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झेलते-झेलते दंश आतंक का, टूट सीमा गई यह समझ लीजिए
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बीघापुर। मां मनसा देवी बैसवारा साहित्य परिषद द्वारा मगरायर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ जयकृष्ण पांडेय की वाणी वंदना से हुआ। जयकृष्ण पांडे ने झेलते झेलते दंश आतंक का, टूट सीमा गई यह समझ लीजिए।
देखते देखते दृश्य शमशान के, फ ूट ज्वाला पड़ी यह समझ लीजिए पंक्तियों से आतंकवाद पर प्रहार किया। कवि सनी पटेल ने पढ़ा पा करके थोड़ा मान हद से भूल जाएं हम, हैवानियत के झूलों में ही झूल जाएं हम। पुरखों का भी सम्मान करना भूल जाएं हम।
मगरायर निवासी गंगा प्रसाद यादव नेे अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा कि सिंहनाद हो उठा फि र से फि र से रण का न्योता, देशद्रोहियों से डरना क्या, इनसे क्या समझौता, नहीं चाहिए शांति वार्ता, नहीं प्रेम की बोली, गोली का उत्तर हम समझे एक मात्र है गोली। कवि संजीव तिवारी पिंटू, कमलेश प्रजापति, मृत्युंजय पांडे, वासुदेव अवस्थी, राम कुमार कुमुदेश, राजन दीक्षित, सुरेश अवस्थी आदि ने भी अपनी रचनाएं पढ़ी।
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वहीं ग्राम पाटन में युग प्रवर्तक संस्था द्वारा आयोजित विराट कवि सम्मेलन का शुभारंभ चंद्रकांत बाजपेई व डा. देवीसहाय त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प माला चढ़ाकर किया। कविगण राम कुमार शुक्ला, कुमारी संध्या सिंह, रेखा पांडेय, दिनेश मिश्र बैसवारी, उमेशचंद्र मिश्र, चंद्रकांत बाजपेई आदि ने सामयिक रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। प्रशांत त्रिवेदी, प्रशांत मिश्रा, वीरेंद्र गुप्ता, तन्नू गुप्ता, हीरालाल मिश्र, नवीन कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।
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देखते देखते दृश्य शमशान के, फ ूट ज्वाला पड़ी यह समझ लीजिए पंक्तियों से आतंकवाद पर प्रहार किया। कवि सनी पटेल ने पढ़ा पा करके थोड़ा मान हद से भूल जाएं हम, हैवानियत के झूलों में ही झूल जाएं हम। पुरखों का भी सम्मान करना भूल जाएं हम।
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मगरायर निवासी गंगा प्रसाद यादव नेे अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए पढ़ा कि सिंहनाद हो उठा फि र से फि र से रण का न्योता, देशद्रोहियों से डरना क्या, इनसे क्या समझौता, नहीं चाहिए शांति वार्ता, नहीं प्रेम की बोली, गोली का उत्तर हम समझे एक मात्र है गोली। कवि संजीव तिवारी पिंटू, कमलेश प्रजापति, मृत्युंजय पांडे, वासुदेव अवस्थी, राम कुमार कुमुदेश, राजन दीक्षित, सुरेश अवस्थी आदि ने भी अपनी रचनाएं पढ़ी।
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वहीं ग्राम पाटन में युग प्रवर्तक संस्था द्वारा आयोजित विराट कवि सम्मेलन का शुभारंभ चंद्रकांत बाजपेई व डा. देवीसहाय त्रिपाठी ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प माला चढ़ाकर किया। कविगण राम कुमार शुक्ला, कुमारी संध्या सिंह, रेखा पांडेय, दिनेश मिश्र बैसवारी, उमेशचंद्र मिश्र, चंद्रकांत बाजपेई आदि ने सामयिक रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। प्रशांत त्रिवेदी, प्रशांत मिश्रा, वीरेंद्र गुप्ता, तन्नू गुप्ता, हीरालाल मिश्र, नवीन कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।