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सवालों के घेरे में है जेल में हुई गैंगेस्टर की मौत
Updated Thu, 13 Sep 2018 11:34 PM IST
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जेल में गैंगेस्टर की मौत पर उठे सवाल
सुल्तानपुर। अपहरण के मामले में पत्नी व भतीजी के साथ जेल में निरुद्ध गैंगेस्टर की मौत पर परिवारीजनों ने सवाल उठाया है। परिवारीजनों ने सीधे तौर पर जेल अधिकारियों को बंदी की मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
परिवारीजनों की मानें तो रात में किसी भी बंदी को बैरक से नहीं निकाला जाता है। ऐसे में उनका बेटा रात में कैसे निर्माणाधीन बैरक में पहुंचा। मृतक के परिवारीजन का कहना है कि, जरूर दाल में कुछ काला है।
लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के गोपालापुर गांव निवासी शीतला प्रसाद शुक्ल के पुत्र श्यामसुंदर उर्फ वृजेश शुक्ल (32) पर कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के झव्वारा गांव निवासी राजेश के बेटे पप्पू का वर्ष 2016 में अपहरण का आरोप लगा था।
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पुलिस ने राजेश की तहरीर पर श्यामसुंदर उर्फ वृजेश, उसकी पत्नी शालिनी के साथ ही सुजाता (शालिनी की बहन की पुत्री) के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने राजेश के अपहृत बेटे को नेपाल से बरामद किया था।
अपहरण में शामिल श्यामसुंदर उर्फ वृजेश, शालिनी और सुजाता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 31 दिसंबर 2016 से तीनों जेल में बंद हैं। श्यामसुंदर के खिलाफ कोतवाली देहात थाने में ही वर्ष 2017 में ही गैंगेस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
श्यामसुंदर का शव मंगलवार रात जिला जेल के निर्माणाधीन बैरक में फांसी के फंदे पर लटका मिला था। परिवारीजनों ने श्यामसुंदर की मौत का सीधा आरोप जेल के अधिकारियों पर लगाया है।
परिवारीजनों की मानें तो श्यामसुंदर को जबरदस्ती गमछे के सहारे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। सूत्रों की मानें तो जेल में निरुद्ध किसी भी बंदी को रात में बैरक से निकलने की इजाजत नहीं है।
ऐसे में श्यामसुंदर अपनी बैरक से रात में बाहर कैसे निकला। वह निर्माणाधीन बैरक में कैसे पहुंचा। कई सवालों के जवाब न तो जेल प्रशासन के पास हैं और न ही जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल उमेश श्रीवास्तव के पास। फिलहाल घटना पर लीपापोती शुरू हो गई है।
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सुल्तानपुर। अपहरण के मामले में पत्नी व भतीजी के साथ जेल में निरुद्ध गैंगेस्टर की मौत पर परिवारीजनों ने सवाल उठाया है। परिवारीजनों ने सीधे तौर पर जेल अधिकारियों को बंदी की मौत का जिम्मेदार ठहराया है।
परिवारीजनों की मानें तो रात में किसी भी बंदी को बैरक से नहीं निकाला जाता है। ऐसे में उनका बेटा रात में कैसे निर्माणाधीन बैरक में पहुंचा। मृतक के परिवारीजन का कहना है कि, जरूर दाल में कुछ काला है।
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लंभुआ कोतवाली क्षेत्र के गोपालापुर गांव निवासी शीतला प्रसाद शुक्ल के पुत्र श्यामसुंदर उर्फ वृजेश शुक्ल (32) पर कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के झव्वारा गांव निवासी राजेश के बेटे पप्पू का वर्ष 2016 में अपहरण का आरोप लगा था।
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पुलिस ने राजेश की तहरीर पर श्यामसुंदर उर्फ वृजेश, उसकी पत्नी शालिनी के साथ ही सुजाता (शालिनी की बहन की पुत्री) के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने राजेश के अपहृत बेटे को नेपाल से बरामद किया था।
अपहरण में शामिल श्यामसुंदर उर्फ वृजेश, शालिनी और सुजाता को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 31 दिसंबर 2016 से तीनों जेल में बंद हैं। श्यामसुंदर के खिलाफ कोतवाली देहात थाने में ही वर्ष 2017 में ही गैंगेस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
श्यामसुंदर का शव मंगलवार रात जिला जेल के निर्माणाधीन बैरक में फांसी के फंदे पर लटका मिला था। परिवारीजनों ने श्यामसुंदर की मौत का सीधा आरोप जेल के अधिकारियों पर लगाया है।
परिवारीजनों की मानें तो श्यामसुंदर को जबरदस्ती गमछे के सहारे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। सूत्रों की मानें तो जेल में निरुद्ध किसी भी बंदी को रात में बैरक से निकलने की इजाजत नहीं है।
ऐसे में श्यामसुंदर अपनी बैरक से रात में बाहर कैसे निकला। वह निर्माणाधीन बैरक में कैसे पहुंचा। कई सवालों के जवाब न तो जेल प्रशासन के पास हैं और न ही जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल उमेश श्रीवास्तव के पास। फिलहाल घटना पर लीपापोती शुरू हो गई है।