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Sonebhadra News: दुष्कर्म के दोषी को 10 साल की सजा, गवाहों के मुकरने का नहीं मिला लाभ

Sat, 27 Sep 2025 06:44 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Sep 2025 06:44 PM IST
सार

सोनभद्र में छह साल पुराने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी महेश को अदालत ने 10 वर्ष की कठोर कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय के निर्णय में मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों की जिरह निर्णायक रही।

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Rape convict sentenced to 10 years in prison, witnesses turning hostile did not benefit

विस्तार

सोनभद्र। राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र की नाबालिग से छह साल पहले हुए दुष्कर्म के मामले में दोषी महेश को अदालत ने 10 वर्ष के कठोर कैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए उस पर 25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अर्थदंड की धनराशि में से 20 हजार रुपये पीड़िता को मिलेगी।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 12 फरवरी 2019 को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी बेटी (14) को छह फरवरी की शाम मुबारकपुर निवासी महेश बहला फुसलाकर भगा ले गया। पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर पूछताछ की और चिकित्सकीय परीक्षण कराया तो मामला दुष्कर्म का निकला। मेडिकल परीक्षण में भी पीड़िता नाबालिग पाई गई।
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लगभग छह साल तक सुनवाई चली। इस दौरान प्रकरण में तरह-तरह के मोड़ आते रहे। मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब पीड़िता के साथ शौच जाते समय मौजूद उसकी दो सहेलियों और आरोपी की मामी ने घटना का समर्थन करने से इंकार कर दिया। स्थिति को देखते हुए अभियोजन पक्ष की तरफ से उन्हें गवाही की सूची से किनारे (उन्मोचित) करा दिया लेकिन बचाव पक्ष की तरफ से सफाई साक्ष्य के लिए उन्हीं को अपना गवाह बनाकर पेश कर दिया।
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तीनों गवाहों से शासकीय अधिवक्ताओं ने बारी-बारी जिरह की, जिसमें आरोपी की तरफ से पीड़िता को वाराणसी ले जाए जाने और दुष्कर्म की पुष्टि हुई। वहीं उम्र के मामले में भी चिकित्सकीय परीक्षण के निष्कर्षों के जरिए पीड़िता को नाबालिग होने की बात प्रमाणित हुई।


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इन तथ्यों ने निभाई सजा दिलाने में अहम भूमिका :
न्यायालय ने मामले के परीक्षण में पाया कि पीड़िता का पिता एक गांव का व्यक्ति है, जिसे घटना के सही समय की सुध नहीं होती। न ही उससे इस बात की उम्मीद करना न्याय की दृष्टि से मुनासिब होगा। वहीं दुष्कर्म को लेकर न्यायालय ने माना कि नाबालिग की सहमति से भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना बलात्संग की श्रेणी में आता है।
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