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संस्कृत विद्यालयों में भी लागू होगी प्रशासन योजना
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सुल्तानपुर। जिले में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में प्रशासन योजना लागू होगी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के अध्यक्ष व माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने डीआईओएस को पत्र भेजकर प्रशासन योजना लागू किए जाने का निर्देश दिया है।
संस्कृत विद्यालयों के सफल संचालन व व्यवस्थाओं के दुरुस्तीकरण के लिए शासन ने प्रशासन योजना शैक्षिक सत्र 2021-22 से अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के सुचारु संचालन व प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रत्येक माध्यमिक संस्कृत विद्यालय में यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में अभी तक प्रशासन योजना लागू नहीं थी। अब शासन ने प्रशासन योजना को विधिवत लागू करने का निर्देश दिया है। इसमें विद्यालय की साधारण सभा का गठन करने और साधारण सभा के बहुमत की ओर से चुने जाने वाले पदाधिकारियों का विवरण मांगा गया है।
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प्रबंध समिति के कार्यकाल समाप्त होने के कम से कम छह माह पूर्व सदस्यता शुल्क जमा कर प्रबंध समिति का सदस्य बना जा सकता है। प्रबंध समिति का गठन करते समय पदेन सदस्य समिति 18 सदस्य होंगे। 12 सदस्य साधारण सभा की ओर से अपने में से ही चुने जाएंगे। तीन सदस्य मनोनीत किए जाएंगे।
विद्यालय के प्रधानाचार्य पदेन सदस्य होंगे। दो अध्यापक भी पदेन सदस्य मनोनीत होंगे। सभी सदस्यों को मत देने का अधिकार होगा। मनोनीत तथा पदेन सदस्य पदाधिकारी नहीं हो सकेंगे। किसी प्रकरण पर समिति के सदस्यों के पक्ष-विपक्ष में वर्ग बराबर मत होने पर अध्यक्ष का मत दो मतों के बराबर माना जाएगा।
प्रबंध समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और कोषाध्यक्ष साधारण सभा की ओर से चुने जाएंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि सभी संबंधित विद्यालयों को डीआईओएस की ओर से निर्देश जारी किए जाएंगे।
जिले में 11 संस्कृत माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 10 संस्कृत माध्यमिक विद्यालय अशासकीय सहायता प्राप्त हैं। एक माध्यमिक विद्यालय वित्तविहीन योजना के तहत संचालित है। इसके अलावा अशासकीय सहायता प्राप्त चार डिग्री कॉलेज भी जिले में संचालित हैं।
सह जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि शासन ने सभी संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में प्रशासन योजना लागू करने का निर्देश दिया है। यदि किसी संस्कृत विद्यालय की ओर से प्रशासन योजना लागू करने में आनाकानी की जाएगी अथवा प्रशासन योजना लागू नहीं की जाएगी तो वहां की प्रबंध समिति को शून्य कर दिया जाएगा।
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संस्कृत विद्यालयों के सफल संचालन व व्यवस्थाओं के दुरुस्तीकरण के लिए शासन ने प्रशासन योजना शैक्षिक सत्र 2021-22 से अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के सुचारु संचालन व प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रत्येक माध्यमिक संस्कृत विद्यालय में यह योजना तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में अभी तक प्रशासन योजना लागू नहीं थी। अब शासन ने प्रशासन योजना को विधिवत लागू करने का निर्देश दिया है। इसमें विद्यालय की साधारण सभा का गठन करने और साधारण सभा के बहुमत की ओर से चुने जाने वाले पदाधिकारियों का विवरण मांगा गया है।
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प्रबंध समिति के कार्यकाल समाप्त होने के कम से कम छह माह पूर्व सदस्यता शुल्क जमा कर प्रबंध समिति का सदस्य बना जा सकता है। प्रबंध समिति का गठन करते समय पदेन सदस्य समिति 18 सदस्य होंगे। 12 सदस्य साधारण सभा की ओर से अपने में से ही चुने जाएंगे। तीन सदस्य मनोनीत किए जाएंगे।
विद्यालय के प्रधानाचार्य पदेन सदस्य होंगे। दो अध्यापक भी पदेन सदस्य मनोनीत होंगे। सभी सदस्यों को मत देने का अधिकार होगा। मनोनीत तथा पदेन सदस्य पदाधिकारी नहीं हो सकेंगे। किसी प्रकरण पर समिति के सदस्यों के पक्ष-विपक्ष में वर्ग बराबर मत होने पर अध्यक्ष का मत दो मतों के बराबर माना जाएगा।
प्रबंध समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंधक, सहायक प्रबंधक और कोषाध्यक्ष साधारण सभा की ओर से चुने जाएंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के प्रधान सहायक अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि सभी संबंधित विद्यालयों को डीआईओएस की ओर से निर्देश जारी किए जाएंगे।
जिले में 11 संस्कृत माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 10 संस्कृत माध्यमिक विद्यालय अशासकीय सहायता प्राप्त हैं। एक माध्यमिक विद्यालय वित्तविहीन योजना के तहत संचालित है। इसके अलावा अशासकीय सहायता प्राप्त चार डिग्री कॉलेज भी जिले में संचालित हैं।
सह जिला विद्यालय निरीक्षक अंशुमान ने बताया कि शासन ने सभी संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में प्रशासन योजना लागू करने का निर्देश दिया है। यदि किसी संस्कृत विद्यालय की ओर से प्रशासन योजना लागू करने में आनाकानी की जाएगी अथवा प्रशासन योजना लागू नहीं की जाएगी तो वहां की प्रबंध समिति को शून्य कर दिया जाएगा।