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Unnao News: सांस के गंभीर रोगियों की स्वाइन फ्लू की जांच जरूरी
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उन्नाव। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने शासन की चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण पर रोक लगाने और मरीजों को तत्काल उपचार के लिए शासन ने अस्पतालों में सांस रोगियों के लिए अलग ओपीडी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती सांस के गंभीर मरीजों की स्वाइन फ्लू जांच जरूरी कर दी है।
स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, खांसने-छींकने के दौरान निकलने वाली एयर ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैल सकती है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों में स्वाइन फ्लू संक्रमण के अधिक घातक होने का खतरा होता है। जिले में स्वाइन फ्लू के अब तक आठ मरीज मिल चुके हैं। इनमें से देवर-भाभी की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।शे
ऐसे में शासन ने स्वास्थ्य विभाग को जिला अस्पताल में सांस के रोगियों की अलग ओपीडी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती सांस के गंभीर मरीजों की स्वाइन फ्लू जांच कराने और इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों को विशेष उपचार देने और जिन मरीजों में चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर संक्रमण का खतरा अधिक हो उन्हें जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी वायरल दवाओं से उपचार शुरू करने को कहा है।
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लोगों को जागरूक करेगा विभाग
स्वाइन फ्लू का प्रसार रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब लोगों को जागरूक करेगा। इसके लिए अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों को हाथों की स्वच्छता, खांसने, छींकने के दौरान मुंह ढंकने और भीड़भाड़ में मास्क लगाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
लक्षण समाप्त होने तक मास्क लगाएं मरीज
शासन की गाइडलाइंस में इंफ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीज लक्षण समाप्त होने के बाद भीड़भाड़ से बचने और घर में भी मास्क लगाने को कहा गया है। इसके साथ ही मरीजों को बगैर चिकित्सकीय परामर्श किसी दवा का सेवन न करने की भी अपील की गई है।
वर्जन...
शासन के निर्देश मिले हैं। सभी अस्पतालों में भर्ती संभावित लक्षण वाले मरीजों की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सांस के मरीजों के लिए अलग ओपीडी शुरू करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. एके शर्मा, सीएमओ।
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स्वाइन फ्लू संक्रामक बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, खांसने-छींकने के दौरान निकलने वाली एयर ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैल सकती है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। सांस संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों में स्वाइन फ्लू संक्रमण के अधिक घातक होने का खतरा होता है। जिले में स्वाइन फ्लू के अब तक आठ मरीज मिल चुके हैं। इनमें से देवर-भाभी की लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।शे
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ऐसे में शासन ने स्वास्थ्य विभाग को जिला अस्पताल में सांस के रोगियों की अलग ओपीडी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती सांस के गंभीर मरीजों की स्वाइन फ्लू जांच कराने और इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीजों को विशेष उपचार देने और जिन मरीजों में चिकित्सकीय परीक्षण के आधार पर संक्रमण का खतरा अधिक हो उन्हें जांच रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी वायरल दवाओं से उपचार शुरू करने को कहा है।
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लोगों को जागरूक करेगा विभाग
स्वाइन फ्लू का प्रसार रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब लोगों को जागरूक करेगा। इसके लिए अस्पतालों में मरीजों और तीमारदारों को हाथों की स्वच्छता, खांसने, छींकने के दौरान मुंह ढंकने और भीड़भाड़ में मास्क लगाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
लक्षण समाप्त होने तक मास्क लगाएं मरीज
शासन की गाइडलाइंस में इंफ्लुएंजा जैसे लक्षण वाले मरीज लक्षण समाप्त होने के बाद भीड़भाड़ से बचने और घर में भी मास्क लगाने को कहा गया है। इसके साथ ही मरीजों को बगैर चिकित्सकीय परामर्श किसी दवा का सेवन न करने की भी अपील की गई है।
वर्जन...
शासन के निर्देश मिले हैं। सभी अस्पतालों में भर्ती संभावित लक्षण वाले मरीजों की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। सांस के मरीजों के लिए अलग ओपीडी शुरू करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. एके शर्मा, सीएमओ।