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अस्वीकृ त दावों पर पुर्नविचार कर पात्रों को दिलाएं वनाधिकार
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सोनभद्र। कलेक्ट्रेट सभागार में वनाधिकार अधिनियम को लेकर शनिवार को कार्यशाला हुई। इससें अस्वीकृत दावों पर दोबारा विचार करके पात्रों को वनाधिकार दिलाने पर चर्चा हुई। विशेष सचिव समाज कल्याण धीरज कुमार ने कहा जिले में लगभग 65 हजार वनाधिकार के दावे प्राप्त हुए। इसमें लगभग 32 हजार अनुसूचित जनजाति के दावे में मात्र 11 हजार अनुसूचित जनजाति के पात्र दावे पाए गए। यानी अनुसूचित जनजाति के 22 हजार दावे अस्वीकृत हुए। वहीं अन्य परंपरागत वन निवासियों के 33 हजार दावे भी अस्वीकृत हुए हैं। अनुसूचित जनजाति यानी वनवासियों के लिए जहॉ 13 दिसंबर 2005 के पूर्व वन भूमि पर रहने के प्रमाण देने की व्यवस्था है, वहीं अन्य परंपरागत वनवासियों के लिए 75 साल का वन भूमि का उपयोग करने का प्रमाण देना होगा। अस्वीकृत किये गये दावों के सम्बन्ध में सुनवाई का मौका देने के लिए कार्यशाला में सभी को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्वीकृत दावों के सम्बन्ध में सुनवाई व अपील का मौका सभी को है। अस्वीकृत दावों के दोबारा विचार में किसी प्रकार की हीलाहवाली नहीं होगी।
कार्यशाला में अपर निदेशक जनजाति विकास प्रियंका वर्मा, डीएम एस राजलिंगम, एडीएम योगेन्द्र बहादुर सिंह, प्रभारी वनाधिकारी, एसडीएम सदर यमुमाधर चौहार, एसडीएम घोरावल प्रकाश चंद्र पांडेय, दुद्धी एसडीएम, जिला समाज कल्याण अधिकारी केके तिवारी, डीपीआरओ आरके भारती आदि उपस्थित रहे।
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कार्यशाला में अपर निदेशक जनजाति विकास प्रियंका वर्मा, डीएम एस राजलिंगम, एडीएम योगेन्द्र बहादुर सिंह, प्रभारी वनाधिकारी, एसडीएम सदर यमुमाधर चौहार, एसडीएम घोरावल प्रकाश चंद्र पांडेय, दुद्धी एसडीएम, जिला समाज कल्याण अधिकारी केके तिवारी, डीपीआरओ आरके भारती आदि उपस्थित रहे।
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