{"_id":"31d6dbdff99b23f6f1787cbbfbc506b4","slug":"if-children-will-be-less-well-trained-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम बच्चे होंगे तो मिलेगी अच्छी तालीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम बच्चे होंगे तो मिलेगी अच्छी तालीम
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 27 Aug 2015 12:35 AM IST
विज्ञापन
उन्नाव। जो इंसान अपने बच्चों को जायज कमाई से अच्छी तालीम व बेहतर परवरिश देता है उसे हर हाल में जन्नत नसीब होती है। अच्छी परवरिश और बेहतर तालीम देने के लिए परिवार में सदस्यों की संख्या का कम होना भी बहुत जरूरी है। बड़ा परिवार बेहतर तरक्की में बाधक बनता है। कम संतान, इंसान के सुखी रहने का सरल व सुगम रास्ता है। यदि बच्चे कम होंगे तो उन्हें अच्छा भोजन, अच्छे कपड़े और अच्छा घर दिलाने में भी कठिनाई नहीं होगी। कुछ ऐसी सोच शहर के मुस्लिमों में बढ़ रही है और वह इस पर अमल करने का प्रयास भी कर रहे हैं। इस पहल की मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी सराहना की है।
दारुल उलूम फैजेआम मदरसा के वाइस प्रिंसिपल व नायब काजी शहर मौलाना नईम खान मिस्बाही ने इस सोच को बेहतर बताते हुए कहा कि हम सभी को कम बच्चे पैदा कर उन्हें अच्छी परवरिश देकर बुरे हालात से लड़ने के लायक बनाना चाहिए। वहीं, बच्चों को बेहतर तालीम देकर इस काबिल बनाना चाहिए कि वह एक अच्छा नागरिक बन सके। वहीं इमामे जामा मस्जिद मो. जमालुद्दीन ने भी इस बेहतर सोच को सराहा।
उन्होंने कहा कि हमें छोटे घरों में अधिक संख्या में रहने, फटे-पुराने कपड़े पहनाने, शिक्षा व रहन-सहन में समझौता कर बड़ा परिवार करने की सोच को बदलना होगा। परिवार छोटा होने से उन्हें उसी खर्च में अच्छा घर, साफ-सुथरे व बेहतर कपड़े, उच्च शिक्षा व बिना समझौते के जीवन यापन किया जा सकता है। इससे परिवार, कौम व देश की बेहतर तरक्की में सहयोग होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
दारुल उलूम फैजेआम मदरसा के वाइस प्रिंसिपल व नायब काजी शहर मौलाना नईम खान मिस्बाही ने इस सोच को बेहतर बताते हुए कहा कि हम सभी को कम बच्चे पैदा कर उन्हें अच्छी परवरिश देकर बुरे हालात से लड़ने के लायक बनाना चाहिए। वहीं, बच्चों को बेहतर तालीम देकर इस काबिल बनाना चाहिए कि वह एक अच्छा नागरिक बन सके। वहीं इमामे जामा मस्जिद मो. जमालुद्दीन ने भी इस बेहतर सोच को सराहा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हमें छोटे घरों में अधिक संख्या में रहने, फटे-पुराने कपड़े पहनाने, शिक्षा व रहन-सहन में समझौता कर बड़ा परिवार करने की सोच को बदलना होगा। परिवार छोटा होने से उन्हें उसी खर्च में अच्छा घर, साफ-सुथरे व बेहतर कपड़े, उच्च शिक्षा व बिना समझौते के जीवन यापन किया जा सकता है। इससे परिवार, कौम व देश की बेहतर तरक्की में सहयोग होगा।
विज्ञापन