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ईओडब्ल्यू ने जिला प्रशासन से मांगा भूमि अधिग्रहण का ब्योरा

Tue, 17 Mar 2020 12:51 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Mar 2020 12:51 AM IST
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EOW sought details of land acquisition from district administration
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे। - फोटो : UNNAO
उन्नाव। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण के दौरान की गई अधिग्रहित भूमि में कथित घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अब जिला प्रशासन से जमीन अधिग्रहण का पूरा ब्योरा मांगा है। प्रशासन ने भूमि अध्यापित विभाग से एक्सप्रेस वे से संबंधित पूरी जानकारी मय अभिलेख के तलब की है।
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने शासनकाल में आगरा से लखनऊ के बीच 302 किमी लंबे एक्सप्रेस वे का निर्माण कराया था। लखनऊ से लेकर आगरा तक बनाया गया 6 लेन का एक्सप्रेस वे जनपद की हसनगंज, बांगरमऊ और सफीपुर तहसील के 50 गांवों से निकला हुआ है। जिले में एक्सप्रेस वे की लंबाई करीब 63 किमी है। इसके लिए 7789 किसानों की 667 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई थी। कार्यदायी संस्था यूपीडा ने मुआवजा के रूप में 410 करोड़ रुपये किसानों को देने का दावा किया।
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वहीं, 2017 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेस वे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में घोटाले की आशंका पर जांच के आदेश दिए। साथ ही ईओडब्ल्यू को मामले की जांच सौंपी। जांच एजेंसी ने एक्सप्रेस वे के दायरे में आने वाले जनपदों से भूमि अधिग्रहण संबंधी ब्योरा तलब किया। इसमें उन्नाव भी शामिल है। ईओडब्ल्यू ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि की अभिलेखों सहित जानकारी मांगी है। कलक्ट्रेट के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण करने के दौरान सर्किल रेट तय करने में खेल किया गया था। रसूखदारों की खेतिहर जमीन को आबादी में दिखाकर 25 लाख तक मुआवजा दिलाया गया। वहीं, किसान मुआवजे के लिए परेशान हुए। तत्कालीन अधिकारियों की दहशत में एक्सप्रेस-वे के लिए अपने खेत देने वाले किसानों में अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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सूत्र बताते हैं कि बांगरमऊ के फतेहपुर खालसा में दूसरे जिले के एक पूर्व जनप्रतिनिधि व उनके भाइयों ने एक्सप्रेस-वे बनने से कुछ समय पहले किसानों से जमीन खरीदी और टिनशेड डालकर एक प्रतिष्ठान बना लिया। भूमि अधिग्रहण के समय इसे रिहाइशी क्षेत्र और पक्का निर्माण दिखाकर बीस लाख रुपया प्रति बीघा मुआवजा लिया। इसके अलावा मिट्टी खनन के नाम पर भी खेल हुआ था। ग्राम पंचायत व किसानों की कई एकड़ खेतिहर जमीन की आठ से दस फिट गहरी मिट्टी जबरन खोदवा ली गई थी।
गंजमुरादाबाद क्षेत्र के कई गांवों के किसान मुआवजे के लिए सालों अधिकारियों की चौखट पर दौड़ लगाते रहे। कुछ किसानों को नगरीय क्षेत्र की जमीन का खेतिहर भूमि के अनुसार 16 लाख रुपये प्रति बीघा के अनुसार मुआवजा दिया गया जबकि करीब 25 लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजा बनता था। कई किसानों को जमीन की रजिस्ट्री कराने के सालों बाद मुआवजा तो मिला लेकिन वह भी काफी कम रहा।

जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने बताया कि आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) का कई दिन पूर्व पत्र आया था। इसमें आगरा एक्सप्रेस वे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण का ब्योरा मांगा गया है। पूरा ब्योरा तैयार कराकर रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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