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सूखा भूसा, खौलता पानी गोशालाओं की यही कहानी
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सोनिक गोशाला में धूप में हौज में भरा गर्म पानी।
- फोटो : UNNAO
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उन्नाव। अन्ना मवेशियों को संरक्षित करने के लिए बनाई गईं गोशालाओं में व्यवस्था ध्वस्त है। अधिकांश गोशालाओं में न मवेशियों को हरा चारा मिल रहा है और न पानी। मवेशी बीमार होकर दम तोड़ रहे हैं। पिछले दिनों एसडीएम के निरीक्षण में दो गोशालाओं में सात मवेशियों के दम तोड़ने की बात सामने आई थी लेकिन सुधार के निर्देश तक ही कार्रवाई सीमित रह गई।
पशुपालन विभाग का दावा है कि इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में 201 पशु आश्रयस्थल संचालित हैं। इसके अलावा हर तहसील में गो आश्रयस्थल व कांजी हाउस भी हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में इनमें करीब 19 हजार मवेशी संरक्षित हैं। शासनादेश के अनुसार संरक्षित मवेशियों की देखभाल होनी चाहिए लेकिन जिम्मेदार गोशालाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई आश्रयस्थलों में संरक्षित मवेशियों को खाने में सूखा भूसा और खौलता पानी मिल रहा है। मवेशी बीमार होकर दम तोड़ रहे हैं।
ये है हकीकत
- विकासखंड बिछिया की ग्राम पंचायत सोनिक में बनी अस्थायी गोशाला की स्थिति बहुत खराब है। यहां पर गिनती के 10 से 12 मवेशी ही संरक्षित हैं। इन्हें न तो हरा चारा दिया जा रहा है और न ही ठंडा पानी। सूखा भूसा खाने से कई मवेशी बीमार हो गए हैं। गोशाला में एक मवेशी मरणासन्न धूप में पड़ा मिला। चारों तरफ गंदगी फैली है। कोई देखरेख करने वाला तक नहीं है।
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- विकासखंड गंजमुरादाबाद की गोशाला नसीरपुर भिक्खन में दो दिन में दो मवेशियों की मौत हो चुकी है। अभिलेखों में 40 मवेशी दर्ज होने के बावजूद गोशाला में मात्र 15 मवेशी ही हैं। उनको भी समय से समुचित रूप से चारा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा भगवंतनगर की कान्हा गोशाला और हसनगंज की बरौना न्यामतपुर गोशाला में भी अव्यवस्था के कारण सात मवेशी दम तोड़ चुके हैं। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
जिन गोशालाओं में खामियां मिल रहीं हैं वहां पर व्यवस्था दुरुस्त कराई जा रही है। भूसे की खरीदारी के आदेश दिए जा चुके हैं। प्रधान व सचिवों को चेतावनी दी जा चुकी है। - डॉ. निर्मल कुमार, सीवीओ।
भूसा दान देने वाला सम्मानित
पाटन। तहसीलदार बीघापुर दिलीप कुमार की अपील पर मंगलवार को बक्सर निवासी समाजसेवी मुन्ना सिंह ने स्थानीय गोशाला के लिए 10 क्विंटल भूसा दान दिया। तहसीलदार ने गोशाला पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया। (संवाद)
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पशुपालन विभाग का दावा है कि इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में 201 पशु आश्रयस्थल संचालित हैं। इसके अलावा हर तहसील में गो आश्रयस्थल व कांजी हाउस भी हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में इनमें करीब 19 हजार मवेशी संरक्षित हैं। शासनादेश के अनुसार संरक्षित मवेशियों की देखभाल होनी चाहिए लेकिन जिम्मेदार गोशालाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई आश्रयस्थलों में संरक्षित मवेशियों को खाने में सूखा भूसा और खौलता पानी मिल रहा है। मवेशी बीमार होकर दम तोड़ रहे हैं।
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ये है हकीकत
- विकासखंड बिछिया की ग्राम पंचायत सोनिक में बनी अस्थायी गोशाला की स्थिति बहुत खराब है। यहां पर गिनती के 10 से 12 मवेशी ही संरक्षित हैं। इन्हें न तो हरा चारा दिया जा रहा है और न ही ठंडा पानी। सूखा भूसा खाने से कई मवेशी बीमार हो गए हैं। गोशाला में एक मवेशी मरणासन्न धूप में पड़ा मिला। चारों तरफ गंदगी फैली है। कोई देखरेख करने वाला तक नहीं है।
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- विकासखंड गंजमुरादाबाद की गोशाला नसीरपुर भिक्खन में दो दिन में दो मवेशियों की मौत हो चुकी है। अभिलेखों में 40 मवेशी दर्ज होने के बावजूद गोशाला में मात्र 15 मवेशी ही हैं। उनको भी समय से समुचित रूप से चारा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा भगवंतनगर की कान्हा गोशाला और हसनगंज की बरौना न्यामतपुर गोशाला में भी अव्यवस्था के कारण सात मवेशी दम तोड़ चुके हैं। इसके बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
जिन गोशालाओं में खामियां मिल रहीं हैं वहां पर व्यवस्था दुरुस्त कराई जा रही है। भूसे की खरीदारी के आदेश दिए जा चुके हैं। प्रधान व सचिवों को चेतावनी दी जा चुकी है। - डॉ. निर्मल कुमार, सीवीओ।
भूसा दान देने वाला सम्मानित
पाटन। तहसीलदार बीघापुर दिलीप कुमार की अपील पर मंगलवार को बक्सर निवासी समाजसेवी मुन्ना सिंह ने स्थानीय गोशाला के लिए 10 क्विंटल भूसा दान दिया। तहसीलदार ने गोशाला पहुंचकर उन्हें सम्मानित किया। (संवाद)

सोनिक गोशाला में तेज धूप में मरणासन्न हालत में पड़ा मवेशी। संवाद- फोटो : UNNAO