रूस-यूक्रेन संकटः खारकीव रेलवे स्टेशन पर फंसा सोनभद्र का अक्षत, ट्रेन में चढ़ने नहीं दे रही यूक्रेनी सेना
यूक्रेन में फंसे छात्रों ने रात भर जागकर भारत के राष्ट्रीय ध्वज बनाए। सुबह तिरंगा हाथ में लेकर खारकीव रेलवे स्टेशन की करीब 10 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की।
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच वहां फंसे भारतीय छात्रों के लौटने का सिलसिला जारी है। बिगड़े हालात के बीच किसी तरह बस टैक्सी का सहारा लेकर रोमानिया पहुंच रहे हैं। हालांकि अभी भी कई छात्र फंसे हैं। इन्हीं में यूपी के सोनभद्र के एमबीबीएस के छात्र अक्षत गुप्ता को लेकर उनका परिवार चिंतित हैं।
बुधवार की सुबह तक अक्षत के वहां से निकलने की सूचना मिली थी मगर दोपहर बाद खारकीव स्टेशन तक पहुंचने के बाद ट्रेन पर न चढ़ने देने की खबर ने माता-पिता को परेशान कर दिया है। फोन पर फफकते बेटे की आवाज सुनकर उनकी नींद भी उड़ गई है। वह मदद के लिए भारत सरकार के टोल फ्री नंबरों पर संपर्क साध रहे हैं।
अक्षत के पिता अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि बुधवार की सुबह यूक्रेन के समयानुसार करीब आठ बजे खारकीव में फंसे भारतीय मूल के करीब 200 छात्रों को यूनिवर्सिटी के बंकर से निकालकर भारत भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों को अपनी निगरानी में रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया।
तिरंगा हाथ में होने पर रूसी सेना ने उन्हें नहीं रोका
यहां से छात्र ट्रेन से पोलैंड बार्डर पहुंचेंगे उसके बाद बस से पोलैंड में प्रवेश करेंगे। इसके लिए छात्रों ने रात भर जागकर भारत के राष्ट्रीय ध्वज बनाए। सुबह तिरंगा हाथ में लेकर खारकीव रेलवे स्टेशन की करीब 10 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। तिरंगा हाथ में होने पर रूसी सेना ने उन्हें नहीं रोका।
बताया था कि सभी छात्र खारकीव से लबीब तक ट्रेन से सफर करेंगे। उसके बाद बस से पोलैंड बार्डर पहुंचेंगे। वहीं शाम को अक्षत के पिता से जानकारी ली गई तो वो फूट फूटकर रोने लगे। उन्होंने बताया कि दिन भर से बच्चे खारकीव रेलवे स्टेशन पर भूखे प्यासे पड़े हुए हैं। यूक्रेन के सैनिक उन्हें ट्रेन में चढ़ने नहीं दे रहे हैं।
बताया कि जो भी ट्रेन आ रही है उसमें यूक्रेन और अन्य देशों के लोगों को ही चढ़ने दिया जा रहा है। रोते हुए बताया कि उधर भारतीय उच्चायोग की ओर से चेतावनी जारी कर दी गई है कि किसी हाल में भारतीय नागरिक यूक्रेन की सीमा से बाहर निकलें। चूंकि खारकीव से पोलैंड बार्डर की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर की है। ऐसे में छात्र वहां से कैसे निकलें ये बड़ा सवाल है।
दस किमी पैदल चल कर पहुंचा रोमानिया
यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए भदोही के होनहारों की वापसी शुरू हो गई है। शुभम कुमार दूबे के बाद मंगलवार रात गोपीगंज निवासी शाह फैसल की भी वापसी हो गई। उसने बताया कि बिगड़े हालात के बीच टैक्सी का सहारा लिया और किसी तरह से रोमानिया पहुंचा।
इस बीच करीब 10 किमी पैदल चलना पड़ा। वहां से दिल्ली के लिए फ्लाइट मिली। उसने अपने चचेरे भाई की भी शीघ्र वापसी की उम्मीद जताई। फैसल के मुताबिक यूक्रेन की स्थिति काफी चिंताजनक है।गोपीगंज निवासी मकबूल अहमद का पुत्र शाह फैसल मंगलवार की रात घर आ गया।
इससे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। इवानो नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे शाह फैसल का यह पांचवां वर्ष है। उसने बताया कि यूक्रेन के इवानो से रोमानिया पहुंचने के लिए डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी टैक्सी से तय की।
भीड़ के कारण आगे नहीं जा सकी टैक्सी
रोमानिया बार्डर से करीब 10 किमी पहले ही भीड़ के कारण टैक्सी आगे नहीं जा सकी। वहां से 10 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रोमानिया- यूक्रेन बार्डर पहुंचा । वहां करीब 48 घंटे तक इंतजार करने के बाद रोमानिया पहुंचे, तब राहत मिली। रोमानिया एयरपोर्ट से मंगलवार को दिल्ली पहुंचा। वहां से घर आए।
उसने बताया कि यूक्रेन की स्थिति काफी चिंताजनक है। वहां के अधिकारी व सेना हम लोगों का सहयोग नहीं कर रहे थे। बार्डर पर यूक्रेन की सेना पहले यूक्रेनी नागरिकों को निकाल रही थी। बताया कि रोमानिया पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास का पूरा सहयोग मिला और हम सुरक्षित घर पहुंचे। फैसल के चचेरे भाई मुजैफ और गोपीगंज निवासी चित्रांश के भी रोमानिया पहुंचने की सूचना है।
यूक्रेन से सकुशल लौटी रेनू, परिवार में खुशी
यूक्रेन में हो रही रूस की बमबारी के बीच फंसी आजमगढ़ के सगड़ी तहसील के खतीबपुर गांव की एमबीबीएस की छात्रा रेनू यादव के घर पहुंचते ही परिवार में खुशी व्याप्त है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने भी पहुंचकर रेनू को बधाई दी। नायब तहसीलदार सगड़ी मयंक मिश्रा घर पहुंचकर रेनू का हालचाल जाना।
पूर्व प्रधान राजेश यादव और भाई सत्यशील यादव ने रेनू को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी। रेनू ने बताया कि 28 फरवरी को निजी बस से 125 डालर किराया देकर हम लोग रोमानिया बॉर्डर के लिए निकले। लेकिन 25 किलोमीटर पहले ही बस ने हम लोगों को छोड़ दिया।
जिसके चलते 25 किलोमीटर पैदल चलकर हम लोग रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। रोमानिया के बुद्धा एयरवेज से मैं एक मार्च को दिल्ली पहुंच गई, जहां उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से निशुल्क खाने पीने और रहने की व्यवस्था की गई थी।
प्रदेश सरकार ने बनारस तक का फ्री हवाई जहाज का टिकट दिया
प्रदेश सरकार ने हम लोगों को बनारस तक का फ्री हवाई जहाज का टिकट दिया। मंगलवार को रात में नौ बजे करीब बनारस पहुंच गई। बनारस से देर रात मैं स्वजनों के साथ अपने घर आ गई। रेनू यादव ने कहा कि युद्ध के चलते यूक्रेन में हालात खराब है।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि जितने भी मेरे देश के छात्र वहां फंसे हैं, वह सब कुशल भारत लौट आएं। रेनू के भारत सरकार के प्रयास की सराहना की। उसके घर पहुंचने पर भाई डा. सत्यशील यादव, बाबा रामस्वरूप यादव, नरेंद्र यादव, मां मीरा यादव, सुरेंद्र यादव, चाची गीता यादव, बहन समीक्षा यादव ने खुशी व्यक्त किया।