{"_id":"5ce2f975bdec2207917920bf","slug":"15583789216-unnao-news104","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले प्रेमी, बाद में बेटी को उतारा मौत के घाट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
पहले प्रेमी, बाद में बेटी को उतारा मौत के घाट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्नाव। गंगाघाट थाना क्षेत्र के गांव घोंघी रौतापुर निवासी सतेंद्र और माखी थाना क्षेत्र के गांव पंडितखेड़ा निवासी किशोरी सारिका की हत्या का खुलासा पुलिस ने सोमवार को कर दिया। सत्येंद्र की हत्या सारिका के पिता राकेश ने अपने भांजे के साथ मिलकर की थी।
सत्येंद्र की हत्या के बाद सारिका ने पुलिस को सब कुछ बताने की धमकी दी तो सत्येंद्र की हत्या के छठवें दिन बेटी सारिका को भी मौत के घाट उतार दिया। बेची का शव गंगाघाट थाना क्षेत्र के अतरी गांव के पास जमीन में गाड़ दिया था। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड में हत्यारोपी पिता, मां, भांजे व एक अन्य रिश्तेदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया फावड़ा और सत्येंद्र की बाइक भी बरामद कर ली है।
पुलिस अधीक्षक एमपी वर्मा ने बताया कि गंगाघाट के घोंघी रौतापुर निवासी सत्येंद्र व माखी के पंडितखेड़ा निवासी सारिका (16) के बीच जान पहचान थी। बताया जा रहा है कि सारिका के घर वाले इससे खफा थे। सात मई को सत्येंद्र सारिका से मिलने उसके गांव गया था। वहां सारिका के पिता ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया था। इस दौरान राकेश ने अपने भांजे संजय के साथ मिलकर सत्येंद्र को पीट पीटकर बेदम कर दिया था।
विज्ञापन
इसके बाद घटना को हादसे का रूप देने के लिए मगरवारा में रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। बताते हैं कि ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। आठ मई को सदर कोतवाली पुलिस ने ट्रैक से क्षत विक्षत शव बरामद किया था। पहचान न होने पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। बाद में सारिका की हत्या के बाद 18 मई को सत्येंद्र की शिनाख्त हो सकी थी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सत्येंद्र की हत्या की जानकारी मिलते ही सारिका ने परिजनों को धमकी दी थी कि वह पुलिस को सब बता देगी। इस पर राज खुलने के डर से राकेश बेटी को लेकर कानपुर के नवाबगंज में रहने वाली बहन के घर चला गया था। 12 मई तक उसने उसको वहीं रखा।
इस दौरान उसने बेटी पर दबाव बनाया कि वह अपना इरादा बदल ले। बेटी के अडिग रहने पर वह 13 मई को उसे कानपुर से अतरी गांव लाया। यहां भांजे संजय के साथ मिल उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद फावड़े से उसके सिर पर भी वार किया था। 17 मई को कुत्तों ने शव को नोचकर जमीन से बाहर निकाल लिया था, जिसके बाद घटना से पर्दा उठ सका। पुलिस ने पिता राकेश, उसकी पत्नी रेनू, भांजा संजय व अतरी निवासी दुर्गेश लोध को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अतरी में दुर्गेश के घर छिपाई गई सत्येंद्र की बाइक व उस फावड़े को बरामद किया है, जिससे शव गाड़ने के लिए गड्ढा खोदा गया था।
गंगाघाट थाना क्षेत्र के घोंघी रौतापुर निवासी सत्येंद्र के लापता होने के बाद ही उसके पिता ने बेटे की हत्या की आशंका जताई थी। लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों ने 12 मई को एसपी को प्रार्थना पत्र दिया, तब 13 मई को एसपी के आदेश पर गंगाघाट पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी। इस दौरान सारिका के परिजनों ने राज खुलने के डर से सारिका की भी हत्या कर दी थी। अगर गंगाघाट पुलिस पहले ही सक्रिय हो जाती तो सारिका की जान बच सकती थी।
राकेश ने पूछताछ में बताया कि सात मई की रात उन्होंने भांजे संजय के साथ मिलकर सत्येंद्र को पीटा था, जिससे वह बेदम हो गया था। इसके बाद वह उसे उसकी ही बाइक से लेकर अकरमपुर पहुंचे थे। यहां पहले दोनों ने उसका गला दबाया था। इसके बाद उसे रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। आठ मई को सदर कोतवाली पुलिस ने ट्रैक से क्षत विक्षत शव बरामद किया था। पहचान न होने पर पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराया था।
विज्ञापन
सत्येंद्र की हत्या के बाद सारिका ने पुलिस को सब कुछ बताने की धमकी दी तो सत्येंद्र की हत्या के छठवें दिन बेटी सारिका को भी मौत के घाट उतार दिया। बेची का शव गंगाघाट थाना क्षेत्र के अतरी गांव के पास जमीन में गाड़ दिया था। पुलिस ने इस दोहरे हत्याकांड में हत्यारोपी पिता, मां, भांजे व एक अन्य रिश्तेदार को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया फावड़ा और सत्येंद्र की बाइक भी बरामद कर ली है।
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक एमपी वर्मा ने बताया कि गंगाघाट के घोंघी रौतापुर निवासी सत्येंद्र व माखी के पंडितखेड़ा निवासी सारिका (16) के बीच जान पहचान थी। बताया जा रहा है कि सारिका के घर वाले इससे खफा थे। सात मई को सत्येंद्र सारिका से मिलने उसके गांव गया था। वहां सारिका के पिता ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया था। इस दौरान राकेश ने अपने भांजे संजय के साथ मिलकर सत्येंद्र को पीट पीटकर बेदम कर दिया था।
विज्ञापन
इसके बाद घटना को हादसे का रूप देने के लिए मगरवारा में रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। बताते हैं कि ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। आठ मई को सदर कोतवाली पुलिस ने ट्रैक से क्षत विक्षत शव बरामद किया था। पहचान न होने पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। बाद में सारिका की हत्या के बाद 18 मई को सत्येंद्र की शिनाख्त हो सकी थी।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सत्येंद्र की हत्या की जानकारी मिलते ही सारिका ने परिजनों को धमकी दी थी कि वह पुलिस को सब बता देगी। इस पर राज खुलने के डर से राकेश बेटी को लेकर कानपुर के नवाबगंज में रहने वाली बहन के घर चला गया था। 12 मई तक उसने उसको वहीं रखा।
इस दौरान उसने बेटी पर दबाव बनाया कि वह अपना इरादा बदल ले। बेटी के अडिग रहने पर वह 13 मई को उसे कानपुर से अतरी गांव लाया। यहां भांजे संजय के साथ मिल उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद फावड़े से उसके सिर पर भी वार किया था। 17 मई को कुत्तों ने शव को नोचकर जमीन से बाहर निकाल लिया था, जिसके बाद घटना से पर्दा उठ सका। पुलिस ने पिता राकेश, उसकी पत्नी रेनू, भांजा संजय व अतरी निवासी दुर्गेश लोध को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अतरी में दुर्गेश के घर छिपाई गई सत्येंद्र की बाइक व उस फावड़े को बरामद किया है, जिससे शव गाड़ने के लिए गड्ढा खोदा गया था।
गंगाघाट थाना क्षेत्र के घोंघी रौतापुर निवासी सत्येंद्र के लापता होने के बाद ही उसके पिता ने बेटे की हत्या की आशंका जताई थी। लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों ने 12 मई को एसपी को प्रार्थना पत्र दिया, तब 13 मई को एसपी के आदेश पर गंगाघाट पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी। इस दौरान सारिका के परिजनों ने राज खुलने के डर से सारिका की भी हत्या कर दी थी। अगर गंगाघाट पुलिस पहले ही सक्रिय हो जाती तो सारिका की जान बच सकती थी।
राकेश ने पूछताछ में बताया कि सात मई की रात उन्होंने भांजे संजय के साथ मिलकर सत्येंद्र को पीटा था, जिससे वह बेदम हो गया था। इसके बाद वह उसे उसकी ही बाइक से लेकर अकरमपुर पहुंचे थे। यहां पहले दोनों ने उसका गला दबाया था। इसके बाद उसे रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था। ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। आठ मई को सदर कोतवाली पुलिस ने ट्रैक से क्षत विक्षत शव बरामद किया था। पहचान न होने पर पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराया था।