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पाकिस्तान सेल ने बढ़ाई सक्रियता
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Fri, 28 Apr 2017 12:18 AM IST
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एसपी कार्यालय स्थित पाकिस्तान सेल।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले का आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस कार्यालय की पाकिस्तान सेल भी सक्रिय हो गई है। सेल पता लगा रही है कि कहीं कोई पाकिस्तानी या अन्य विदेशी बिना सूचना दिए जिले में तो नहीं रह रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक 2016 में जिले में 18 पाकिस्तानी आए जबकि अन्य देशों से दो लोग आए। हालांकि यह सभी अपने किसी न किसी परिचित रिश्तेदार के यहां आए थे। विभाजन के समय जिले में गठित की गई पाकिस्तान सेल की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह सेल जिले के सभी तहसील और थाना क्षेत्रों में यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं कोई पाकिस्तानी या अन्य विदेशी अनाधिकृत रूप से जिले में तो नहीं रह रहा है।
पुलिस अधिकारी बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पाकिस्तान सेल के गठन किया गया था। इसका उद्ेश्य यह है कि पाकिस्तान में रह रहा कोई व्यक्ति भारत में रह रहे अपने किसी पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार से मिलने आता है तो उसे 24 घंटे के भीतर जिला स्तर पर बनी पाकिस्तान सेल में खुद पहुंचकर अपने आने की सूचना और कब तक रुकना है इसकी सूचना दर्ज करानी होती है। जबकि अन्य देशों से आने वाले लोगों को कुछ ढील दी गई है।
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विदेशी के बजाए वह व्यक्ति भी दो दिन के भीतर पाकिस्तान सेल में रिश्तेदार के आने की सूचना देने के साथ ही उसका नाम-पता, नागरिकता व अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करानी होती है। अपर पुलिस अधीक्षक आरएस गौतम ने बताया कि पुलिस को तर्ककता बरतने के साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि वह इस बात की भी जानकारी करें कि कहीं कोई बिना सूचना दिए ही तो नहीं रह रह है। उन्होंने बताया कि इसकी गुंजाइश बहुत कम है फिर दिखवाया जा रहा है।
पहले सामने आ चुके हैं यह मामले
20 अप्रैल को जालंधर में एटीएस ने जीशान नाम के युवक को गिरफ्तार किया था वह मूल रूप से आसीवन थानाक्षेत्र के रसूलाबाद कस्बा के मोहल्ला फिरोज नगर का रहने वाला है। पुलिस एटीएस उसके जिले में अन्य कनेक्शन तलाश रही है। पिछले महीने भोपाल में ट्रेन में हुए धमाके में एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में एक आतंकी सैफुल्ला को इनकाउंटर में मार गिराया था। सैफुल्ला व उसके साथी गौस मोहम्मद और फैसल पूर्व में कई बार यहां उन्नाव की अलग-अलग दरगाहों में रुकते थे।
एनआईए (नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी) के एसपी दीपक कुमार व उनकी टीम गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर शहर लाकर तफ्तीश की थी। 2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्ट्री के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 5 फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में टीचर बकर रह रहे बशीर हसन नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।
आंकड़ों के मुताबिक 2016 में जिले में 18 पाकिस्तानी आए जबकि अन्य देशों से दो लोग आए। हालांकि यह सभी अपने किसी न किसी परिचित रिश्तेदार के यहां आए थे। विभाजन के समय जिले में गठित की गई पाकिस्तान सेल की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह सेल जिले के सभी तहसील और थाना क्षेत्रों में यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं कोई पाकिस्तानी या अन्य विदेशी अनाधिकृत रूप से जिले में तो नहीं रह रहा है।
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पुलिस अधिकारी बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पाकिस्तान सेल के गठन किया गया था। इसका उद्ेश्य यह है कि पाकिस्तान में रह रहा कोई व्यक्ति भारत में रह रहे अपने किसी पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार से मिलने आता है तो उसे 24 घंटे के भीतर जिला स्तर पर बनी पाकिस्तान सेल में खुद पहुंचकर अपने आने की सूचना और कब तक रुकना है इसकी सूचना दर्ज करानी होती है। जबकि अन्य देशों से आने वाले लोगों को कुछ ढील दी गई है।
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विदेशी के बजाए वह व्यक्ति भी दो दिन के भीतर पाकिस्तान सेल में रिश्तेदार के आने की सूचना देने के साथ ही उसका नाम-पता, नागरिकता व अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करानी होती है। अपर पुलिस अधीक्षक आरएस गौतम ने बताया कि पुलिस को तर्ककता बरतने के साथ ही निर्देश दिए गए हैं कि वह इस बात की भी जानकारी करें कि कहीं कोई बिना सूचना दिए ही तो नहीं रह रह है। उन्होंने बताया कि इसकी गुंजाइश बहुत कम है फिर दिखवाया जा रहा है।
पहले सामने आ चुके हैं यह मामले
20 अप्रैल को जालंधर में एटीएस ने जीशान नाम के युवक को गिरफ्तार किया था वह मूल रूप से आसीवन थानाक्षेत्र के रसूलाबाद कस्बा के मोहल्ला फिरोज नगर का रहने वाला है। पुलिस एटीएस उसके जिले में अन्य कनेक्शन तलाश रही है। पिछले महीने भोपाल में ट्रेन में हुए धमाके में एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज में एक आतंकी सैफुल्ला को इनकाउंटर में मार गिराया था। सैफुल्ला व उसके साथी गौस मोहम्मद और फैसल पूर्व में कई बार यहां उन्नाव की अलग-अलग दरगाहों में रुकते थे।
एनआईए (नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी) के एसपी दीपक कुमार व उनकी टीम गौस मोहम्मद और फैसल को लेकर शहर लाकर तफ्तीश की थी। 2008 में जौनपुर में विस्फोट की घटना में शामिल नूर आलम ने दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बंद फैक्ट्री के पीछे विस्फोटक छिपाकर रखा था। उन्नाव स्पेशल कोर्ट ने नूर आलम उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 5 फरवरी 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने सात महीने से बांगरऊ के मदारनगर स्थित एक मदरसे में टीचर बकर रह रहे बशीर हसन नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया था।