भ्रूण हत्या रोकने व बेटियों को सम्मान देने का दिया संदेश

Unnao Updated Fri, 24 Jan 2014 05:48 AM IST
उन्नाव। हां भइया, अपने बेटे ने पिटाई की तब आंख खुल गई है। कुल-खानदान चलाने के लिए हमेशा बेटा-बेटा जपता रहा। अब वही बेटा पीट रहा है। यदि बेटी होती तो यह शर्मनाक दिन नहीं देखने पड़ता। अब बात आ गई समझ में कि बेटी होती तो यह दिन नहीं देखने पड़ते। पिता के करुण क्रंदन से लोगों की आंखें नम हो गईं। ‘अमर उजाला’ के ‘बेटी ही बचाएगी’ आंदोलन के अंतर्गत नुक्कड़ कलाकारों ने जब बेटों की करतूत और बेटियों की माता-पिता व समाज के प्रति सम्मान की भावनाओं को उभारा तो लोग भावुक हो गए। लोगों ने माना बेटियां जितना परिवार के बारे में सोचती हैं उतना शायद बेटे नहीं सोचते हैं। चकलवंशी। गुरुवार को चकलवंशी में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को बेटा और बेटी में भेदभाव न रखने की सीख दी गई। नुक्कड़ नाटक में शामिल कलाकारों ने समाज में बेटा- बेटी में किए जा रहे भेदभाव को नाटक के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचाया। नाटक में दिखाया गया कैसे गर्भ में बेटियों की पहचान होते ही उनकी हत्या कर दी जाती है। इस पाप में मां- बाप शामिल होते हैं। वहीं अगर बेटी जन्म लेती है तो उसका शोषण शुरू कर दिया जाता है। जन्म के बाद बेटी दहेज की बलि चढ़ जाती है। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समाज की दोहरी मानसिकता पर प्रहार किया गया। सफीपुर। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया बुढ़ापे का सहारा सिर्फ बेटा ही नहीं बल्कि बेटी भी बन सकती हैं। बस जरूरत है हमें अपनी मानसिकता को बदलने की। नुक्कड़ नाटक में दिखाया गया कैसे जवान बेटा बूढ़े पिता को पीटता है। वह भी सिर्फ इस वजह से कि पिता घर में रहकर कोई काम नहीं करता और मुफ्त की रोटियां तोड़ता है। बेटे की हरकत से पिता को गहरा सदमा लगता है। बेटे की पिटाई के बाद उसे समझ में आता है बेटा ही सब कुछ नहीं होता। बेटों से कहीं अच्छी बेटियां होती है। बेटे से तिरस्कृत होने पर बूढ़े पिता को समझ में आता है बेटा ही सब कुछ नहीं होता। जो काम बेटा कर सकता है वह बेटी भी कर सकती है। मियागंज। बीडीएस इंटर कालेज में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुति से संदेश दिया गया बेटियों से ही सभ्य समाज की नींव पड़ती है। अगर बेटियां नहीं होंगी तो न बहन होगी न पत्नी, न समाज और देश भी नहीं होगा। नुक्कड़ नाटक कलाकारों देवदत्त बुधौलिया, शरद नामदेव, मुबीन आरिफ, ब्रह्मदीन बंधु, सुरेश चंद्र आर्य और वीरेंद्र भदौरिया ने प्रभावी अभिनय से लोगों को बेटियों पर बढ़ रहे अत्याचार के खिलाफ उठ खड़े होने का जज्बा दे दिया। रंगकर्मियों ने बेटियों के साथ हो रही घटनाओं से छात्र-छात्राओं को अवगत कराया। छात्र-छात्राओं को बताया गया गर्भ में ही बेटा-बेटी की पहचान की जा रही है। गर्भ में अगर बेटी होती है तो उसे जन्म लेने का मौका नहीं दिया जाता। बेटी के जन्म के बाद उसका शोषण किया जाता है। इस दौरान घनश्याम सिंह, रामकिशन, चंद्रसेन, अजय दीक्षित, गंगा प्रसाद, रवींद्र किशोर, योगेश साहू, रीना, पूर्व प्रधान आफाक अंसारी, राजू, प्रधान पति अन्नू, हसरत अली, अच्छन आदि मौजूद रहे।
पुरवा। भाजपा के एमएलसी हृदयनारायण दीक्षित ने कहा बिेटियां पूज्यनीय हैं। देवी का स्वरूप है। प्राचीनकाल से ही बेटियों के सम्मान की परम्परा है। उन्हे आगे बढ़ाना सभी का उत्तरदायित्व है।
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुनील सिंह यादव ने कहा बेटियों को बचाना, उन्हें पढ़ा-लिखाकर आगे बढ़ाना समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने कहा ‘अमर उजाला’ के इअभियान में पूरे राष्ट्र को जुड़ जाना चाहिए। शिक्षिका रजनी मिश्रा, शहनाज बेगम, आरती, सुनीता, दीप्ती, सुषमा और पूनम ने कहा बेटियों को शिक्षित करना आवश्यक है। खंड शिक्षाधिकारी आरती गुप्ता, शिक्षिका नीलम सिंह, खंड शिक्षाधिकारी उपेंद्र त्रिपाठी, मनोज पटेल सहित छात्रा सोनम, मोनम, जूली, शिखा और नाबिरा ने बेटियों को बचाने का संकल्प लिया। एसडीएम हरीलाल यादव ने कहा ‘अमर उजाला’ यह अभियान स्वागत योग्य है।

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