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सर्पदंश के शिकार 50 लोगों में सिर्फ आठ का कराया पोस्टमार्टम
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सुल्तानपुर। जिले में छह माह के दौरान करीब 50 लोगों की सर्पदंश से मौत हुई है। इनमें से मात्र आठ लोगों के शवों को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचाया। पोस्टमॉर्टम में भी मौत का कारण स्पष्ट न होने पर संबंधित शवों का विसरा सुरक्षित रखा गया है।
मृतक के परिवारीजनों को तब तक सरकारी मदद नहीं मिल सकेगी जब तक विसरा की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से आ नहीं आ जाती। ऐसे में असमय मौत के गाल में समाने वाले लोगों के परिवारीजनों के लिए सरकारी सहायता दूर की कौड़ी साबित हो रही है। अभी तक किसी को सरकारी इमदाद नहीं मिल सकी है।
छह माह के दौरान सर्पदंश से जान गंवाने वाले करीब 50 लोगों में अधिकांश के शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया और उनकी अंत्येष्टि कर दी। सरकारी आकड़ों के अनुसार जिले में आठ लोगों की सर्पदंश से मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है।
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पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर सभी आठ लोगों का विसरा सुरक्षित रखा गया है। विसरा को विधि विज्ञान प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाना है। जब तक पुलिस विसरा की जांच नहीं कराती। न मौत का कारण पता चलेगा और न ही मृतक के परिवारीजनों को कोई सरकारी सहायता ही मिलेगी।
दोस्तपुर थाना क्षेत्र के दुर्गा खालिसपुर गांव निवासी विकास (35) को पखवारे भर पूर्व सांप ने डस लिया था। परिवारीजन विकास को लेकर सीएचसी पहुंचे थे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। परिवारीजनों के अनुसार सीएचसी पर तैनात चिकित्सक ने पोस्टमॉर्टम कराने के लिए नहीं कहा, इसलिए शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मोतिगरपुर क्षेत्र के मीरपुर सरैया निवासी अनिल नागर के 12 वर्षीय पुत्र सनी और आठ वर्षीय पुत्री सलोनी को शनिवार की रात चारपाई पर सोते समय सांप ने डस लिया। जानकारी होने पर परिवारीजन दोनों को लेकर जिला अस्पताल गए थे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
बेटी सलोनी को अनिल सुल्तानपुर शहर के एक हॉस्पिटल में भर्ती करने के बाद बेटे सनी को मेडिकल कॉलेज लखनऊ ले जा रहे थे कि जगदीशपुर के पास उसकी मौत हो गई। परिवारीजन उसे लेकर वापस सुल्तानपुर चले आए।
जानकारी न होने की वजह से बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया। मंगलवार की सुबह करीब सात बजे सलोनी की भी हॉस्पिटल में मौत हो गई। परिवारीजनों की सूचना पर पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है।
दहशत व झाड़-फूंक से होती हैं 90 फीसदी मौतें
सुल्तानपुर। पर्यावरणविद प्रकाश विजय बताते हैं कि करैत, कोबरा, रसेल वाईपर और स्केल्ड वाईपर मुख्य जहरीले सांप है । सर्पदंश से 90 फीसदी मौतें झाड़-फूंक व दहशत से हो जाती है। ग्रामीण रात में टॉर्च या पर्याप्त रोशनी के साथ ही बाहर जाएं। ऐसा जूता पहनें जो पैर को ऊपर तक अच्छी तरह ढक सके, साथ में एक डंडा और गमछा भी रखें।
अगर किसी की अचानक सांप से भेंट हो जाए तो वह अपना गमछा या कोई भी कपड़ा तुरंत निकालकर उस पर फेंक दें। सांप आदतन उसी में उलझ जाएगा। सर्पदंश की स्थित में काटने वाली जगह को पानी से कपड़ा धोने वाले साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। फिर रुमाल, गमछा से जहां काटने का निशान हो उसके ऊपर के एक हड्डी वाले भाग यानी पैर में काटा है तो जांघ में और हाथ में काटा है तो कुहनी के ऊपर बांध दें। पुकार कर किसी को बुलाएं या धीरे-धीरे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाएं।
जहरीले सांप के काटने पर सीरिंज से निकालें खून : सीएमओ
सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी बताते हैं कि कोबरा के डसने पर कटा हुआ स्थान 15 मिनट के अंदर सूजने लगता है। यह कोबरा के डसने का लक्षण है। ध्यान से देखें तो दो मोटी सुई के धंसने से बने निशान जैसे विषदंत के स्थान पर दिखेगा। प्राथमिक उपचार में नई सीरिंज से सांप के डसने के निशान पर लगा कर खींच-खींच कर खून निकालें। विष का असर केवल खून में जाने पर ही होता है।
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मृतक के परिवारीजनों को तब तक सरकारी मदद नहीं मिल सकेगी जब तक विसरा की जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से आ नहीं आ जाती। ऐसे में असमय मौत के गाल में समाने वाले लोगों के परिवारीजनों के लिए सरकारी सहायता दूर की कौड़ी साबित हो रही है। अभी तक किसी को सरकारी इमदाद नहीं मिल सकी है।
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छह माह के दौरान सर्पदंश से जान गंवाने वाले करीब 50 लोगों में अधिकांश के शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया और उनकी अंत्येष्टि कर दी। सरकारी आकड़ों के अनुसार जिले में आठ लोगों की सर्पदंश से मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है।
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पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर सभी आठ लोगों का विसरा सुरक्षित रखा गया है। विसरा को विधि विज्ञान प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा जाना है। जब तक पुलिस विसरा की जांच नहीं कराती। न मौत का कारण पता चलेगा और न ही मृतक के परिवारीजनों को कोई सरकारी सहायता ही मिलेगी।
दोस्तपुर थाना क्षेत्र के दुर्गा खालिसपुर गांव निवासी विकास (35) को पखवारे भर पूर्व सांप ने डस लिया था। परिवारीजन विकास को लेकर सीएचसी पहुंचे थे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। परिवारीजनों के अनुसार सीएचसी पर तैनात चिकित्सक ने पोस्टमॉर्टम कराने के लिए नहीं कहा, इसलिए शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मोतिगरपुर क्षेत्र के मीरपुर सरैया निवासी अनिल नागर के 12 वर्षीय पुत्र सनी और आठ वर्षीय पुत्री सलोनी को शनिवार की रात चारपाई पर सोते समय सांप ने डस लिया। जानकारी होने पर परिवारीजन दोनों को लेकर जिला अस्पताल गए थे जहां चिकित्सकों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
बेटी सलोनी को अनिल सुल्तानपुर शहर के एक हॉस्पिटल में भर्ती करने के बाद बेटे सनी को मेडिकल कॉलेज लखनऊ ले जा रहे थे कि जगदीशपुर के पास उसकी मौत हो गई। परिवारीजन उसे लेकर वापस सुल्तानपुर चले आए।
जानकारी न होने की वजह से बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया। मंगलवार की सुबह करीब सात बजे सलोनी की भी हॉस्पिटल में मौत हो गई। परिवारीजनों की सूचना पर पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है।
दहशत व झाड़-फूंक से होती हैं 90 फीसदी मौतें
सुल्तानपुर। पर्यावरणविद प्रकाश विजय बताते हैं कि करैत, कोबरा, रसेल वाईपर और स्केल्ड वाईपर मुख्य जहरीले सांप है । सर्पदंश से 90 फीसदी मौतें झाड़-फूंक व दहशत से हो जाती है। ग्रामीण रात में टॉर्च या पर्याप्त रोशनी के साथ ही बाहर जाएं। ऐसा जूता पहनें जो पैर को ऊपर तक अच्छी तरह ढक सके, साथ में एक डंडा और गमछा भी रखें।
अगर किसी की अचानक सांप से भेंट हो जाए तो वह अपना गमछा या कोई भी कपड़ा तुरंत निकालकर उस पर फेंक दें। सांप आदतन उसी में उलझ जाएगा। सर्पदंश की स्थित में काटने वाली जगह को पानी से कपड़ा धोने वाले साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। फिर रुमाल, गमछा से जहां काटने का निशान हो उसके ऊपर के एक हड्डी वाले भाग यानी पैर में काटा है तो जांघ में और हाथ में काटा है तो कुहनी के ऊपर बांध दें। पुकार कर किसी को बुलाएं या धीरे-धीरे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाएं।
जहरीले सांप के काटने पर सीरिंज से निकालें खून : सीएमओ
सीएमओ डॉ. डीके त्रिपाठी बताते हैं कि कोबरा के डसने पर कटा हुआ स्थान 15 मिनट के अंदर सूजने लगता है। यह कोबरा के डसने का लक्षण है। ध्यान से देखें तो दो मोटी सुई के धंसने से बने निशान जैसे विषदंत के स्थान पर दिखेगा। प्राथमिक उपचार में नई सीरिंज से सांप के डसने के निशान पर लगा कर खींच-खींच कर खून निकालें। विष का असर केवल खून में जाने पर ही होता है।