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Sonebhadra News: काशी के धार्मिक पर्यटन के साथ जुड़ेगा सोनभद्र का ईको टूरिज्म

Sun, 17 Dec 2023 11:07 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 17 Dec 2023 11:07 PM IST
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Sonbhadra's eco tourism will be linked with Kashi's religious tourism
रहस्य और रोमांच से भरे सोनांचल की वादियों में पर्यटन नए रूप में विस्तार लेने जा रहा है। जल्द ही यहां पर्यटकों के लिए वह सब कुछ होगा, जिसकी तलाश में वह हिल स्टेशनों का रुख करते हैं।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश सरकार के तीन विभाग मिलकर इस पर काम कर रहे हैं। काशी के धार्मिक पर्यटन के साथ सोनभद्र के पर्यावरण पर्यटन (ईको टूरिज्म) को जोड़ने की तैयारी है, ताकि बनारस में पर्यटकों का ठहराव बढ़े और युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिले।
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पीएम मोदी के प्रयासों से काशी के भव्य-नव्य रूप लेने के बाद वहां पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। देश-दुनिया से लाखों पर्यटक हर साल वहां पहुंच रहे हैं। इस मामले में काशी ने ताज नगरी आगरा और मथुरा को भी पीछे छोड़ दिया है। अब सरकार यहां पर्यटकों को रोकने पर काम कर रही है।
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काशी आने वाले पर्यटक सिर्फ बनारस के मंदिर और घाटों को घूमने तक न सिमटे रहें, इसके लिए आसपास में पर्यटन की नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। विंध्य क्षेत्र के बाद अब सोनभद्र पर सरकार की खास नजर है।
यहां प्राकृतिक पर्यटन के कई केंद्र हैं, लेकिन प्रचार-प्रसार और विस्तार के अभाव में पर्यटक वहां तक नहीं पहुंच पा रहे। इन केंद्रों पर ऐसी सुविधाएं भी नहीं हैं, जो पर्यटकों की रुचि बढ़ा सकें। लिहाजा अब सरकार ने इसकी पहल की है।
इसके लिए पर्यटन, वन और आयुष विभाग को संयुक्त रूप से जिम्मा सौंपा गया है। तीनों विभाग मिलकर सोनभद्र में ईको टूरिज्म की कार्ययोजना बनाने में जुटे हैं। यहां के जंगल, पहाड़, बांध, झरने, किले आदि को मिलाकर पर्यटन का खांका खींचा जा रहा है, जिसमें पर्यटकों को मौज-मस्ती के साथ ही शहरों की भीड़ और रोजमर्रा की भागदौड़ वाली थकान व मानसिक तनाव से राहत मिल सके।

पर्यटन के लिए मऊ कलां में मिली आठ बीघा जमीन
जिला प्रशासन ने कैमूर वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत मऊ कलां गांव में साढ़े आठ बीघा जमीन पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए उपलब्ध कराई है। पर्यटन विभाग को मिली इस जमीन पर आयुष विभाग की ओर से वेलनेस रिसॉर्ट व आयुष वन का निर्माण कराया जाएगा।
इसमें पंचजन्य पार्क विकसित कर वह औषधि पौधे लगाए जाएंगे, जो सेहत के लिए बेहद उपयोगी हैं। इस पार्क में रिसॉर्ट जैसी सुविधाएं भी होंगी, ताकि लोग यहां रुककर प्रकृति से जुड़ सकें। प्राकृतिक चिकित्सा की भी व्यवस्था होगी।

चंद्रकांता के तिलिस्मी किले तक पहुंचाएगा रोपवे
प्रख्यात उपन्यास चंद्रकांता संतति की नायिका चंद्रकांता जिस विजयगढ़ की राजकुमारी थीं, वह सोनभद्र में ही है। मऊ कलां गांव के पास ही स्थित विजयगढ़ दुर्ग के अवशेष अब भी है। लोग यहां चंद्रकांता के तिलिस्मी किस्सों को जानने के लिए पहुंचते हैं।
उन्हें खड़ी सीढि़यों से चढ़कर सैकड़ों फीट ऊंचे किले तक पहुंचना पड़ता है। यहां रोपवे बनाने की योजना है। यह वेलनेस रिसॉर्ट से भी जुड़ेगा। किले पर स्थित रामसरोवर तालाब, अस्तबल, अन्य अवशेषों के भ्रमण के अलावा लाइट एंड साउंड शो की व्यवस्था भी की जानी है।

धंधरौल बांध में वाटर स्पोर्ट्स की सुविधा
किले के पास ही स्थित धंधरौल बांध के विशाल जलाशय में वाटर स्पोर्ट्स की सुविधाओं के रूप में नौकायन, तैराकी, सीढ़ी, रेस्क्यू बोट आदि की व्यवस्था होगी। इसके अलावा बांध के किनारे से जंगल के रास्ते ट्रेकिंग के लिए नेचर ट्रेल भी तैयार किया जाएगा, ताकि पर्यटक पैदल ही जंगल के बीच से सफर कर प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकें।
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फासिल्स पार्क को विश्व धरोहर बनाने की कवायद
कैमूर वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत सलखन का फासिल्स पार्क दुनिया का सबसे बड़ा फासिल्स पार्क है। यहां करीब डेढ़ सौ करोड़ साल पुराने फासिल्स की बड़ी श्रृंखला है। इसे यूनेस्को के विश्व धरोहराें की सूची में शामिल करने के लिए भी भेजा गया है।

इस पार्क की खूबियों को लोगों तक पहुंचाने और इसे संरक्षित करने पर जोर है। पिछले साल राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इस पार्क का भ्रमण किया था। अब सरकार के तीन मंत्रियों ने यहां पहुंचकर इसकी खूबियों का जाना-समझा है।
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