{"_id":"5f68e7758ebc3ee8e37ba2a0","slug":"rape-convict-imprisoned-for-20-years-sonbhadra-news-vns5486107117","type":"story","status":"publish","title_hn":"बलात्कार के दोषी को 20 साल की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बलात्कार के दोषी को 20 साल की कैद
विज्ञापन
सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने सोमवार को बलात्कार के मामले में दोषी दारा उर्फ योगेश को दोष सिद्ध पाकर 20 साल की कैद और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। साथ ही पीड़िता को अर्थदंड की आधी रकम पांच हजार रुपये मिलेंगे।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोन थाने में एक सितंबर 2018 को पीड़िता के पिता ने दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी 17 वर्षीय नाबालिग लड़की जन्म से ही गूंगी है। सुबह खेत में जा रही थी कि कोन थाना क्षेत्र के दारा उर्फ योगेश ने उसके साथ बलात्कार किया। बेटी की चीख सुनकर लोग पहुंचे लेकिन आरोपी भाग निकला। इस सूचना पर दारा के विरुद्ध बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की गई। इस दौरान मेडिकल जांच में लड़की की उम्र 19 वर्ष पाई गई जो बालिग थी। पर्याप्त सबूत पाए जाने पर विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने एवं गवाहों के बयान के साथ ही पर्याप्त सबूत पाए जाने पर दारा उर्फ योगेश को दोष सिद्ध पाकर 20 साल की कैद एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। साथ ही अर्थदंड की आधी रकम पांच हजार रुपये पीड़िता को दिया जाएगा।
इनसेट--
लापरवाह विवेचक के विरुद्ध डीजीपी को पत्रक
सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनभद्र पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले के विवेचक/इंस्पेक्टर अंजनी कुमार मिश्रा को विवेचना में लापरवाही बरतने एवं अभियुक्त को लाभ पहुंचाने का प्रयास मानते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को आदेश की प्रति के साथ ही पत्र भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है। आरोप है कि पीड़ित लड़की के बलात्कार के समय पहने हुए कपड़े को विवेचक ने कब्जे में नहीं लिया जो विवेचक के कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के मुताबिक कोन थाने में एक सितंबर 2018 को पीड़िता के पिता ने दी तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी 17 वर्षीय नाबालिग लड़की जन्म से ही गूंगी है। सुबह खेत में जा रही थी कि कोन थाना क्षेत्र के दारा उर्फ योगेश ने उसके साथ बलात्कार किया। बेटी की चीख सुनकर लोग पहुंचे लेकिन आरोपी भाग निकला। इस सूचना पर दारा के विरुद्ध बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की गई। इस दौरान मेडिकल जांच में लड़की की उम्र 19 वर्ष पाई गई जो बालिग थी। पर्याप्त सबूत पाए जाने पर विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने एवं गवाहों के बयान के साथ ही पर्याप्त सबूत पाए जाने पर दारा उर्फ योगेश को दोष सिद्ध पाकर 20 साल की कैद एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। साथ ही अर्थदंड की आधी रकम पांच हजार रुपये पीड़िता को दिया जाएगा।
विज्ञापन
इनसेट--
लापरवाह विवेचक के विरुद्ध डीजीपी को पत्रक
सोनभद्र। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनभद्र पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले के विवेचक/इंस्पेक्टर अंजनी कुमार मिश्रा को विवेचना में लापरवाही बरतने एवं अभियुक्त को लाभ पहुंचाने का प्रयास मानते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को आदेश की प्रति के साथ ही पत्र भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा है। आरोप है कि पीड़ित लड़की के बलात्कार के समय पहने हुए कपड़े को विवेचक ने कब्जे में नहीं लिया जो विवेचक के कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही है।
विज्ञापन