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पीसीएफ केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले किसानों का 33 लाख बकाया
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उन्नाव। पीसीएफ केंद्रों पर गेहूं बेचने वाले सैकड़ों किसान अब भुगतान के लिए रोजाना चक्कर लगा रहे हैं। एजेंसी को अभी किसानों का 33 लाख रुपये का भुगतान करना है। यह स्थिति तब है जब सरकार किसानों को 48 घंटे में भुगतान करने के दावे कर रही है।
जिले में 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरु हुई थी। जिला प्रशासन ने खरीद के लिए आठ एजेंसियों को नामित किया था। इसमें मार्केटिंग, पीसीएफ, एसएफसी, यूपी एग्रो, यूपीएसएस, कर्मचारी कल्याण निगम, नैफेड व एफसीआई शामिल हैं। खरीद के लिए जिले में 91 केंद्र खोले गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 60 केंद्र पीसीएफ एजेंसी ने खोले हैं। एजेंसी को 32500 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया गया है।
इसके सापेक्ष लगभग 20 हजार एमटी से अधिक की खरीद की जा चुकी है। एजेंसी का दावा है कि 5 हजार से अधिक किसानों से खरीद की गई है। अधिकांश को भुगतान किया जा चुका है। इस दावे के विपरीत 17 जून को एजेंसी की फीडिंग रिपोर्ट में 33 लाख का बकाया बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सैकड़ों किसानों का भुगतान अभी लंबित है। पहले अन्नदाता अपनी उपज बेचने के लिए दौड़ लगाते रहे और अब पैसा पाने के लिए केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं। जिले में पीसीएफ ही एकमात्र ऐसी एजेंसी है जिसका भुगतान बकाया है। जबकि अन्य 7 एजेंसियाें का किसानों को कोई भी पैसा देय नहीं है।
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48 घंटे में खाता में पैसा पहुंचाने का है आदेश
गेहूं खरीद के मानकों के तहत एजेंसी को किसान की उपज खरीदने के 48 घंटे में उसकी खरीद का पैसा खाते में भेजना अनिवार्य है। जिले के किसानों को दो से तीन दिन बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है। भुगतान में देरी और क्रय केंद्रों पर झंझटों के कारण ही किसानों ने सरकारी खरीद से दूरी बना ली है। परिणामस्वरूप जिले में खरीद काफी लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। शासन ने भले ही खरीद की समय सीमा बढ़ाकर 25 जून कर दी हो लेकिन जानकार लक्ष्य की शत-प्रतिशत खरीद न होने की आशंका जता रहे हैं।
किसानों के खातों में पहुंचाया जा रहा है पैसा
पीसीएफ का कुछ पैसा लंबित जर है लेकिन किसानों को भुगतान किया जा रहा है। जो भुगतान रूका है उसे भी एक-दो दिन में करा दिया जाएगा। किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।
राजीव कुलश्रेष्ठ, जिला खाद्य विपणन अधिकारी उन्नाव।
- गेहूं बेचने के बाद भुगतान को चक्कर लगा रहे किसान
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जिले में 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरु हुई थी। जिला प्रशासन ने खरीद के लिए आठ एजेंसियों को नामित किया था। इसमें मार्केटिंग, पीसीएफ, एसएफसी, यूपी एग्रो, यूपीएसएस, कर्मचारी कल्याण निगम, नैफेड व एफसीआई शामिल हैं। खरीद के लिए जिले में 91 केंद्र खोले गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा 60 केंद्र पीसीएफ एजेंसी ने खोले हैं। एजेंसी को 32500 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया गया है।
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इसके सापेक्ष लगभग 20 हजार एमटी से अधिक की खरीद की जा चुकी है। एजेंसी का दावा है कि 5 हजार से अधिक किसानों से खरीद की गई है। अधिकांश को भुगतान किया जा चुका है। इस दावे के विपरीत 17 जून को एजेंसी की फीडिंग रिपोर्ट में 33 लाख का बकाया बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सैकड़ों किसानों का भुगतान अभी लंबित है। पहले अन्नदाता अपनी उपज बेचने के लिए दौड़ लगाते रहे और अब पैसा पाने के लिए केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं। जिले में पीसीएफ ही एकमात्र ऐसी एजेंसी है जिसका भुगतान बकाया है। जबकि अन्य 7 एजेंसियाें का किसानों को कोई भी पैसा देय नहीं है।
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48 घंटे में खाता में पैसा पहुंचाने का है आदेश
गेहूं खरीद के मानकों के तहत एजेंसी को किसान की उपज खरीदने के 48 घंटे में उसकी खरीद का पैसा खाते में भेजना अनिवार्य है। जिले के किसानों को दो से तीन दिन बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है। भुगतान में देरी और क्रय केंद्रों पर झंझटों के कारण ही किसानों ने सरकारी खरीद से दूरी बना ली है। परिणामस्वरूप जिले में खरीद काफी लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। शासन ने भले ही खरीद की समय सीमा बढ़ाकर 25 जून कर दी हो लेकिन जानकार लक्ष्य की शत-प्रतिशत खरीद न होने की आशंका जता रहे हैं।
किसानों के खातों में पहुंचाया जा रहा है पैसा
पीसीएफ का कुछ पैसा लंबित जर है लेकिन किसानों को भुगतान किया जा रहा है। जो भुगतान रूका है उसे भी एक-दो दिन में करा दिया जाएगा। किसानों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।
राजीव कुलश्रेष्ठ, जिला खाद्य विपणन अधिकारी उन्नाव।
- गेहूं बेचने के बाद भुगतान को चक्कर लगा रहे किसान