{"_id":"60a6a0768ebc3eff5c30b9d5","slug":"health-unnao-news-knp6294950146","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना से स्वस्थ शिक्षक में ब्लैक फंगस के लक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना से स्वस्थ शिक्षक में ब्लैक फंगस के लक्षण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। बीस दिन पहले कोरोना से स्वस्थ हुए प्राइवेट स्कूल के शिक्षक ने बाईं आंख में सूजन आने पर आवास विकास स्थित एक निजी अस्पताल में दिखाया। उसमें डॉक्टर ने ब्लैक फंगस के लक्षण बताए हैं। यहां इलाज की सुविधा न होने पर उसे लखनऊ पीजीआई भेज दिया गया है।
पीडीनगर निवासी रत्नेश (48) निजी स्कूल में शिक्षक हैं। एक महीने पहले वह कोरोना संक्रमित हुए थे। 20 दिन पहले उनकी रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आई थी। अब तीन दिन पहले उनके चेहरे पर सूजन आई। निजी अस्पताल में भर्ती हुए और इलाज शुरू कराया। बाद में बाईं आंख में सूजन के साथ काला घेरा बनने पर डॉक्टरों को संदेह हुआ। ब्लैक फंगस की संभावना पर शिक्षक को जांच के बाद पुष्टि के लिए लखनऊ पीजीआई भेज दिया गया। सीएमओ कैप्टन डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि मामला जानकारी में नहीं है। यदि पुष्टि होती है तो रिपोर्ट कार्यालय आएगी।
जिले में ब्लैक फंगस के इलाज के लिए कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है। संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की जांच भी नही हो पा रही। संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को जांच के लिए लखनऊ या कानपुर रेफर किया जा रहा है।
विज्ञापन
जिले में कोरोना के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाओं के बाद अब ब्लैक फंगस की दवाओं की कालाबाजारी शुरू हो गई है। संदिग्ध लक्षण से पीड़ित मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ब्लैक फंगस के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाएं तीन गुना दाम पर मिल रही हैं।
विज्ञापन
पीडीनगर निवासी रत्नेश (48) निजी स्कूल में शिक्षक हैं। एक महीने पहले वह कोरोना संक्रमित हुए थे। 20 दिन पहले उनकी रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आई थी। अब तीन दिन पहले उनके चेहरे पर सूजन आई। निजी अस्पताल में भर्ती हुए और इलाज शुरू कराया। बाद में बाईं आंख में सूजन के साथ काला घेरा बनने पर डॉक्टरों को संदेह हुआ। ब्लैक फंगस की संभावना पर शिक्षक को जांच के बाद पुष्टि के लिए लखनऊ पीजीआई भेज दिया गया। सीएमओ कैप्टन डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि मामला जानकारी में नहीं है। यदि पुष्टि होती है तो रिपोर्ट कार्यालय आएगी।
विज्ञापन
जिले में ब्लैक फंगस के इलाज के लिए कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है। संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की जांच भी नही हो पा रही। संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को जांच के लिए लखनऊ या कानपुर रेफर किया जा रहा है।
विज्ञापन
जिले में कोरोना के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाओं के बाद अब ब्लैक फंगस की दवाओं की कालाबाजारी शुरू हो गई है। संदिग्ध लक्षण से पीड़ित मरीजों को जरूरी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ब्लैक फंगस के इलाज में प्रयोग होने वाली दवाएं तीन गुना दाम पर मिल रही हैं।