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Sonebhadra News: एनजीटी के आदेश पर सोन नदी में रोका गया बालू खनन
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सोनभद्र। एनजीटी ने सोन नदी में हो रहे बालू खनन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। जलीय पर्यावरण और इसमें रह रहे जीवों के संरक्षण के मद्देनजर जारी आदेश में एनजीटी ने नदी के प्रवाह क्षेत्र में शामिल यूपी, एमपी और बिहार की सरकारों को संयुक्त कमेटी बनाकर सोन नदी को अभ्यारण्य क्षेत्र में इको सेंसेटिव जोन बनाने पर भी विचार करने को कहा है। इसके लिए तीन माह की समय सीमा तय की है।
संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट के बाद नदी में खनन का भविष्य तय होगा। एनजीटी के आदेश के बाद रविवार को प्रशासन ने जिले में नदी से हो रहे सभी खनन को बंद करा दिया। मध्य प्रदेश से निकलकर यूपी के सोनभद्र से होकर बिहार के डेहरी आनसोन तक प्रवाहित होने वाली सोन नदी में कई जगह खनन हो रहा है। एनजीटी में याचिका दायर करने वाले बिरसा मुंडा फाउंडेशन के विकास शाक्य ने रविवार को प्रेस वार्ता में बताया कि सोन नदी कछुआ, मगरमच्छ, घड़ियाल जैसे जलीय जीवों का प्राकृतिक ठिकाना है।
इस संबंध में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने इस पर बहस की। इस मामले में एनजीटी ने 19 मई को 138 पेज का विस्तृत आदेश जारी किया है। इसमें सोनभद्र के सोन नदी में बालू खनन पर प्रतिबंध लगाते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार तीनो राज्यों को निर्देश जारी किया है कि सोन नदी को अभ्यारण्य क्षेत्र में इको सेंसिटिव जोन का हिस्सा बनानेपर विचार करें। जब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती, तब तक खनन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।अवैध खनन से कमाई करने वालों की भी जांच के लिए कहा है। डीएम सोनभद्र और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसका अनुपालन कराने को कहा है। इस बाबत डीएम चंद्र विजय सिंह ने बताया कि एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन में कदम उठाया जा रहा है। फिलहाल नदी में खनन कार्य रोकने को कहा गया है। फैसले का अध्ययन किया जा रहा है।
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संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट के बाद नदी में खनन का भविष्य तय होगा। एनजीटी के आदेश के बाद रविवार को प्रशासन ने जिले में नदी से हो रहे सभी खनन को बंद करा दिया। मध्य प्रदेश से निकलकर यूपी के सोनभद्र से होकर बिहार के डेहरी आनसोन तक प्रवाहित होने वाली सोन नदी में कई जगह खनन हो रहा है। एनजीटी में याचिका दायर करने वाले बिरसा मुंडा फाउंडेशन के विकास शाक्य ने रविवार को प्रेस वार्ता में बताया कि सोन नदी कछुआ, मगरमच्छ, घड़ियाल जैसे जलीय जीवों का प्राकृतिक ठिकाना है।
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इस संबंध में याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक चौबे ने इस पर बहस की। इस मामले में एनजीटी ने 19 मई को 138 पेज का विस्तृत आदेश जारी किया है। इसमें सोनभद्र के सोन नदी में बालू खनन पर प्रतिबंध लगाते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार तीनो राज्यों को निर्देश जारी किया है कि सोन नदी को अभ्यारण्य क्षेत्र में इको सेंसिटिव जोन का हिस्सा बनानेपर विचार करें। जब तक रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती, तब तक खनन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।अवैध खनन से कमाई करने वालों की भी जांच के लिए कहा है। डीएम सोनभद्र और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसका अनुपालन कराने को कहा है। इस बाबत डीएम चंद्र विजय सिंह ने बताया कि एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन में कदम उठाया जा रहा है। फिलहाल नदी में खनन कार्य रोकने को कहा गया है। फैसले का अध्ययन किया जा रहा है।
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