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यश हॉस्पिटल को भारी पड़ी इलाज में लापरवाही
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सीएमओ ने निरस्त किया यश हॉस्पिटल का लाइसेंस
गौरीगंज। शहर स्थित यश हास्पिटल में प्रसव के बाद 10 मई को हुई प्रसूता की मौत प्रकरण में सीएमओ ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीएमओ की रिपोर्ट में लापरवाही उजागर होने पर सीएमओ ने हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित करते हुए रिपोर्ट डीएम को सौंपी है।
मुंशीगंज थाना क्षेत्र के गांव जूठीपुर निवासी शिवाकांत मिश्र अपनी पत्नी पद्मा को प्रसव पीड़ा होने पर 29 अप्रैल को शहर स्थित यश हॉस्पिटल लाए थे। चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती करके रात करीब 11 बजे ऑपरेशन कर प्रसव कराया था।
तीन दिन बाद अचानक पद्मा की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल की ओर से उन्हें रेफर कर दिया गया। परिजन पद्मा को गंभीर हालत में लखनऊ स्थित बलरामपुर हॉस्पिटल ले गए, जहां 10 मई को उसकी मौत हो गई।
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पत्नी की मौत के बाद शिवाकांत ने निजी हॉस्पिटल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गौरीगंज थाने में तहरीर देकर अस्पताल संचालक और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस की ओर से केस नहीं दर्ज करने से नाराज शिवाकांत के परिवार ने कलेक्ट्रेट पहुंच प्रदर्शन करने के बाद जिला प्रशासन को शिकायती पत्र देकर प्रकरण की जांच कराने, अस्पताल संचालक के खिलाफ केस दर्ज कराने तथा अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी।
डीएम डॉ. राम मनोहर मिश्र ने सीएमओ को प्रकारण की जांच कराकर स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। डीएम के आदेश पर सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव ने एसीएमओ डॉ. राम प्यारे व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सक्सेना की टीम गठित कर मामले की जांच करवाया। सीएमओ ने बताया कि एसीएमओ की जांच में लापरवाही उजागर हुई है।
कहा कि रिपोर्ट के आधार पर हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित करते हुए विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। लाइसेंस निरस्त होने से निजी हॉस्पिटल संचालकों में हड़कंप मचा है।
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गौरीगंज। शहर स्थित यश हास्पिटल में प्रसव के बाद 10 मई को हुई प्रसूता की मौत प्रकरण में सीएमओ ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीएमओ की रिपोर्ट में लापरवाही उजागर होने पर सीएमओ ने हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित करते हुए रिपोर्ट डीएम को सौंपी है।
मुंशीगंज थाना क्षेत्र के गांव जूठीपुर निवासी शिवाकांत मिश्र अपनी पत्नी पद्मा को प्रसव पीड़ा होने पर 29 अप्रैल को शहर स्थित यश हॉस्पिटल लाए थे। चिकित्सकों ने उन्हें भर्ती करके रात करीब 11 बजे ऑपरेशन कर प्रसव कराया था।
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तीन दिन बाद अचानक पद्मा की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल की ओर से उन्हें रेफर कर दिया गया। परिजन पद्मा को गंभीर हालत में लखनऊ स्थित बलरामपुर हॉस्पिटल ले गए, जहां 10 मई को उसकी मौत हो गई।
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पत्नी की मौत के बाद शिवाकांत ने निजी हॉस्पिटल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गौरीगंज थाने में तहरीर देकर अस्पताल संचालक और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
पुलिस की ओर से केस नहीं दर्ज करने से नाराज शिवाकांत के परिवार ने कलेक्ट्रेट पहुंच प्रदर्शन करने के बाद जिला प्रशासन को शिकायती पत्र देकर प्रकरण की जांच कराने, अस्पताल संचालक के खिलाफ केस दर्ज कराने तथा अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की थी।
डीएम डॉ. राम मनोहर मिश्र ने सीएमओ को प्रकारण की जांच कराकर स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। डीएम के आदेश पर सीएमओ डॉ. आरएम श्रीवास्तव ने एसीएमओ डॉ. राम प्यारे व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके सक्सेना की टीम गठित कर मामले की जांच करवाया। सीएमओ ने बताया कि एसीएमओ की जांच में लापरवाही उजागर हुई है।
कहा कि रिपोर्ट के आधार पर हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित करते हुए विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी गई है। लाइसेंस निरस्त होने से निजी हॉस्पिटल संचालकों में हड़कंप मचा है।