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नगवां ब्लॉक में नहीं चली किसी की मनमानी

Sun, 07 Feb 2016 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो (सोनभद्र)
अमर उजाला ब्यूरो (सोनभद्र) Updated Sun, 07 Feb 2016 11:25 PM IST
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Someone was not arbitrary
नगवां ब्लाक प्रमुख चुनाव में वोटिंग पर अगर हाईकोर्ट की नजर नहीं होती तो
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यह भी सीट सपा के ही खाते में जाती। आठों ब्लाकों में नगवां ऐसा ब्लाक है, जहां चुनाव में प्रशासन और सत्ता पक्ष की मनमानी नहीं चल सकी। यह अलग बात है कि पुलिस चुनाव से दो दिन पहले ही पुलिस प्रशांत सिंह को कब्जे में लेने के लिए हर संभव कोशिश करती रही।


 नगवां में मतदान केंद्र में प्रवेश से लेकर वोट प्रक्रिया तीन सीसीटीवी कैमरे कैद होते रहे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी मुस्तैद रही। शह और मात के लिए अपहरण जैसी संगीन धारा का दंश झेलने वाले प्रत्याशी प्रशांत सिंह के समर्थक पहले से ही जीत को लेकर आश्वस्त दिखे।


रिजल्ट आने के बाद प्रशासन के सारे हथकंडे को मात देकर सपा समर्थित प्रत्याशी को चार वोट से पटखनी दे दी।
जिले में ब्लाक प्रमुख पद के लिए होने वाले चुनाव की तिथि घोषित होने के पूर्व से ही नगवां ब्लाक की प्रमुखी चर्चा में रही। यहां विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ ही अन्य लोगों की निगाह टिकी रही।

चुनाव की घोषणा होते ही यहां सपा समर्थित प्रत्याशी ने जहां क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पक्ष में करने का हर संभव प्रयास किया, वहीं उनके विरोध में चुनाव लड़ रहे पूर्व प्रमुख प्रवीण सिंह के भाई प्रशांत सिंह और उनके परिवार वालों को तमाम विरोधों का सामना करना पड़ा।

 कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्यों के अपहरण के आरोप में पुलिस ने प्रशांत और अन्य लोगों के खिलाफ अपहरण जैसी संगीन धाराओं में केस दर्ज किया। इसके बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ उनके समर्थकों के घर में क्षेत्र पंचायत सदस्यों की तलाश में छापेमारी की।


इतना ही नहीं प्रमुख पद पर जीत हासिल करने वाले प्रशांत के पिता गंगेश्वर सिंह को पुलिस उनके घर से उठा कर थाने भी ले आई पूछताछ करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इस तरह नगवां में पुलिस पर प्रशांत सिंह की ओर से उत्पीड़न करने का आरोप लगा।


पुलिस और प्रशासन की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए प्रशांत ने आखिरकार हाईकोर्ट की शरण ली और उन्हें वहां से काफी राहत भी मिली। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को सीसीटीवी कैमरे की नजर में मतदान कराने और परिणाम की घोषणा का आदेश दिया। इसका सीधा असर नगवां ब्लाक मेें देखने को भी मिला।


 यहां ब्लाक सभागार में मतदान केंद्र बनाया गया था। सभागार के मुख्य द्वार पर एक सीसीटीवी कैमरा लगा था, तो दूसरा हाल में और तीसरा कैमरा मतदान स्थल पर लगा था। सुरक्षा की चाक चौबंद का व्यवस्था का नजारा भी कुछ अलग ही नजर आया।

 ब्लाक के दोनों ओर मुख्य सड़क पर दो बैरियर लगाए गए थे, जहां सिविल पुलिस के साथ ही पीएसी भी तैनात की गई थी। पुलिस ने ब्लाक प्रमुख प्रत्याशियों को मतदान स्थल से करीब दो सौ मीटर दूर कर दिया था और अंदर किसी को जाने नहीं दिया गया। सीडीओ महेंद्र सिंह मुस्तैद रहे।


 तीन बजकर 20 मिनट पर जब प्रशांत सिंह को 24 वोट मिलने और जीत की घोषणा हुई तो सपा समर्थितों के चेहरे मुरझा गए।
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