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Sonebhadra News: जमीर ने आठ महीने में राज बनकर पीड़िता से मोबाइल पर की 132 बार बात

Wed, 24 Jun 2026 12:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:17 AM IST
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Over a period of eight months, Zamir posing as Raj spoke to the victim times on her mobile phone
सोनभद्र। रामपुर बरकोनिया थानाक्षेत्र में राज बनकर हिंदू किशोरी का यौन शोषण करने के आरोपी जमीर की तरफ से दाखिल जमानत अर्जी न्यायालय ने खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओमकार शुक्ल की अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान अदालत के संज्ञान में लाया गया कि जमीर ने आठ महीने के भीतर राज बनकर पीड़िता से मोबाइल पर 132 बार बात की थी। वीडियो काॅल के जरिए भी एक-दो बार बात की गई। वहीं पीड़िता की तरफ से भी दर्ज कराए गए बयान में कहा गया कि उसे राज के जमीर होने की जानकारी तब हुई, जब वह थाने पहुंची। न्यायालय ने आरोपों को गंभीर श्रेणी का मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। गौरतलब है कि नाबालिग को झांसा देकर प्रेम संबंध बनाने, उसका यौन शोषण करने और उसे सुनियोजित तरीके से घर से बुलाकर दूसरी जगह रखवाने के मामले में धर्मदासपुर निवासी राज उर्फ जमीर को गिरफ्तार किया गया था। उसकी ओर से दाखिल जमानत अर्जी में बचाव पक्ष की तरफ से दलील दी गई थी पीड़िता को घर से बुलाकर चंदौली जिले के बरवाडीह में रखवाने के मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। वह 12 मई को ही बंगलूरू चला गया था। 30 मई को लौटा तो उसे थाने बुलाकर जेल भेज दिया गया। यह भी दावा किया गया कि पीड़िता का प्रेम प्रसंग किसी दूसरे से था और उसी ने मोबाइल दिया था। उसी ने अपराध भी किया। उनसे सुलह कर उसे फंसा दिया गया। वहीं अभियोजन पक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए प्रकरण को गंभीर बताया और दलील दी कि आरोपी ने ही पीड़िता को विकास के नाम का सिम उपलब्ध कराया था। अब उसके नाम की आड़ लेकर बचने की कोशिश कर रहा है। न्यायालय ने पाया कि केस डायरी के अलावा पीड़िता ने जो बयान दर्ज कराया है, उसमें उसने बताया है कि दीपावली के आसपास उसे डरा धमकाकर बात करने के लिए राजी किया गया। खुद का नाम राज बताते हुए आरोपी ने दूसरे के जरिए उसे मोबाइल भेजा। इस पर आरोपी ही फोन करता था। एक बार वीडियो कॉल से भी बात की गई थी। आठ अप्रैल को डरा-धमकाकर गांव के बाहर बुलाया गया। वहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद वह उस पर घर से भागने के लिए दबाव बनाने लगा। 24 मई की भोर में चार बजे जब घर के सभी लोग सो रहे थे, तब वह बाहर निकली। राज ने उसे लेने के लिए ई रिक्शा भेजा। रामगढ़ पहुंचने पर एक महिला मिली। वह उसे दूसरे टेंपो पर बिठाकर बरवाडीह ले गई। वहां उसे मुस्लिम परिवार में रखा गया। पुलिस की तरफ से ढूंढ़े जाने की जानकारी मिली, तब वही मुस्लिम परिवार उसे वापस छोड़ने जा रहा था। रामगढ़ में उसे रोककर पुलिस ने उसे अपने संरक्षण में ले लिया। थाने पहुंचने पर उसे पता चला कि जिसे वह राज समझ रही थी वह वास्तव में जमीर है।
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