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निकलेगी मां की ज्योति, कस्बे में जगमगाएंगे दीप
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चैतवर मेले में लगे झूले। संवाद
- फोटो : UNNAO
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नवाबगंज। कस्बे में लगने वाला पौराणिक चैतवर मेला आज से शुरू होगा। दो वर्षों से कोविड महामारी के चलते मेला नहीं लग सका था। इस मेले में घूमने व मां की ज्योति दर्शन के लिए दूरदराज से लोग पहुंचते है और कई दिनों तक प्रवास करते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण मां की ज्योति होती है जिसमें हजारों की संख्या में भक्त पैदल शामिल होकर नाचते गाते बैंड बाजा, झांकियों व हाथी घोड़ों के साथ नगर भ्रमण करते हैं।
पूर्णमासी से नवाबगंज कस्बे के पछियावं में पौराणिक दुर्गा माता मंदिर के समीप ऐतिहासिक चैतवर मेला शुरू होता है। मां की ज्योति मां दुर्गा मंदिर सेवा समिति द्वारा शनिवार शाम चार बजे नगर भ्रमण के लिए निकाली जाएगी। मेला कमेटी सदस्यों ने कस्बे में हर घर वालों को मिट्टी के दीपक वितरित किए गए हैं।
मां की ज्योति के नगर भ्रमण के दौरान लोग अपने घरों के बाहर मिट्टी के दीपक का प्रकाश कर फूलों की वर्षाकर से ज्योति का स्वागत करेंगे। मेले के लिए दुकानें व झूले लग गए हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि चैतवर मेला दशकों पुराना है। पहले यह मेला एक महीने तक चलता था और लकड़ी के सामान पलंग, तख्त, चारपाई से लेकर घर गृहस्थी का सामान मिलता था। भारी संख्या में लोग यहां से साल भर का सामान खरीदकर ले जाते थे।
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अब यह मेला केवल एक सप्ताह का सिमटकर रह गया है। इस मेले में उन्नाव, लखनऊ, कानपुर व अन्य जनपदों के हजारों लोग आते हैं और मां जगदंबा के दर्शन कर बढ़ चढ़कर मेले में हिस्सा लेते हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष दिलीप लश्करी ने मेला में प्रवास करने वाले भक्तों के लिए खजुरिया तालाब व पक्के तालाब में नहाने व ठहरने सहित पीने के पानी व साफ सफाई की व्यवस्था कराई है। मुख्य मार्गों में चूने का छिड़काव व प्याऊ की व्यवस्था की गई है। वहीं मेले दुकानदारों को तीन दिन के लिए बिजली व्यवस्था मुफ्त दी गई है।
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पूर्णमासी से नवाबगंज कस्बे के पछियावं में पौराणिक दुर्गा माता मंदिर के समीप ऐतिहासिक चैतवर मेला शुरू होता है। मां की ज्योति मां दुर्गा मंदिर सेवा समिति द्वारा शनिवार शाम चार बजे नगर भ्रमण के लिए निकाली जाएगी। मेला कमेटी सदस्यों ने कस्बे में हर घर वालों को मिट्टी के दीपक वितरित किए गए हैं।
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मां की ज्योति के नगर भ्रमण के दौरान लोग अपने घरों के बाहर मिट्टी के दीपक का प्रकाश कर फूलों की वर्षाकर से ज्योति का स्वागत करेंगे। मेले के लिए दुकानें व झूले लग गए हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि चैतवर मेला दशकों पुराना है। पहले यह मेला एक महीने तक चलता था और लकड़ी के सामान पलंग, तख्त, चारपाई से लेकर घर गृहस्थी का सामान मिलता था। भारी संख्या में लोग यहां से साल भर का सामान खरीदकर ले जाते थे।
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अब यह मेला केवल एक सप्ताह का सिमटकर रह गया है। इस मेले में उन्नाव, लखनऊ, कानपुर व अन्य जनपदों के हजारों लोग आते हैं और मां जगदंबा के दर्शन कर बढ़ चढ़कर मेले में हिस्सा लेते हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष दिलीप लश्करी ने मेला में प्रवास करने वाले भक्तों के लिए खजुरिया तालाब व पक्के तालाब में नहाने व ठहरने सहित पीने के पानी व साफ सफाई की व्यवस्था कराई है। मुख्य मार्गों में चूने का छिड़काव व प्याऊ की व्यवस्था की गई है। वहीं मेले दुकानदारों को तीन दिन के लिए बिजली व्यवस्था मुफ्त दी गई है।