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Sonebhadra News: गमला बनाकर बढ़ाती थी आय अब हाथों को नहीं मिल रहा काम

Sun, 27 Oct 2024 11:41 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Oct 2024 11:41 PM IST
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Used to increase income by making pots, now hands are not getting work
सोनभद्र। जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों को काम नहीं मिल रहा है। जो महिलाएं पहले गमला बनाकर अपनी आय बढ़ाती थीं, वे अब तंगी झेलने को विवश हैं। समूह की कई महिलाएं मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रही हैं। अन्य महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ा दूसरा काम कर रही हैं। वहीं एनआरएलएम के अधिकारी हर महिला को काम देने का दावा कर रहे हैं।
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सोनांचल में कुल एक लाख 59 हजार महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। जिले में 16010 महिला समूह संचालित हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर शासन का जोर है। समूह से जुड़ी बड़ी संख्या में महिलाओं को काम नहीं मिल रहा है। चोपन में समूह से जुड़ी महिलाएं मजदूरी करने को विवश हैं। नाम न छापने के शर्त पर समूह की महिलाओं ने बताया कि तीन साल पहले चोपन में संचालित गोशाला में गोबर से गमला बनाने का काम शुरू किया था। आरएलएम की तरफ से मशीन महिलाओं को उपलब्ध कराई गई थी। इस काम से कुल 25 महिलाएं जुड़ी थीं। लगभग एक साल गमला बनाने के बाद घाटा होते देख काम बंद हो गया। इस काम से जुड़ी कुछ महिलाओं को छोड़कर अन्य महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। समूह से जुड़ी महिलाएं मजदूरी करने को विवश हैं। महिलाओं को कोई दूसरा काम नहीं मिल रहा है। यह सिर्फ बानगी भर है। इसी तरह से अन्य क्षेत्र में समूह से जुड़ी महिलाओं को काम नहीं मिल रहा है। करीब तीस फीसदी महिलाओं को काम नहीं मिल पा रहा है। समूह की महिलाओं की मानें तो मशीन को अगोरी गांव भेज दिया गया है, वहां भी गमला बनाने का काम नहीं हो रहा है।
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एक माह से बंद है कैंटीन

कलेक्ट्रेट जाने वाले रास्ते स्वागत द्वार पर स्थित विश्राम स्थल को समूह की महिलाओं को कैंटीन खोलने के लिए अलाट किया गया है। यहां कैंटीन के साथ ही अन्य सुविधा मुहैया कराई जानी थी मगर करीब एक माह से यहां ताला लटक रहा है। शुरू में इसका संचालन अच्छा हो रहा था। वहीं कलेक्ट्रेट परिसर एवं विकास भवन परिसर में कैंटीन का संचालन बेहतर तरीके से हो रहा है। इस संबंध में समूह की महिला संजू कुशवाहा का कहना है कि बिजली कनेक्शन कराने के बाद कैंटीन का संचालन किया जाएगा।
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चोपन में गोबर से गमला बनाने का काम दो साल पहले चल रहा था। बाजार में मांग नहीं होने की वजह से गमला बनाने का काम बंद हो गया है। समूह से जुड़ी महिलाएं मुर्गी पालन व अन्य दूसरा काम कर रही हैं। -एमजी रवि, जिला प्रबंधक-एनआरएलएम।

फोटो संख्या:51- मोहल्ला सैनीपुरा में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन--संवाद

फोटो संख्या:51- मोहल्ला सैनीपुरा में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन--संवाद

फोटो संख्या:51- मोहल्ला सैनीपुरा में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन--संवाद

फोटो संख्या:51- मोहल्ला सैनीपुरा में निर्माणाधीन सामुदायिक भवन--संवाद

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