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Sultanpur News: मंथन से निकली उम्मीद, सृजन से मजबूत होंगे कांग्रेस के 'हाथ'
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जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय।-संवाद
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सुल्तानपुर। कांग्रेस ने जिले में ''संगठन सृजन'' अभियान चलाया है। इसका उद्देश्य पार्टी को सियासी हाशिये से बाहर निकालना है। यह अभियान भाजपा के मजबूत बूथ तंत्र को चुनौती देने के लिए है। यह मंथन 11 से 17 अगस्त, 2026 तक चला। इसमें बूथ कार्यकर्ताओं से लेकर पुराने चेहरों तक की राय ली गई।
जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष पद के दावेदारों के साक्षात्कार हुए। उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता परखी गई। जिलाध्यक्ष पद के लिए 20 और शहर अध्यक्ष पद के लिए चार दावेदार सामने आए। अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को जिला कांग्रेस कमेटी में प्रेस वार्ता से हुई थी। इसके बाद 12 से 16 अगस्त तक विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में संवाद कार्यक्रम हुए। सूत्रों के अनुसार, जिलाध्यक्ष पद के लिए ब्राह्मण या ओबीसी वर्ग पर दांव लग सकता है। यह जिले के जातीय और सियासी समीकरण साधने की कोशिश है।
दावेदारों की योग्यता परख
17 अगस्त को संगठन की कमान संभालने के इच्छुक नेताओं की परीक्षा हुई। एआईसीसी पर्यवेक्षक नितिन कुंबलकर ने इसमें भाग लिया। पीसीसी के सह पर्यवेक्षक अनीश खान, राधेश्याम कनौजिया और विक्रम सिंह पटेल भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और दावेदारों से संवाद कर जमीनी स्थिति समझी। साक्षात्कार में राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठनात्मक समझ पर विशेष ध्यान दिया गया।
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प्रमुख दावेदार और मानदंड
जिलाध्यक्ष पद के लिए राहुल त्रिपाठी, ओपी चौधरी, राजेश तिवारी समेत 20 दावेदारों ने साक्षात्कार दिया। शहर अध्यक्ष पद के लिए अमोल वाजपेयी, सुब्रत सिंह सनी, महेश मिश्र और सिराज अहमद दौड़ में हैं। दावेदारों से जिले की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और भौगोलिक स्थिति पर सवाल पूछे गए। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और विभिन्न सामाजिक समूहों में संतुलन बनाने की क्षमता भी परखी गई। उनसे आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े सवाल भी किए गए।
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जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष पद के दावेदारों के साक्षात्कार हुए। उनकी राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता परखी गई। जिलाध्यक्ष पद के लिए 20 और शहर अध्यक्ष पद के लिए चार दावेदार सामने आए। अभियान की शुरुआत 11 अगस्त को जिला कांग्रेस कमेटी में प्रेस वार्ता से हुई थी। इसके बाद 12 से 16 अगस्त तक विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में संवाद कार्यक्रम हुए। सूत्रों के अनुसार, जिलाध्यक्ष पद के लिए ब्राह्मण या ओबीसी वर्ग पर दांव लग सकता है। यह जिले के जातीय और सियासी समीकरण साधने की कोशिश है।
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दावेदारों की योग्यता परख
17 अगस्त को संगठन की कमान संभालने के इच्छुक नेताओं की परीक्षा हुई। एआईसीसी पर्यवेक्षक नितिन कुंबलकर ने इसमें भाग लिया। पीसीसी के सह पर्यवेक्षक अनीश खान, राधेश्याम कनौजिया और विक्रम सिंह पटेल भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और दावेदारों से संवाद कर जमीनी स्थिति समझी। साक्षात्कार में राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठनात्मक समझ पर विशेष ध्यान दिया गया।
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प्रमुख दावेदार और मानदंड
जिलाध्यक्ष पद के लिए राहुल त्रिपाठी, ओपी चौधरी, राजेश तिवारी समेत 20 दावेदारों ने साक्षात्कार दिया। शहर अध्यक्ष पद के लिए अमोल वाजपेयी, सुब्रत सिंह सनी, महेश मिश्र और सिराज अहमद दौड़ में हैं। दावेदारों से जिले की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और भौगोलिक स्थिति पर सवाल पूछे गए। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और विभिन्न सामाजिक समूहों में संतुलन बनाने की क्षमता भी परखी गई। उनसे आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े सवाल भी किए गए।