफार्म की मांग की गई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके अलावा जलापूर्ति के लिए बनाए गए स्टैंडपोस्ट भी पानी न आने से शोपीस हैं। यात्रियों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं।
वहीं बैठने की सुविधा के नाम पर सीमेंट की कुल तीन बेंच हैं। बाकी यात्री जमीन पर बैठकर ट्रेन की प्रतीक्षा करते हैं। कई वर्ष पहले कंक्रीट का बनाया गया मार्ग मरम्मत को तरस रहा है। इस पर पैदल चलना ही जोखिम भरा हुआ है। बरसात में तो यह मार्ग जलमगभन हो जाता है। यही नहीं महिला व पुरुष के लिए बने दो शौचालयों में हर समय ताला लटकता रहता है।
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जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से कर्मचारियों को अपने आवास तक जाने में भी पानी के बीच से जाना पड़ता है। स्टेशन मास्टर ने बताया कि प्लेटफार्म, पहुंच मार्ग व जलनिकासी के लिए नाला निर्माण कराए जाने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है।
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कभी कभी उतरने के प्रयास में गिरकर चुटहिल भी होते रहते हैं। ट्रेन पर चढ़ने के लिए महिलाओं व वृद्धों को सहयोगियों की आवश्यकता पड़ती है। मालूम हो कि इस रेलमार्ग पर प्रतिदिन दो ट्रेनों का आवागमन होता है। कई बार प्लेटफार्म की मांग की गई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसके अलावा जलापूर्ति के लिए बनाए गए स्टैंडपोस्ट भी पानी न आने से शोपीस हैं। यात्रियों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं।
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वहीं बैठने की सुविधा के नाम पर सीमेंट की कुल तीन बेंच हैं। बाकी यात्री जमीन पर बैठकर ट्रेन की प्रतीक्षा करते हैं। कई वर्ष पहले कंक्रीट का बनाया गया मार्ग मरम्मत को तरस रहा है। इस पर पैदल चलना ही जोखिम भरा हुआ है। बरसात में तो यह मार्ग जलमगभन हो जाता है। यही नहीं महिला व पुरुष के लिए बने दो शौचालयों में हर समय ताला लटकता रहता है।
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जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने से कर्मचारियों को अपने आवास तक जाने में भी पानी के बीच से जाना पड़ता है। स्टेशन मास्टर ने बताया कि प्लेटफार्म, पहुंच मार्ग व जलनिकासी के लिए नाला निर्माण कराए जाने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है।