{"_id":"634067f96662f54dfe1fb373","slug":"pooja-pandal-sultanpur-news-lko651816698","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश ने ठंडा किया दुर्गा पूजा महोत्सव का उत्साह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश ने ठंडा किया दुर्गा पूजा महोत्सव का उत्साह
विज्ञापन
दुर्गापूजा महोत्सव में सजीं प्रतिमाएं।
- फोटो : SULTANPUR
सुल्तानपुर। जिले के ऐतिहासिक दुर्गा पूजा महोत्सव की रौनक को बरसात ने फीका कर दिया है। बुधवार को दिन भर और शुक्रवार की शाम हुई बारिश से पूजा समितियों का खासा नुकसान हुआ है। बृहस्पतिवार को महोत्सव में कुछ रौनक रही। देवी प्रतिमाओं को बारिश से बचाने के लिए पूजा समितियों की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
लगातार दो साल तक कोरोना संक्रमण के चलते दुर्गा पूजा महोत्सव औपचारिक तरीके से मनाया गया था। इस बार स्थिति सामान्य होने पर पूजा समितियों में दुर्गा पूजा को लेकर खासा उत्साह था। एक माह से देवी पंडालों की सजावट का कार्य चल रहा था। कोलकाता व झारखंड से आए कारीगरों ने विभिन्न देव स्थलों के पंडाल सजाए। शारदीय नवरात्रि के महानवमी तक सब कुछ ठीक ठाक रहा। विजयदशमी को एकाएक मौसम ने करवट ली और पूरे दिन और रात में भी झमाझम बारिश हुई। बुधवार को हुई तेज बरसात ने शहर के दुर्गा पूजा महोत्सव की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई स्वयंसेवी संगठनों व पूजा समितियों की ओर से विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई थी।
बारिश के चलते गांव-गिराव के श्रद्धालु शहर के दुर्गा पूजा महोत्सव में नहीं पहुंच सके। इसके चलते सबसे ज्यादा नुकसान बनाए गए प्रसाद का हुआ। बृहस्पतिवार को भी दिन भर बादल छाए रहे। शाम को बारिश नहीं होने से दुर्गा पूजा महोत्सव में रौनक रही। फिर भी दूर-दराज से आने वाले लोग नहीं पहुंच सके। शुक्रवार को दिन भर मौसम साफ रहा और धूप भी निकल आई थी। एकाएक शाम करीब साढ़े पांच बजे बारिश होने लगी। महोत्सव को आकर्षक बनाने के लिए इस बार देश-विदेश के मंदिरों के स्वरूप में पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पंडालों की शोभा बढ़ाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए और आकर्षक लाइटें लगाई गईं थीं। दशहरे के दिन से शुरू होने वाले महोत्सव का पहला दिन ही खराब मौसम की भेंट चढ़ गया। बारिश व तेज हवा ने कई पंडालों का स्वरूप बिगाड़ दिया। पूजा समिति के पदाधिकारियों की मानें तो मौसम के खराब रहने तक देवी प्रतिमाओं को पॉलिथीन लगाकर सुरक्षित रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
लगातार दो साल तक कोरोना संक्रमण के चलते दुर्गा पूजा महोत्सव औपचारिक तरीके से मनाया गया था। इस बार स्थिति सामान्य होने पर पूजा समितियों में दुर्गा पूजा को लेकर खासा उत्साह था। एक माह से देवी पंडालों की सजावट का कार्य चल रहा था। कोलकाता व झारखंड से आए कारीगरों ने विभिन्न देव स्थलों के पंडाल सजाए। शारदीय नवरात्रि के महानवमी तक सब कुछ ठीक ठाक रहा। विजयदशमी को एकाएक मौसम ने करवट ली और पूरे दिन और रात में भी झमाझम बारिश हुई। बुधवार को हुई तेज बरसात ने शहर के दुर्गा पूजा महोत्सव की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई स्वयंसेवी संगठनों व पूजा समितियों की ओर से विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई थी।
विज्ञापन
बारिश के चलते गांव-गिराव के श्रद्धालु शहर के दुर्गा पूजा महोत्सव में नहीं पहुंच सके। इसके चलते सबसे ज्यादा नुकसान बनाए गए प्रसाद का हुआ। बृहस्पतिवार को भी दिन भर बादल छाए रहे। शाम को बारिश नहीं होने से दुर्गा पूजा महोत्सव में रौनक रही। फिर भी दूर-दराज से आने वाले लोग नहीं पहुंच सके। शुक्रवार को दिन भर मौसम साफ रहा और धूप भी निकल आई थी। एकाएक शाम करीब साढ़े पांच बजे बारिश होने लगी। महोत्सव को आकर्षक बनाने के लिए इस बार देश-विदेश के मंदिरों के स्वरूप में पंडालों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पंडालों की शोभा बढ़ाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए और आकर्षक लाइटें लगाई गईं थीं। दशहरे के दिन से शुरू होने वाले महोत्सव का पहला दिन ही खराब मौसम की भेंट चढ़ गया। बारिश व तेज हवा ने कई पंडालों का स्वरूप बिगाड़ दिया। पूजा समिति के पदाधिकारियों की मानें तो मौसम के खराब रहने तक देवी प्रतिमाओं को पॉलिथीन लगाकर सुरक्षित रखा जाएगा।
विज्ञापन