सात किलो सोना लूट की घटना में पुलिस को पुराने लुटेरों की तलाश
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उन्नाव। सोहरामऊ में कोरियर कंपनी की वैन के चालक की हत्या कर सात किलो सोना लूट की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस फिलहाल खाली हाथ है। पुलिस का सारा जोर इस बात पर है कि इसी तरह की पहले की घटनाओं में शामिल रहे लुटेरों को दबोचा जाए। एसटीएफ क्राइम ब्रांच और लखनऊ व उन्नाव पुलिस की करीब आधा दर्जन टीमें दबिश दे रही हैं। 2006 की लूट में शामिल बर्खास्त सिपाही रमाकांत यादव की सरगर्मी से तलाश की जा रही है, पर वह हत्थे नहीं चढ़ रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक घेराबंदी देख वह 48 घटे में पांच बार ठिकाना बदल चुका है।
शुक्रवार देर रात लखनऊ-कानपुर हाइवे पर सोहरामऊ थाना क्षेत्र में कोरियर कंपनी की पार्सल वैन के चालक हरिश्चंद्र यादव की हत्या और सिक्योरिटी गार्ड रामबचन पांडेय को गोली मारकर घायल करके सात किलो सोना लूटा गया था। यह जिले में इस साल की सबसे बड़ी लूट है। शनिवार रात एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और उन्नाव व लखनऊ जिले की पुलिस की कई टीमें अलग टास्क पर काम करती रहीं। पिछले कुछ वर्षों में सराफा व्यापारियों के साथ हुई लूट और हत्यायुक्त लूट में शामिल रहे लुटेरों की लोकेशन और फरार चल रहे शातिरों की तलाश में पुलिस जुटी रही। इसके लिए पुलिस टीमों ने लखनऊ, बंथरा, कन्नौज, रायबरेली और आगरा तक भाग दौड़ कर दबिश दी।
सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने कुछ पुराने शातिर लुटेरों को गिरफ्तार भी किया है मगर अधिकारी अभी कुछ भी बताने से बच रहे हैं। पुलिस का मानना है कि 2006 में शहर कोतवाली क्षेत्र में क्वालिस चालक की हत्या कर 13 किलो सोना लूट की घटना में शामिल रहा बर्खास्त सिपाही इस घटना के खुलासे में पुलिस के लिए अहम मोहरा साबित हो सकता है। टीम में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सोहरामऊ की घटना के बाद जैसे ही पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया, पूर्व की घटनाओं में शामिल रहे लुटेरे और उनके परिवार बार-बार अपने ठिकाने बदल रहे हैं।