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प्रदूषण फैलाने पर दो हड्डी मिलों पर 2.80 करोड़ जुर्माना
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उन्नाव। दस दिन पहले हुई जांच में अनियमितताएं मिलने और प्रदूषण फैलाने में बंद कराई गईं दो बोन यूनिटों (हड्डी मिल) पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2.80 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। इन दोनों के पास फैक्टरी चलाने की कोई अनुमति नहीं थी। वहीं दो कारखानों में गंदगी मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि फैक्टरी को नोटिस और कार्रवाई की सूचना मुख्यालय भेज दी गई है।
प्रदूषण और दुर्गंध की शिकायतों पर 17 नवंबर को डीएम रवींद्र कुमार के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट विजेता की अगुवाई में जांच टीम बनाकर दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में फैक्टरियों की जांच कराई थी। साइट दो स्थित मैसर्स यश जिलेटिन एंड बोन मिल और भारत बोन कशिंग कंपनी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली थीं। जानवरों की हड्डियां खुले में रखी गई थीं। इनसे दुर्गंध फैल रही थी। यहां मानकों का पालन होते न पाए जाने पर डीएम के आदेश पर बंद करा दिया गया था। जांच में भारत बोन के पास दिसंबर 2019 तक की अनुमति होने से बिना अनुमति कुल 548 दिन संचालन पाए जाने पर 54 लाख 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
वहीं मैसर्स यश जिलेटिन एंड बोन मिल के संचालक कोई अनुमति पत्र नहीं दिखा पाए। पांच साल के कुल 1498 दिन (कार्य दिवस) के सापेक्ष एक करोड़ 49 लाख 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं दो बोन यूनिट के पास अनुमति तो मिली लेकिन गंदगी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि जुर्माना तय करते हुए संस्तुति पत्र उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दिया है। जल्द ही जुर्माना वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदूषण और दुर्गंध की शिकायतों पर 17 नवंबर को डीएम रवींद्र कुमार के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट विजेता की अगुवाई में जांच टीम बनाकर दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में फैक्टरियों की जांच कराई थी। साइट दो स्थित मैसर्स यश जिलेटिन एंड बोन मिल और भारत बोन कशिंग कंपनी में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली थीं। जानवरों की हड्डियां खुले में रखी गई थीं। इनसे दुर्गंध फैल रही थी। यहां मानकों का पालन होते न पाए जाने पर डीएम के आदेश पर बंद करा दिया गया था। जांच में भारत बोन के पास दिसंबर 2019 तक की अनुमति होने से बिना अनुमति कुल 548 दिन संचालन पाए जाने पर 54 लाख 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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वहीं मैसर्स यश जिलेटिन एंड बोन मिल के संचालक कोई अनुमति पत्र नहीं दिखा पाए। पांच साल के कुल 1498 दिन (कार्य दिवस) के सापेक्ष एक करोड़ 49 लाख 80 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं दो बोन यूनिट के पास अनुमति तो मिली लेकिन गंदगी पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि जुर्माना तय करते हुए संस्तुति पत्र उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दिया है। जल्द ही जुर्माना वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
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