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आठ घंटे ब्लॉक, 15 की स्पीड से निकाली गईं ट्रेनें
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो पर खड़ी स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस।
- फोटो : UNNAO
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संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। नॉन इंटरलॉकिंग प्रणाली का काम पूरा करने के लिए रेलवे बोर्ड की मंजूरी पर शनिवार आठ घंटे ब्लॉक लेकर काम पूरा किया गया। तीन शिफ्ट में ब्लॉक के दौरान स्वर्ण शताब्दी अप व डाउन ट्रेन को प्लेटफार्म पर दो मिनट रोका गया। सुबह 8:30 बजे से शुरू हुए ब्लॉक के दौरान कॉशन पर 15 किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनों को निकाला गया।
नान इंटरलॉकिंग प्रणाली का उन्नाव जंक्शन पर शनिवार को काम पूरा किया गया। सुबह से लखनऊ सहित मंडल के अलग-अलग स्थानों से आए अधिकारियों व कर्मचारियों ने काम शुरू किया। इसके तहत पटरियां बदलने के लिए प्रयोग में लाए जा रहे पुराने सिस्टम को बंद करते हुए नए प्वाइंट पैनल का उपयोग शुरू किया गया। पहले से बिछाई जा चुकी केबिल को प्लेटफार्म नंबर एक पर बने कंट्रोल रूम से कनेक्शन देकर जोड़ा गया। दूर प्वाइंट पर काम करने वाले कर्मचारी वहां केबिल जोड़कर कनेक्शन चेक करते रहे। सुबह 8:30 से 10:30 बजे तक अप लाइन पर और 11:30 से 1:30 बजे तक डाउन लाइन पर काम किया गया। इसके बाद 3:00 से 6:00 बजे तक अप व डाउन दोनों ओर के ट्रैक पर काम पूरा किया गया। इस दौरान दिल्ली से लखनऊ जा रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के 1:35 से 1:37 तक प्लेटफार्म नंबर तीन पर रोकना पड़ा। इसी तरह लखनऊ से दिल्ली जाते समय 4:54 से 4:56 बजे तक प्लेटफार्म नंबर दो पर रोका गया। सहायक स्टेशन मास्टर ने झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। ब्लॉक के दौरान अप व डाउन ट्रैक से 16 ट्रेनों को काशन पर निकाला गया। डीआरएम संजय त्रिपाठी ने बताया कि नान इंटर लॉकिंग का काम पूरा कर लिया गया है। बचा थोड़ा काम रविवार को पूरा कर लिया जाएगा। अब ब्लॉक लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
बनाए गए छह अस्थाई एसएम ऑफिस
नॉनइंटरलॉकिंग कार्य के दौरान ट्रेनों को सकुशल निकालने के लिए मगरवारा स्टेशन की ओर दो व लखनऊ की ओर चार अस्थाई एसएम आफिस बनाए गए। सभी को लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से जोड़ा गया। मंडल के दूसरे स्टेशन से आए रेलवे के परिचालन विभाग के सहायक स्टेशन मास्टरों ने ट्रेनों के संचालन में सहयोग किया।
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वाहन लेकर गुजरी मालगाड़ी
ब्लाक के दौरान लखनऊ की ओर से आई एक मालगाड़ी सभी के कौतुहल का कारण बनी रही। आंध्र प्रदेश जा रही इस मालगाड़ी के प्रत्येक वैगन में लोडर जैसे चार-चार छोटे माल वाहक वाहन लदे थे। लोगों का कहना था कि चुनाव पूर्व किसी योजना का प्रचार-प्रसार के लिए वाहनों की खेप मंगाई गई है। हालांकि वाहनों पर अंग्रेजी या हिंदी की बजाय आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय भाषा में लिखा होने से कोई समझ नहीं पाया।
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उन्नाव। नॉन इंटरलॉकिंग प्रणाली का काम पूरा करने के लिए रेलवे बोर्ड की मंजूरी पर शनिवार आठ घंटे ब्लॉक लेकर काम पूरा किया गया। तीन शिफ्ट में ब्लॉक के दौरान स्वर्ण शताब्दी अप व डाउन ट्रेन को प्लेटफार्म पर दो मिनट रोका गया। सुबह 8:30 बजे से शुरू हुए ब्लॉक के दौरान कॉशन पर 15 किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेनों को निकाला गया।
नान इंटरलॉकिंग प्रणाली का उन्नाव जंक्शन पर शनिवार को काम पूरा किया गया। सुबह से लखनऊ सहित मंडल के अलग-अलग स्थानों से आए अधिकारियों व कर्मचारियों ने काम शुरू किया। इसके तहत पटरियां बदलने के लिए प्रयोग में लाए जा रहे पुराने सिस्टम को बंद करते हुए नए प्वाइंट पैनल का उपयोग शुरू किया गया। पहले से बिछाई जा चुकी केबिल को प्लेटफार्म नंबर एक पर बने कंट्रोल रूम से कनेक्शन देकर जोड़ा गया। दूर प्वाइंट पर काम करने वाले कर्मचारी वहां केबिल जोड़कर कनेक्शन चेक करते रहे। सुबह 8:30 से 10:30 बजे तक अप लाइन पर और 11:30 से 1:30 बजे तक डाउन लाइन पर काम किया गया। इसके बाद 3:00 से 6:00 बजे तक अप व डाउन दोनों ओर के ट्रैक पर काम पूरा किया गया। इस दौरान दिल्ली से लखनऊ जा रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के 1:35 से 1:37 तक प्लेटफार्म नंबर तीन पर रोकना पड़ा। इसी तरह लखनऊ से दिल्ली जाते समय 4:54 से 4:56 बजे तक प्लेटफार्म नंबर दो पर रोका गया। सहायक स्टेशन मास्टर ने झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। ब्लॉक के दौरान अप व डाउन ट्रैक से 16 ट्रेनों को काशन पर निकाला गया। डीआरएम संजय त्रिपाठी ने बताया कि नान इंटर लॉकिंग का काम पूरा कर लिया गया है। बचा थोड़ा काम रविवार को पूरा कर लिया जाएगा। अब ब्लॉक लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
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बनाए गए छह अस्थाई एसएम ऑफिस
नॉनइंटरलॉकिंग कार्य के दौरान ट्रेनों को सकुशल निकालने के लिए मगरवारा स्टेशन की ओर दो व लखनऊ की ओर चार अस्थाई एसएम आफिस बनाए गए। सभी को लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से जोड़ा गया। मंडल के दूसरे स्टेशन से आए रेलवे के परिचालन विभाग के सहायक स्टेशन मास्टरों ने ट्रेनों के संचालन में सहयोग किया।
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वाहन लेकर गुजरी मालगाड़ी
ब्लाक के दौरान लखनऊ की ओर से आई एक मालगाड़ी सभी के कौतुहल का कारण बनी रही। आंध्र प्रदेश जा रही इस मालगाड़ी के प्रत्येक वैगन में लोडर जैसे चार-चार छोटे माल वाहक वाहन लदे थे। लोगों का कहना था कि चुनाव पूर्व किसी योजना का प्रचार-प्रसार के लिए वाहनों की खेप मंगाई गई है। हालांकि वाहनों पर अंग्रेजी या हिंदी की बजाय आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय भाषा में लिखा होने से कोई समझ नहीं पाया।