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BHU गेट के पास दर्द से कराहती रही महिला,एसआई बना मददगार, एंबुलेंस से भिजवाया अस्पताल

Sun, 26 Apr 2020 09:52 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Sun, 26 Apr 2020 09:52 PM IST
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Woman groaning painfully near BHU gate, SI becomes helpful, ambulance sent to hospital
एंबुलेंस। - फोटो : अमर उजाला।

प्रदेश सरकार एक ओर लॉकडाउन में सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दे रही है वही दूसरी ओर ऐसे कई लोग है जिन्हें इलाज के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। रविवार सुबह बीएचयू गेट के पास ऐसा ही देखने को मिला। एक महिला यहां दर्द से कराहती रही लेकिन उसे अस्पताल ले जाने वाला कोई नही था। पति ने आने जाने वालों से भी गुहार लगाई। इसी बीच सूचना पाकर मौके पर पहुंचे लंका थाने के एसआई ने उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया।

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सोनभद्र जिले के विंढमगंज थाना क्षेत्र के मेदिनी खार निवासी रमेश कुमार अपनी पैंतीस वर्षीय पत्नी मनीता को रक्तरिसाव होने की शिकायत होने पर इलाज के लिए  सोनभद्र जिला अस्पताल पहुंचे। जहां महिला की हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे बीएचयू अस्पताल रेफर कर दिया।
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वहां से रमेश एंबुलेंस से लेकर अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार की भोर में 4 बजे लेकर पहुंचा। बताया कि इस दौरान डॉक्टरों ने महिला का स्ट्रेचर पर ही कुछ देर इलाज किया बाद में दूसरे अस्पताल में जाने की बात कहकर रेफर कर दिया। बताया कि डाक्टरों से पत्नी को बीएचयू में ही रखने की गुहार भी उसने लगाई लेकिन किसी ने कुछ नही सुना।
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यहां के बाद दर्द से कराहती पत्नी को स्ट्रेचर पर लेकर रमेश बीएचयू गेट के पास किनारे खड़ा हो गया। पत्नी का इलाज कराने के लिए राहगीरों से मदद की गुहार भी लगाई। इस बीच सूचना मिलते ही लंका थाने के एसआई कुँवर सिंह पहुंचे। उन्होंने न केवल रमेश को इलाज के लिए 500  रुपये दिए बल्कि एंबुलेंस  बुलाकर इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। एसआई के इस कार्य को आसपास के लोगो ने भी सराहा।

अस्पताल की इमरजेंसी में आई मनीता देवी की जांच के बाद उनका इलाज हुआ और दवाइयां भी दी गई। इसके बाद लेबर रूम में गायनेकॉलोजिस्ट को रेफर किया गया। यहां भी उसकी जांच हुई। किसी तरह की कोई ब्लीडिंग नही थी, इसलिए इमरजेंसी में जाकर ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कराने के लिए कहा गया। मरीज़ अस्पताल में भर्ती नहीं हुईं और अस्पताल से चली गईं।
डॉ. राजेश सिंह,पीआरओ, बीएचयू

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