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हसनगंज के संघ प्रचारक रहे थे अटल बिहारी वाजपेयी
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नवाबगंज(उन्नाव)। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का जिले से गहरा लगाव रहा। 1966 में वह कानपुर में शिक्षा के साथ संघ से भी जुड़े और हसनगंज तहसील में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रचारक भी रहे थे। इसके बाद वह लखनऊ से कानपुर आने-जाने के दौरान अक्सर यहां रुकते और पुराने मित्रों से मिलते थे। शुक्रवार को जयंती पर फिर लोगों के बीच अटल बिहारी वाजपेयी की यादें ताजा हो गईं।
स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व का हर कोई कायल था। हसनगंज तहसील में 1966 में संघ प्रचारक के तौर पर उन्होंने नवाबगंज के सरस्वती शिशु मंदिर में प्रवास किया था। इस दौरान कई लोग उनके करीब आए। संघ की शाखा से शुरू हुई दोस्ती को अटल जी ने जीवन भर निभाया। वह जब भी सड़क मार्ग से कानपुर जाते थे तो जिले में रुक कर अपने करीबी मित्रों से भेंट जरूर करते थे। नवाबगंज के गोविंद द्विवेदी, सूरजमल गुप्ता, रामभजन गुप्ता, संगमलाल स्वर्णकार और गया प्रसाद गुप्ता संघ की शाखा के दौरान अटल जी के करीब आए थे। अब इन सभी का निधन हो चुका है। इनसे जुड़े लोग गुरुवार को अटल जी की दोस्ती के किस्से सुनाते रहे।
कहा था जरूरत पर याद करिएगा
गोविंद द्विवेदी की पत्नी सुशीला द्विवेदी बताती हैं कि 1997 में अटल जी अचलगंज के पड़री में एक विद्यालय का शिलान्यास करने आए थे। इस दौरान अटल जी ने उन्हें संदेश देकर पड़री बुलाया था। चंद मिनटों की मुलाकात में उन्होंने हाल चाल पूछा और कहा था कि जब भी जरूरत पड़े वह उन्हें याद कर सकती हैं।
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अटल जी के लिए बनाई थी करैल
सुशीला द्विवेदी बताती हैं कि अटल जी को मूंग की दाल के व्यंजन बहुत पसंद थे। वह जब यहां आते थे तो वह अक्सर उनसे करैल (कोफ्ता) बनाकर खिलाने को कहते थे। अटल जी को मूंग के लड्डू भी बहुत पसंद थे।
स्कूल में खेलते थे कबड्डी
विवेक कुमार बताते हैं कि पिता राजकुमार गुप्ता अटल जी के साथ बिताए पलों के संस्मरण अक्सर सुनाते थे। वह बताते थे कि जब अटल जी ने नवाबगंज में प्रवास के दौरान संघ की शाखा के बाद वह अपने मित्रों के साथ सरस्वती शिशु मंदिर में कबड्डी खेला करते थे। यहां वह मित्रों के साथ काव्य पाठ भी करते थे। कविताएं लिखना और सुनाना उन्हें पसंद था।
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स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व का हर कोई कायल था। हसनगंज तहसील में 1966 में संघ प्रचारक के तौर पर उन्होंने नवाबगंज के सरस्वती शिशु मंदिर में प्रवास किया था। इस दौरान कई लोग उनके करीब आए। संघ की शाखा से शुरू हुई दोस्ती को अटल जी ने जीवन भर निभाया। वह जब भी सड़क मार्ग से कानपुर जाते थे तो जिले में रुक कर अपने करीबी मित्रों से भेंट जरूर करते थे। नवाबगंज के गोविंद द्विवेदी, सूरजमल गुप्ता, रामभजन गुप्ता, संगमलाल स्वर्णकार और गया प्रसाद गुप्ता संघ की शाखा के दौरान अटल जी के करीब आए थे। अब इन सभी का निधन हो चुका है। इनसे जुड़े लोग गुरुवार को अटल जी की दोस्ती के किस्से सुनाते रहे।
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कहा था जरूरत पर याद करिएगा
गोविंद द्विवेदी की पत्नी सुशीला द्विवेदी बताती हैं कि 1997 में अटल जी अचलगंज के पड़री में एक विद्यालय का शिलान्यास करने आए थे। इस दौरान अटल जी ने उन्हें संदेश देकर पड़री बुलाया था। चंद मिनटों की मुलाकात में उन्होंने हाल चाल पूछा और कहा था कि जब भी जरूरत पड़े वह उन्हें याद कर सकती हैं।
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अटल जी के लिए बनाई थी करैल
सुशीला द्विवेदी बताती हैं कि अटल जी को मूंग की दाल के व्यंजन बहुत पसंद थे। वह जब यहां आते थे तो वह अक्सर उनसे करैल (कोफ्ता) बनाकर खिलाने को कहते थे। अटल जी को मूंग के लड्डू भी बहुत पसंद थे।
स्कूल में खेलते थे कबड्डी
विवेक कुमार बताते हैं कि पिता राजकुमार गुप्ता अटल जी के साथ बिताए पलों के संस्मरण अक्सर सुनाते थे। वह बताते थे कि जब अटल जी ने नवाबगंज में प्रवास के दौरान संघ की शाखा के बाद वह अपने मित्रों के साथ सरस्वती शिशु मंदिर में कबड्डी खेला करते थे। यहां वह मित्रों के साथ काव्य पाठ भी करते थे। कविताएं लिखना और सुनाना उन्हें पसंद था।