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25000 मनरेगा मजदूरों की ‘संकट’ में होली
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उन्नाव। जिले के 25 हजार मनरेगा मजदूरों की होली पर आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हजारों मस्टररोलों की एमआईएस फीडिंग न होने से करोड़ों का भुगतान लटका है। जॉबकार्डधारक परेशान हैं, ब्लॉक कार्यालय से लेकर बैंकों तक के चक्कर काट रहे हैं।
विकासखंड सुमेरपुर की ग्रामसभा गौरा के मजरे दर्शनखेड़ा निवासी बुद्धू पुत्र सूरज लोध ने जिलाधिकारी को दिए शिकायतीपत्र में बताया कि उनके लंबे समय से मजदूरी नहीं मिली है। होली का त्योहार सिर पर है। मजदूरी न मिलने से होली बेरंग हो जाएगी। जानकारों की मानें तो मनरेगा जॉबकार्डधारकों को मजदूरी का भुगतान स्टेट लेवल बैंक से सीधे उनके खातों में पैसा पहुंचाया जा रहा है लेकिन इसमें भी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मनमानी करने से नहीं चूक रहे हैं।
ईएफएमएस प्रणाली में नियम यह है कि रोजगार सेवक व सचिव (वीडीओ) मजदूरों का साप्ताहिक मस्टररोल विकासखंड कार्यालय में लेखाकार के पास उपलब्ध कराएंगे। लेखाकार मस्टररोल में दर्शाए गए मजदूरों की उपस्थिति व दिए जाने वाले भुगतान का मिलानकर बीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर से मजदूर के बैंक खाते में धनराशि हस्तांतरित करेगा। लेकिन कई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मस्टररोल तो भर देते हैं लेकिन उनकी एमआईएस फीडिंग नहीं करा रहे हैं। यह मस्टररोल भरकर वह अपने पास ही रखे रहते हैं जिससे एमआईएस फीडिंग नहीं हो पाती है। जिले के 16 ब्लाकखंडों की ग्राम पंचायतों का यही हाल है। हजारों मस्टररोल भरे जा चुके हैं लेकिन इनकी एमआईएस फीडिंग नहीं हो पाई है। उधर फीडिंग न होेने से पैसा नहीं मिल पा रहा है। लगभग 25000 मनरेगा मजदूरों का लगभग 70 लाख रुपये का भुगतान फंसा हुआ है। होली को चार दिन का समय शेष है इसके चलते जॉबकार्डधारक मजदूरी के लिए ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के चक्कर लगा रहे हैं। मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार झा ने भी माना कि 70.31 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है। एक-दो दिन में भुगतान करा दिया जाएगा।
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-जॉबकार्डधारकों का करीब 70 लाख रुपये मजदूरी का फंसा
-काम करने के बाद भी पैसा न मिलने से परेशान हैं मनरेगा श्रमिक
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विकासखंड सुमेरपुर की ग्रामसभा गौरा के मजरे दर्शनखेड़ा निवासी बुद्धू पुत्र सूरज लोध ने जिलाधिकारी को दिए शिकायतीपत्र में बताया कि उनके लंबे समय से मजदूरी नहीं मिली है। होली का त्योहार सिर पर है। मजदूरी न मिलने से होली बेरंग हो जाएगी। जानकारों की मानें तो मनरेगा जॉबकार्डधारकों को मजदूरी का भुगतान स्टेट लेवल बैंक से सीधे उनके खातों में पैसा पहुंचाया जा रहा है लेकिन इसमें भी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मनमानी करने से नहीं चूक रहे हैं।
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ईएफएमएस प्रणाली में नियम यह है कि रोजगार सेवक व सचिव (वीडीओ) मजदूरों का साप्ताहिक मस्टररोल विकासखंड कार्यालय में लेखाकार के पास उपलब्ध कराएंगे। लेखाकार मस्टररोल में दर्शाए गए मजदूरों की उपस्थिति व दिए जाने वाले भुगतान का मिलानकर बीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर से मजदूर के बैंक खाते में धनराशि हस्तांतरित करेगा। लेकिन कई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मस्टररोल तो भर देते हैं लेकिन उनकी एमआईएस फीडिंग नहीं करा रहे हैं। यह मस्टररोल भरकर वह अपने पास ही रखे रहते हैं जिससे एमआईएस फीडिंग नहीं हो पाती है। जिले के 16 ब्लाकखंडों की ग्राम पंचायतों का यही हाल है। हजारों मस्टररोल भरे जा चुके हैं लेकिन इनकी एमआईएस फीडिंग नहीं हो पाई है। उधर फीडिंग न होेने से पैसा नहीं मिल पा रहा है। लगभग 25000 मनरेगा मजदूरों का लगभग 70 लाख रुपये का भुगतान फंसा हुआ है। होली को चार दिन का समय शेष है इसके चलते जॉबकार्डधारक मजदूरी के लिए ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के चक्कर लगा रहे हैं। मनरेगा उपायुक्त राजेश कुमार झा ने भी माना कि 70.31 करोड़ रुपये का भुगतान अभी लंबित है। एक-दो दिन में भुगतान करा दिया जाएगा।
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-जॉबकार्डधारकों का करीब 70 लाख रुपये मजदूरी का फंसा
-काम करने के बाद भी पैसा न मिलने से परेशान हैं मनरेगा श्रमिक