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एडवाइजरी-2
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:16 PM IST
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जिला अस्पताल में नहीं कई दवाएं, ओपीडी से चिकित्सक नदारद
सुल्तानपुर। जिला अस्पताल में चिकित्सीय व्यवस्था बेपटरी हो गई है। अस्पताल में तीन दिनों से प्रमुख दवाएं खत्म हैं। तीमारदारों को बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। ओपीडी से चिकित्सकों के नदारद रहने से मरीजों के साथ ही उनके तीमारदार परेशान दिखे। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल का मुआयना किया तो हालात बेहद खराब मिले।
जिला अस्पताल में दो सौ बेड हैं। बेड के सापेक्ष 27 चिकित्सक समेत 150 पद स्वीकृत है। मौजूदा समय में मात्र 18 चिकित्सक कार्यरत हैं। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के ओपीडी से अधिकांश डॉक्टर नदारद मिले। मरीजों की लंबी कतारें पंजीयन काउंटर से लेकर ओपीडी तक लगी थीं। कूरेभार कस्बे से बुखार से पीड़ित पप्पू कनौजिया अस्पताल पहुंचे थे। पप्पू ओपीडी के कक्ष संख्या आठ में डॉ. दीपक सिंह को दिखाने के लिए खड़े थे। पप्पू ने बताया कि डॉक्टर नहीं मिले।
पैथॉलाजी में ब्लड की जांच कराने पहुंचे दीपक ने बताया कि उन्हें चिकित्सक ने ब्लड की जांच लिखी है, लेकिन पैथालॉजी सेंटर में उसके खून की जांच नहीं की गई। दूसरी तरफ दवा काउंटर पर खड़ी रूबीना ने कहा कि उनके बच्चे को उल्टी दस्त हो रही है। उसे डॉक्टर ने मेट्रोजिल और पैरासीटामॉल लिखा है। दोनों दवा उसे नहीं मिली। दवा काउंटर पर मौजूद कर्मी ने बताया कि तीन दिन से दवा खत्म है। शहर की गभड़िया की रहने वाली रामलली ने कहा कि उसे चिकित्सक ने आयरन की गोलियां लिखी हैं। उसे भी दवा नहीं दी गई।
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12 सौ मरीजों का होता पंजीयन : सीएमएस
सुल्तानपुर। सीएमएस डॉ. योगेंद्र यति ने कहा कि चिकित्सकों से लेकर अन्य स्टाफ की सालाना सैलरी साढ़े 10 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही अन्य बजट पांच करोड़ रुपये है। प्रतिदिन करीब 12 सौ मरीजों का पंजीयन होता है। कोशिश होती है कि मरीजों को चिकित्सक देखें और दवा लिखे। उन्होंने कहा कि जो दवाएं नहीं है उसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जरूरत पर दवाएं खरीदी जाएंगी।
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सुल्तानपुर। जिला अस्पताल में चिकित्सीय व्यवस्था बेपटरी हो गई है। अस्पताल में तीन दिनों से प्रमुख दवाएं खत्म हैं। तीमारदारों को बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। ओपीडी से चिकित्सकों के नदारद रहने से मरीजों के साथ ही उनके तीमारदार परेशान दिखे। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल का मुआयना किया तो हालात बेहद खराब मिले।
जिला अस्पताल में दो सौ बेड हैं। बेड के सापेक्ष 27 चिकित्सक समेत 150 पद स्वीकृत है। मौजूदा समय में मात्र 18 चिकित्सक कार्यरत हैं। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के ओपीडी से अधिकांश डॉक्टर नदारद मिले। मरीजों की लंबी कतारें पंजीयन काउंटर से लेकर ओपीडी तक लगी थीं। कूरेभार कस्बे से बुखार से पीड़ित पप्पू कनौजिया अस्पताल पहुंचे थे। पप्पू ओपीडी के कक्ष संख्या आठ में डॉ. दीपक सिंह को दिखाने के लिए खड़े थे। पप्पू ने बताया कि डॉक्टर नहीं मिले।
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पैथॉलाजी में ब्लड की जांच कराने पहुंचे दीपक ने बताया कि उन्हें चिकित्सक ने ब्लड की जांच लिखी है, लेकिन पैथालॉजी सेंटर में उसके खून की जांच नहीं की गई। दूसरी तरफ दवा काउंटर पर खड़ी रूबीना ने कहा कि उनके बच्चे को उल्टी दस्त हो रही है। उसे डॉक्टर ने मेट्रोजिल और पैरासीटामॉल लिखा है। दोनों दवा उसे नहीं मिली। दवा काउंटर पर मौजूद कर्मी ने बताया कि तीन दिन से दवा खत्म है। शहर की गभड़िया की रहने वाली रामलली ने कहा कि उसे चिकित्सक ने आयरन की गोलियां लिखी हैं। उसे भी दवा नहीं दी गई।
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12 सौ मरीजों का होता पंजीयन : सीएमएस
सुल्तानपुर। सीएमएस डॉ. योगेंद्र यति ने कहा कि चिकित्सकों से लेकर अन्य स्टाफ की सालाना सैलरी साढ़े 10 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही अन्य बजट पांच करोड़ रुपये है। प्रतिदिन करीब 12 सौ मरीजों का पंजीयन होता है। कोशिश होती है कि मरीजों को चिकित्सक देखें और दवा लिखे। उन्होंने कहा कि जो दवाएं नहीं है उसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जरूरत पर दवाएं खरीदी जाएंगी।