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तेजाब से झुलसी मां-बेटी दूसरों के लिए बनीं मिसाल
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 14 Aug 2015 11:40 PM IST
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उन्नाव। पुरवा कोतवाली क्षेत्र के तलहौरी गांव की रहने वाली सुनीता और उसकी पुत्री रोशनी ने एसिड अटैक के बाद भी हार नहीं मानी और धमकियों व प्रलोभनों के बाद भी आरोपी को जेल भेजवा दिया। अपने हौसले से आज मां व उसकी बेटी दूसरों के लिए एक मिसाल बन गई हैं।
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वर्ष 2013 सुनीता व उसकी पुत्री रोशनी के लिए कभी न भूलने वाला साल बन गया है। संतोष की पत्नी सुनीता व पुत्री रोशनी घर के बाहर सोई हुई थीं। पड़ोसी भोला ने पुराने विवाद के चलते मां-बेटी पर तेजाब फेंक दिया। एसिड अटैक से सुनीता व रोशनी के शरीर का ऊपरी हिस्सा झुलस गया था। पति व अन्य लोगों ने झुलसी मां-बेटी को अस्पताल पहुंचाया था। यहां पर डॉक्टरों ने करीब 3 लाख रुपये का खर्च बताया। मजदूरी करने वाले संतोष के सामने पत्नी व बेटी का इलाज कराने की समस्या खड़ी हो गई। उधर, मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ तो पीड़िता को धमकियां मिलनी शुरू हो गईं।
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इस मुश्किल घड़ी में भी सुनीता व रोशनी ने हार नहीं मानी और आरोपी भोला को जेल भिजवाकर ही दम लिया। पति संतोष ने भी पत्नी व बेटी के इलाज के लिए नाते-रिश्तेदारों से लेकर परिचितों तक के सामने हाथ फैलाया। तिनका-तिनका जोड़ा और पत्नी-बेटी का इलाज कराया। तेजाब से झुलसी सुनीता व रोशनी आज ठीक हो चुकी हैं लेकिन एसिड अटैक की घटना की याद आते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है।
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सुनीता अपनी तरह की एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को संदेश देती हैं कि वह अपने को किसी भी कीमत पर कम न आंके। कितनी भी धमकी मिले या प्रलोभन आए तो हिम्मत और सच्चाई से उसका डटकर सामना करें। आखिर में जीत आपकी ही होगी। मां-बेटी के इस अदम्य साहस पर प्रदेश सरकार ने 3-3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष के जरिए दी है। मां के खाते में पैसा पहुंच भी चुका है।
रेप पीड़िताओं ने भी दिखाई है हिम्मत
जनपद में कई रेप पीड़िताओं ने धमकियां मिलने के बाद भी आरोपियों को जेल भिजवाया। इनमें आसीवन, असोहा, सफीपुर, अचलगंज व हसनगंज थानाक्षेत्र की किशोरियां शामिल हैं। बलात्कार का दंश झेलने वाली एक 6-7 साल की बच्ची भी है। सदर कोतवाली क्षेत्र में एक बच्ची के साथ रेप के बाद उसकी हत्या तक कर दी गई। असोहा में एक छह वर्षीय बच्ची की बलात्कार के बाद मौत हो गई। कुछ रेप पीड़िताओं को घटना के बाद आरोपियों ने धमकाया। फिर समाज से भी उपेक्षा मिली। इसके बाद भी इन पीड़िताओं ने परिस्थितियों का डटकर सामना किया और आगे आकर आरोपियों को जेल भिजवाया। इन पीड़िताओं में दो को सरकार की ओर से 3-3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। शेष 4 पीड़िताओं को सहायता दिलाने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। जल्द फाइल शासन को भेजी जाएगी।
दो माह में आए 12 मामले
जिला प्रोबेशन कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो माह में महिला उत्पीड़न के 12 मामले आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा बलात्कार के हैं। एक मामला दहेज हत्या का भी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रुति शुक्ला ने बताया कि महिला उत्पीड़न के मामलों में पीड़िताओं को प्रदेश सरकार द्वारा रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष के जरिए आर्थिक सहायता दी जाती है।